एमिरेट्स एनबीडी और आरबीएल बैंक का यह सौदा भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी पूंजी की भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। एमिरेट्स एनबीडी ने आरबीएल बैंक में लगभग 60% नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी करीब ₹26,850 करोड़, की प्राथमिक पूंजी लगाने का प्रस्ताव रखा। इसे भारत के बैंकिंग क्षेत्र में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और भारतीय बैंकिंग में सबसे बड़ी इक्विटी पूंजी जुटाने की घटना बताया गया है।
सौदे की बनावट परीक्षा की दृष्टि से खास है। निवेश प्रेफरेंशियल इश्यू के ज़रिए होना है, इसलिए पैसा मौजूदा शेयरधारकों के बीच ही नहीं घूमेगा, बल्कि आरबीएल बैंक की पूंजी स्थिति को मजबूत करेगा। प्रस्ताव नियामकीय मंज़ूरियों और सामान्य समापन शर्तों के अधीन है। इसके साथ एमिरेट्स एनबीडी को सेबी के अधिग्रहण नियमों के तहत सार्वजनिक शेयरधारकों से 26% तक हिस्सेदारी खरीदने के लिए अनिवार्य ओपन ऑफर भी लाना होगा। आरबीआई दिशानिर्देशों के अनुसार एमिरेट्स एनबीडी की भारत शाखाओं का आरबीएल बैंक में विलय भी प्रस्तावित है, जो प्रेफरेंशियल इश्यू पूरा होने के बाद होना है।
इस सौदे से यह पूछा जा सकता है कि बैंकिंग क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कैसे आता है, निजी बैंकों में नियंत्रण कैसे बदलता है, पूंजी पर्याप्तता क्यों महत्वपूर्ण है और प्रेफरेंशियल इश्यू तथा अधिग्रहण नियम कब लागू होते हैं। समसामयिकी के लिहाज़ से यह भारत-संयुक्त अरब अमीरात आर्थिक संबंधों और भारतीय वित्तीय क्षेत्र में वैश्विक निवेशकों के भरोसे को भी दिखाता है। आरबीएल बैंक की 564 शाखाओं, 1347 बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट शाखाओं और 415 एटीएम के नेटवर्क के कारण यह सिर्फ एक शेयर-खरीद नहीं, बल्कि भारत में बैंकिंग विस्तार, डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम है।
