श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 2025 की वार्षिक समीक्षा जारी की। इसमें भारत के असंगठित कामगारों को औपचारिक व्यवस्था में लाने और नई श्रेणियों के कामगारों तक सामाजिक सुरक्षा पहुँचाने की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ बताई गई हैं।
ई-श्रम पोर्टल को 2021 में असंगठित कामगारों के राष्ट्रीय डेटाबेस के रूप में शुरू किया गया था। इस पोर्टल पर 2025 में पंजीकरण की संख्या 31.42 करोड़ के पार पहुँच गई। भाशिनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भाषा प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ने के बाद ई-श्रम अब 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इससे देश के अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के कामगारों के लिए इसका इस्तेमाल आसान हुआ है।
गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए एक ढाँचा तैयार किया जा रहा है। इसमें उन्हें सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रस्ताव है, जिसमें दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा और भविष्य निधि के लाभ शामिल हैं। यह पहल ऐप से काम पाने वाले डिलीवरी कर्मियों, राइड-हेलिंग ड्राइवरों और प्लेटफ़ॉर्म पर फ़्रीलांस काम करने वालों की बढ़ती असुरक्षा से निपटने के लिए है।
प्रधानमंत्री सामाजिक उत्थान एवं रोजगार आधारित जनकल्याण (PM-SURAJ) के तहत अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों और सफाई मित्रों जैसे वंचित समूहों को ऋण सहायता दी जाती है। इससे अलग, पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण तथा ऋण सहायता देती है।
मंत्रालय ने ई-श्रम को भाशिनी से जोड़कर कई भाषाओं में इसकी पहुँच बढ़ाने की डिजिटल पहल की है। भारत में अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों की संख्या 50 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है; उनके लिए डिजिटल दूरी घटाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
ये सभी पहल सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत सभी कामगारों को सामाजिक सुरक्षा देने के लक्ष्य के अनुरूप हैं। यह संहिता नौ केंद्रीय श्रम कानूनों को एक साथ लाती है।
