नवंबर 2025 में ब्राजील के बेलेम में आयोजित पक्षकारों के 30वें सम्मेलन (COP30) में भारत के पर्यावरण मंत्री ने जलवायु समानता और पेरिस समझौते के तहत भारत की संशोधित जलवायु प्रतिबद्धताओं पर महत्वपूर्ण बयान दिया।

भारत ने 2035 के लिए संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) की घोषणा की — 2005 के स्तर की तुलना में GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कटौती का वादा किया, जो पहले के 45% लक्ष्य से अधिक है। साथ ही, भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 60% बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई, जो पहले के 50% लक्ष्य से अधिक है।

COP30 में भारत की स्थिति का मुख्य जोर विकासशील देशों के लिए अनुकूलन वित्त में 15 गुना वृद्धि की मांग पर रहा। भारत के पर्यावरण मंत्री ने कहा कि जलवायु समानता के लिए विकसित देशों — जो संचयी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की ऐतिहासिक जिम्मेदारी वहन करते हैं — को जलवायु परिवर्तन के सबसे गंभीर प्रभावों का सामना कर रहे विकासशील देशों को कहीं अधिक वित्तीय सहायता देनी होगी।

खास बात यह रही कि भारत ने जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई और अपनी यह स्थिति बनाए रखी कि ऊर्जा संक्रमण "न्यायसंगत और समान" होना चाहिए। बेलेम घोषणा में माना गया कि वर्तमान वैश्विक प्रतिबद्धताएं तापवृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने के लिए अपर्याप्त हैं।