भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बहुत तेज़ वृद्धि हुई है—स्टार्टअप की संख्या 2021 के 5,365 से बढ़कर 2025 में 13,000 हो गई। अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी नीति (BioE3) तथा राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन जैसे नीतिगत ढाँचों ने इस वृद्धि को गति दी है। भारत ने 2030 तक जैव-अर्थव्यवस्था को 300 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है; 2024 में इसका आकार 165.7 अरब डॉलर था। इस क्षेत्र में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी, जैव-औषधियाँ और जैव-ऊर्जा शामिल हैं। एशिया-प्रशांत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। इस विकास का राजस्थान के लिए विशेष महत्व है। राज्य जयपुर में एक जैव-प्रौद्योगिकी पार्क बना रहा है और अपने बड़े कृषि क्षेत्र के कारण कृषि जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है।
भारत का जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र: 4 वर्षों में स्टार्टअप की संख्या 5,365 से 13,000; 2030 तक 300 अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बहुत तेज़ वृद्धि हुई है—स्टार्टअप की संख्या 2021 के 5,365 से बढ़कर 2025 में 13,000 हो गई। अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी नीति (BioE3) तथा राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन जैसे नीतिगत ढाँचों ने इस वृद्धि को गति दी है। भारत ने 2030 तक जैव-अर्थव्यवस्था को 300 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है; 2024 में इसका आकार 165.7 अरब डॉलर था। इस क्षेत्र में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी, जैव-औषधियाँ और जैव-ऊर्जा शामिल हैं। एशिया-प्रशांत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। इस विकास का राजस्थान के लिए विशेष महत्व है। राज्य जयपुर में एक जैव-प्रौद्योगिकी पार्क बना रहा है और अपने बड़े कृषि क्षेत्र के कारण कृषि जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है।
मुख्य तथ्य
- भारत में जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की संख्या 2021 के 5,365 से बढ़कर 2025 में 13,000 हो गई।
- भारत ने 2030 तक 300 अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा है; 2024 में इसका आकार 165.7 अरब डॉलर था।
- अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी नीति (BioE3) और राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन ने इस वृद्धि को गति दी है।
- एशिया-प्रशांत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है।
- इस क्षेत्र में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी, जैव-औषधियाँ और जैव-ऊर्जा शामिल हैं।
- राजस्थान जयपुर में जैव-प्रौद्योगिकी पार्क विकसित कर रहा है और कृषि जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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भारत में बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में 500 से कम थी। 2025 तक यह बढ़कर कितनी हो गई?
PIB के अनुसार 2014 में भारत में बायोटेक क्षेत्र में 500 से कम स्टार्टअप काम कर रहे थे। 2025 तक यह संख्या 10,000 से अधिक हो गई। इसलिए दिए गए विकल्पों में "10,000 से अधिक" सही उत्तर है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2021 से 2025 के बीच भारत में जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की संख्या कैसे बढ़ी?
भारत में जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की संख्या 2021 में 5,365 थी, जो 2025 में बढ़कर 13,000 हो गई। इस तेज़ वृद्धि के पीछे नीतिगत समर्थन और अनुसंधान एवं विकास में बढ़ता निवेश है। इससे भारत का जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हो गया है।
2030 के लिए भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का लक्ष्य क्या है और 2024 में इसका आकार कितना था?
भारत ने 2030 तक 300 अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा है; 2024 में इसका आकार 165.7 अरब डॉलर था। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पाने में अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी नीति (BioE3) तथा राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन जैसी नीतियाँ मदद कर रही हैं।
अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी नीति (BioE3) क्या है?
अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी नीति (BioE3) का अंग्रेज़ी में पूरा नाम Biotechnology for Economy, Environment and Employment है। यह राष्ट्रीय नीति कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी, जैव-औषधियों और जैव-ऊर्जा में नवाचार को बढ़ावा देती है, ताकि जैव-प्रौद्योगिकी के सहारे भारत की आर्थिक वृद्धि तेज़ हो।
एशिया-प्रशांत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है और राजस्थान इसमें कैसे योगदान दे रहा है?
एशिया-प्रशांत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। राजस्थान जयपुर में जैव-प्रौद्योगिकी पार्क विकसित कर रहा है और कृषि जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इस तरह वह राष्ट्रीय जैव-अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों में योगदान दे रहा है।
भारत के जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग में कौन-से क्षेत्र शामिल हैं?
भारत के जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, औद्योगिक जैव-प्रौद्योगिकी, जैव-औषधियाँ और जैव-ऊर्जा शामिल हैं। राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन का विशेष ध्यान जैव-औषधियों पर है, जिनमें टीके, बायोसिमिलर और उपचार में काम आने वाले प्रोटीन शामिल हैं; ये जन-स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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