भारत की डिजिटल खाई का यह मुद्दा सामाजिक न्याय, कौशल विकास और डिजिटल शासन से सीधे जुड़ता है। 2025 के इस अपडेट में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) कौशल और कंप्यूटर और इंटरनेट की पहुंच, दोनों में असमानता साफ दिखती है। आईसीटी कौशल के मामले में पुरुषों की हिस्सेदारी 22.78% है, जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी 13.91% है। यानी डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी के लिए जरूरी बुनियादी कौशल में लैंगिक अंतर अभी भी बड़ा है।

आय-वर्ग के आधार पर अंतर कहीं ज़्यादा साफ़ है। सबसे गरीब 20% परिवारों में कंप्यूटर और इंटरनेट की पहुंच 6.8% है, जबकि सबसे अमीर 20% परिवारों में यह 66.3% है। 66.3 को 6.8 से भाग देने पर अनुपात लगभग 9.75 आता है, इसलिए इसे लगभग दस गुना अंतर कहा जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में उपकरणों की उपलब्धता कम होना इस समस्या को और गहरा करता है, क्योंकि डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार सूचना तक पहुंच अक्सर उपकरण और इंटरनेट पर निर्भर करती है।

प्रीलिम्स में 22.78%, 13.91%, 6.8% और 66.3% जैसे आंकड़े सीधे तथ्यात्मक प्रश्नों में आ सकते हैं। इसका दायरा राष्ट्रीय है, इसलिए इसे केवल किसी एक राज्य या जिले की समस्या की तरह नहीं पढ़ना चाहिए। RAS और UPSC में ऐसे आंकड़े प्रीलिम्स के तथ्यात्मक प्रश्नों, मुख्य परीक्षा में समावेशन और शासन से जुड़े उत्तरों, तथा लैंगिक समानता और ग्रामीण-शहरी असमानता से जुड़े स्टैटिक-जीके प्रश्नों से भी जोड़े जा सकते हैं। मुख्य बात यह है कि डिजिटल खाई केवल तकनीक का प्रश्न नहीं है; यह अवसर, शिक्षा और आर्थिक भागीदारी तक असमान पहुंच का संकेत भी है।