प्रकाशित: 14 दिसंबर 2025RBI/DD Newsअर्थव्यवस्था
RBI OMO: दिसम्बर में प्रणाली में 1 लाख करोड़ रुपये की तरलता डाली गई
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दिसम्बर 2025 में बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ाने के लिए कुल 1 लाख करोड़ रुपये की खुले बाजार परिचालन (OMO) खरीद की घोषणा की और उसे लागू किया। यह खरीद दो किश्तों में हुई — पहली 11 दिसम्बर को 50,000 करोड़ रुपये और दूसरी 18 दिसम्बर 2025 को 50,000 करोड़ रुपये।
OMO एक प्रमुख मौद्रिक नीति उपकरण है, जिसमें RBI बैंकों से सरकारी प्रतिभूतियां खरीदता है और इससे प्रणाली में रुपये की तरलता आती है। जब RBI प्रतिभूतियां खरीदता है, तो बैंकों को नकदी मिलती है, जिसे वे व्यवसायों और व्यक्तियों को ऋण के रूप में दे सकते हैं।
दिसम्बर की OMO खरीद पहले से चल रहे मौद्रिक सहजता चक्र के साथ की गई। RBI MPC ने 3-5 दिसम्बर 2025 को रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 5.25% कर दी थी। OMO खरीद तरलता के मोर्चे पर मदद करके दर कटौती के प्रभाव को मजबूत करती है।
इसके अलावा RBI ने 16 दिसम्बर 2025 को 5 अरब डॉलर का USD/INR खरीद-बिक्री स्वैप किया, जिससे स्वैप तंत्र से डॉलर तरलता उपलब्ध कराते हुए रुपये की तरलता और बढ़ी। ये समन्वित हस्तक्षेप ऋण वृद्धि को बढ़ावा देने, उधार लागत कम करने और अस्थिर वैश्विक परिवेश में रुपये की विनिमय दर के प्रबंधन से जुड़े RBI के इरादे को दर्शाते हैं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: दिसंबर 2025 में RBI की मौद्रिक ढिलाई — 1 लाख करोड़ रुपये ओएमओ, रेपो दर में कटौती कर 5.25% करना तथा 5 अरब डॉलर डॉलर-रुपया स्वैप — और वृद्धि तक इसके प्रभाव का मूल्यांकन करें।
उत्तर (50 शब्द):
RBI ने दिसंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये की ओएमओ खरीद की; 11 एवं 18 दिसंबर को 50,000 करोड़ रुपये प्रत्येक। यह एमपीसी की 3-5 दिसंबर, 2025 की 25-आधार-अंक रेपो कटौती, जिससे रेपो दर 5.25% हुई, की पूरक थी। 16 दिसंबर के 5 अरब डॉलर डॉलर-रुपया स्वैप ने तरलता बढ़ाई। मुद्रास्फीति लगभग 2.2% रही; आक्रामक ढिलाई 8% वृद्धि को समर्थन देती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खुले बाजार परिचालन (OMO) क्या हैं?
OMO मौद्रिक नीति का एक उपकरण है, जिसके जरिए RBI बैंकों से सरकारी प्रतिभूतियां खरीदता या बेचता है। जब RBI खरीद करता है, तो बैंकिंग प्रणाली में रुपये की तरलता बढ़ती है, जिससे ऋण और आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिलता है।
RBI ने दिसम्बर 2025 में OMO के जरिए कितनी राशि बैंकिंग प्रणाली में डाली?
RBI ने दिसम्बर 2025 में OMO खरीद के जरिए 1 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग प्रणाली में डाले — 11 और 18 दिसम्बर को 50,000 करोड़ रुपये की दो अलग-अलग किस्तों में।
OMO खरीद रेपो दर कटौती को किस प्रकार पूरक बनाती है?
जहां रेपो दर में कटौती से उधार की लागत घटती है, वहीं OMO खरीद यह सुनिश्चित करती है कि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनी रहे, ताकि कम ब्याज दरों का लाभ वास्तव में उधारकर्ताओं तक पहुंच सके।
दिसम्बर 2025 MPC कटौती के बाद रेपो दर क्या थी?
RBI MPC ने 3-5 दिसम्बर 2025 की बैठक में रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 5.25% की। इसके साथ 1 लाख करोड़ OMO और 16 दिसम्बर को 5 अरब डॉलर का USD/INR स्वैप भी किया गया।
USD/INR बाय-सेल स्वैप क्या है?
बाय-सेल स्वैप में RBI अभी बैंकों को रुपये देकर उनसे डॉलर खरीदता है और भविष्य की एक निश्चित तारीख पर, जैसे 3 वर्षीय स्वैप में, उन्हें वापस बेचने का समझौता करता है। इससे अल्पकाल में रुपये की तरलता बढ़ती है और रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद मिलती है।