6 फरवरी 2026 को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वी.ओ. चिदंबरनार (VOC) बंदरगाह प्राधिकरण ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) के साथ उन्नत ड्रोन-रोधी प्रणाली लगाने का समझौता किया। CEL भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग के अधीन एक सार्वजनिक उपक्रम है। प्रणाली चालू होने के बाद VOC बंदरगाह ऐसी व्यवस्था वाला भारत का पहला बंदरगाह बन जाएगा। इसे तीन महीने के भीतर पूरी तरह चालू किए जाने की उम्मीद है।

ड्रोन-रोधी प्रणाली में रेडियो आवृत्ति (RF) से पहचान और रडार आधारित तकनीक, दोनों का इस्तेमाल होगा। यह 5 किलोमीटर के दायरे में चारों ओर ड्रोन की पहचान करके उन्हें निष्क्रिय कर सकेगी। यह अनधिकृत ड्रोन का तुरंत पता लगा सकेगी, उन पर नज़र रख सकेगी, उनकी श्रेणी तय कर सकेगी और उन्हें निष्क्रिय कर सकेगी। इसे बंदरगाहों की जटिल कामकाजी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर खास तौर पर तैयार किया गया है।

यह पहल मेरीटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृत काल विजन 2047 के अनुरूप है तथा तटीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार करेगी। बंदरगाह देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे का हिस्सा हैं। हवाई ड्रोन का इस्तेमाल बंदरगाहों की निगरानी, तस्करी और संभावित आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है, इसलिए वे ऐसे खतरों के प्रति संवेदनशील हैं। CEL की भागीदारी से स्वदेशी तकनीक अपनाई जा रही है, जो रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया के लक्ष्य को आगे बढ़ाती है। VOC बंदरगाह भारत के प्रमुख कंटेनर और थोक माल बंदरगाहों में से एक है। दक्षिण भारत से होने वाले ग्रेनाइट और वस्त्रों के निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी बंदरगाह से गुजरता है।