प्रकाशित: 13 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
बजट 2026: भारत ने लद्दाख में NLST और NLOT दूरबीनों को मंजूरी दी, खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी को बढ़ावा
केंद्रीय बजट 2026–27 में भारत में चार प्रमुख खगोलीय सुविधाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें लद्दाख में दो नई विश्वस्तरीय दूरबीनें शामिल हैं — नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) और नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT) — साथ ही हानले में मौजूदा हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप (HCT) का उन्नयन और COSMOS2 प्लेनेटेरियम की स्थापना।
NLST को लद्दाख में पैंगोंग त्सो के किनारे मेरक गांव के पास बनाया जाएगा। यह 2 मीटर एपर्चर वाली सौर दूरबीन होगी, जो दृश्य और निकट-अवरक्त तरंगदैर्ध्य में काम करेगी। यह सौर चुम्बकत्व, सौर ज्वालाओं और अंतरिक्ष-मौसम घटनाओं का अध्ययन करेगी और ISRO के आदित्य-L1 मिशन की पूरक होगी। NLOT भी लद्दाख में स्थापित होगा और दूर की आकाशगंगाओं, एक्सोप्लेनेट और क्षणिक खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करेगा। ₹1,000 करोड़ की NLST परियोजना 2030 तक पूरी होने का लक्ष्य है। लद्दाख की अधिक ऊंचाई, कम आर्द्रता और बहुत कम प्रकाश प्रदूषण वाला वातावरण इन वेधशालाओं के लिए आदर्श है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: बजट 2026-27 के तहत लद्दाख में स्वीकृत एनएलएसटी एवं एनएलओटी दूरबीनों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
केंद्रीय बजट 2026-27 में चार खगोलीय सुविधाओं को मंज़ूरी दी गई: पैंगोंग त्सो के समीप 2-मीटर सौर उपकरण राष्ट्रीय बृहद् सौर दूरबीन; राष्ट्रीय बृहद् ऑप्टिकल-निकट अवरक्त दूरबीन; हानले में हिमालयन चंद्रा उन्नयन; तथा कॉसमॉस2 तारामंडल। 2030 तक लक्षित 1,000 करोड़ रुपये की एनएलएसटी आदित्य-एल1 की पूरक होगी और लद्दाख के कम आर्द्रता वाले आकाश का उपयोग करेगी।
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जुड़ा प्रश्नआसान
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित NLST और NLOT क्या हैं?
व्याख्या · सही उत्तर Dकेंद्रीय बजट 2026-27 में National Large Solar Telescope (NLST) और National Large Optical-Infrared Telescope (NLOT) जैसी दूरबीन अवसंरचना सुविधाओं की घोषणा की गई। इसलिए NLST और NLOT दूरबीन परियोजनाएं हैं, न कि रिएक्टर, रेलवे गलियारे या उपग्रह प्रणालियां।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) क्या है और यह कहाँ स्थापित होगा?
नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) एक 2 मीटर सौर दूरबीन है जिसे बजट 2026-27 में ₹1,000 करोड़ की अनुमानित लागत से स्वीकृत किया गया है। यह पैंगोंग त्सो, लद्दाख के निकट बनाया जाएगा और ISRO के आदित्य-L1 सौर मिशन का पूरक होगा।
बजट 2026-27 खगोलिकी पहलों के तहत लद्दाख के हांले में किस दूरबीन का उन्नयन किया जाएगा?
बजट 2026-27 खगोलिकी पैकेज के तहत हांले, लद्दाख स्थित हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT) का उन्नयन किया जाएगा। HCT एक मौजूदा ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड दूरबीन है जो भारतीय खगोल विज्ञान अनुसंधान का एक प्रमुख साधन रही है।
बजट 2026-27 में स्वीकृत नेशनल लार्ज ऑप्टिकल टेलीस्कोप (NLOT) क्या है?
नेशनल लार्ज ऑप्टिकल टेलीस्कोप (NLOT) एक ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड दूरबीन है जिसे बजट 2026-27 में लद्दाख में स्थापना के लिए स्वीकृत किया गया है। NLST के साथ मिलकर यह विश्वस्तरीय भू-आधारित खगोलिकी अवसंरचना बनाने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
NLST भारत के आदित्य-L1 मिशन का पूरक कैसे है?
आदित्य-L1 ISRO की अंतरिक्ष में स्थित सौर वेधशाला है, जो L1 लैग्रेंज बिंदु से सूर्य का अध्ययन करती है। NLST जमीन पर स्थित इसके समकक्ष के रूप में काम करेगा; इससे अंतरिक्ष और ऊंचे स्थलों, दोनों से मिलकर सौर अवलोकन किए जा सकेंगे।
लद्दाख को बड़ी खगोलीय दूरबीनों के लिए आदर्श स्थान क्यों माना जाता है?
लद्दाख अपनी उच्च ऊंचाई (कई क्षेत्रों में 4,000 मीटर से अधिक), अत्यंत कम वायुमंडलीय आर्द्रता, न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण और वर्ष में बड़ी संख्या में स्वच्छ रात्रियों के कारण खगोलिकी के लिए आदर्श माना जाता है। ये परिस्थितियाँ ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड दूरबीनों के लिए उत्कृष्ट 'सीइंग' (वायुमंडलीय स्थिरता) प्रदान करती हैं।