राजस्थान ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब PM-कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) — कॉम्पोनेंट A और C — के तहत स्थापित सौर क्षमता 2,001 MW तक पहुँची। सवाई माधोपुर जिले के कोलड़ा में बने नए 1.82 MW सौर संयंत्र से यह आंकड़ा पार हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर कॉम्पोनेंट-A स्थापनाओं में राजस्थान अग्रणी है, जो 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य में राज्य की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करता है।
राजस्थान: PM-कुसुम के तहत सौर क्षमता 2,001 MW के मील के पत्थर को पार कर गई
राजस्थान ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब PM-कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) — कॉम्पोनेंट A और C — के तहत स्थापित सौर क्षमता 2,001 MW तक पहुंच गई। सवाई माधोपुर जिले के कोलड़ा में नए 1.82 MW सौर संयंत्र के जुड़ने से यह आंकड़ा पार हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर कॉम्पोनेंट-A के तहत स्थापनाओं में राजस्थान अग्रणी है, जो 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य में राज्य की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करता है।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान ने PM-KUSUM के तहत घटक A और C में सौर क्षमता का 2,001 MW का मील का पत्थर पार किया।
- सवाई माधोपुर के कोलड़ा में नए 1.82 MW सौर संयंत्र से यह आंकड़ा पार करने में मदद मिली।
- घटक-A के तहत सौर क्षमता स्थापित करने में राजस्थान राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी है।
- यह उपलब्धि 2030 तक भारत के 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करती है।
- PM-KUSUM कृषि और बंजर भूमि पर विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देती है।
- इस उपलब्धि से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा बदलाव में राजस्थान की रणनीतिक भूमिका स्पष्ट होती है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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जिस 1.82 मेगावाट सौर संयंत्र ने राजस्थान को पीएम-कुसुम 2,001 मेगावाट के मील के पत्थर से आगे बढ़ाया, वह किस जिले में शुरू किया गया?
सवाई माधोपुर जिले के कोलाड़ा गाँव में नवीनतम 1.82 मेगावाट सौर संयंत्र लगने से राजस्थान की संचयी पीएम-कुसुम (घटक A और C) क्षमता 2,001 मेगावाट के स्तर से आगे बढ़ गई। राजस्थान 2030 के 500 गीगावाट नवीकरणीय लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PM-KUSUM क्या है और राजस्थान के 2,001 MW के स्तर तक पहुँचने में किन घटकों का योगदान रहा?
PM-KUSUM (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) कृषि और बंजर भूमि पर विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली केंद्र सरकार की योजना है। राजस्थान ने 2,001 MW का स्तर योजना के घटक A और C के तहत हासिल किया और राज्य घटक A के तहत स्थापित परियोजनाओं में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी है।
किस सौर संयंत्र ने राजस्थान की PM-KUSUM क्षमता को 2,001 MW के स्तर से आगे पहुँचाया?
सवाई माधोपुर जिले के कोलड़ा में हाल ही में चालू हुए 1.82 MW सौर संयंत्र से राजस्थान की कुल PM-KUSUM सौर क्षमता 2,001 MW के स्तर को पार कर गई।
2030 के लिए भारत का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य क्या है और इसमें राजस्थान का योगदान क्या है?
भारत ने 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। राजस्थान PM-KUSUM घटक-A के तहत सौर संयंत्र लगाने में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी है और इस राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
PM-KUSUM योजना के विभिन्न घटक क्या हैं?
PM-KUSUM के तीन घटक हैं: घटक-A में बंजर भूमि पर 2 MW तक के विकेंद्रीकृत ग्रिड-कनेक्टेड सौर संयंत्र लगाए जाते हैं, घटक-B में व्यक्तिगत सिंचाई पंपों का सौरकरण होता है, और घटक-C में ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों का सौरकरण होता है। राजस्थान घटक-A के तहत संयंत्र लगाने में अग्रणी है।
राजस्थान को भारत के सौर ऊर्जा की ओर बदलाव के लिए रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
राजस्थान में भारत में सौर विकिरण सबसे अधिक मिलता है, बंजर और अर्ध-शुष्क भूमि के विशाल क्षेत्र हैं और राज्य सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर मजबूत प्रतिबद्धता रखती है। PM-KUSUM घटक-A के तहत संयंत्र लगाने में इसकी अग्रणी स्थिति 2030 तक 500 GW लक्ष्य के लिए इसे बहुत महत्वपूर्ण बनाती है।
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