भारत सरकार ने 11 अप्रैल 2026 को उन्नीसवीं सदी के महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के राष्ट्रव्यापी द्विवर्षीय समारोह का औपचारिक शुभारंभ किया, जो 11 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2028 तक चलेगा। औपचारिक शुभारंभ डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तत्वावधान में अंतर्राज्यीय सांस्कृतिक विविधता कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित "फुले अक्रॉस इंडिया" नामक उद्घाटन समारोह से हुआ। इतिहास में पहली बार संसद भवन में भी उनकी 200वीं जयंती पर स्मारक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह का मार्गदर्शन और देखरेख करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 126 सदस्यीय उच्चस्तरीय राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रतिभा पाटिल, पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और अमित शाह, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांसद, शिक्षाविद्, न्यायविद्, आध्यात्मिक नेता, सांस्कृतिक हस्तियां और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। कार्यक्रम केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और नागरिक समाज समूहों के सहयोग से सांस्कृतिक आयोजनों, प्रदर्शनियों, संगोष्ठियों, युवा संवाद और अकादमिक चर्चाओं के रूप में आयोजित किए जाएंगे। महात्मा ज्योतिबा फुले (1827-1890) ने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए पहला विद्यालय स्थापित किया, 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की और जातिवाद विरोधी प्रभावशाली ग्रंथ "गुलामगिरी" की रचना की। जातिगत उत्पीड़न के विरुद्ध, स्त्री शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के पक्ष में उनका आजीवन संघर्ष उन्हें आधुनिक भारतीय सामाजिक सुधार के अग्रणी व्यक्तित्वों में शामिल करता है।