प्रकाशित: 23 जनवरी 2026टॉपिक
भारत के पहले एकीकृत निजी उपग्रह संयंत्र 'पलमनारो' की गुजरात में आधारशिला रखी गई
22 जनवरी 2026 को गुजरात में भारत के पहले एकीकृत निजी उपग्रह निर्माण संयंत्र 'पलमनारो' की आधारशिला रखी गई। यह संयंत्र स्वदेशी उपग्रह उत्पादन के लिए तैयार किया गया है और इसका लक्ष्य सरकारी व वाणिज्यिक, दोनों तरह के मिशनों के लिए भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।
यह संयंत्र एक ही एकीकृत उत्पादन लाइन पर पृथ्वी अवलोकन, संचार और नेविगेशन उपग्रह बनाने में सक्षम होगा। इसके मध्य 2027 तक प्रति वर्ष 20 उपग्रहों की प्रारंभिक क्षमता के साथ चालू होने की उम्मीद है। यह भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के अनुरूप है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
राजस्थान का कौन सा रेगिस्तानी जिला 6 नए संयंत्रों के साथ प्रमुख सीमेंट केंद्र बनने को तैयार है?
व्याख्या · सही उत्तर Dजैसलमेर वह जिला है जहां 2026 से 2029 के बीच 6 नए सीमेंट संयंत्र लगाने की योजना बताई गई है। इस निवेश से राजस्थान की सीमेंट उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और राज्य की औद्योगिक स्थिति मजबूत होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत का पहला एकीकृत निजी उपग्रह संयंत्र 'पलमनारो' क्या है और इसका शिलान्यास कहाँ हुआ?
**Palmnaro** भारत का पहला **एकीकृत निजी उपग्रह निर्माण केंद्र** है। इस संयंत्र का उद्देश्य **उपग्रह डिजाइन, असेंबली, एकीकरण और परीक्षण (SAIT)** के लिए देश में पूरी क्षमता विकसित करना है। **भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023** के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद यह प्रतिस्पर्धी **निजी अंतरिक्ष विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र** बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भारत के पहले एकीकृत निजी उपग्रह संयंत्र का अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए क्या महत्व है?
**Palmnaro** की स्थापना कई कारणों से महत्वपूर्ण है: **IN-SPACe** और **भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023** ने अंतरिक्ष विनिर्माण को निजी क्षेत्र के लिए खोला। एक समर्पित एकीकृत उपग्रह संयंत्र भारत को वैश्विक **उपग्रह निर्माण बाजार** (22 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक) में प्रतिस्पर्धा करने, लागत कम करने और **LEO नक्षत्र उपग्रहों** की बढ़ती मांग पूरी करने में सक्षम बनाता है।
IN-SPACe क्या है और भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में इसकी क्या भूमिका है?
**IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र)** 2020 में स्थापित नियामक निकाय है, जिसका उद्देश्य **गैर-सरकारी संस्थाओं (NGE)** को भारतीय अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग लेने में सक्षम बनाना है। भारत के प्रमुख निजी अंतरिक्ष खिलाड़ियों में **Skyroot Aerospace** (विक्रम रॉकेट), **Agnikul Cosmos** (अग्निबाण रॉकेट) और **Pixxel** शामिल हैं।
भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 क्या है और उपग्रह निर्माण में इससे क्या बदलाव आए हैं?
**भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023** ने ISRO की भूमिकाओं को अलग-अलग किया: ISRO **R&D और प्रमुख मिशनों** (चंद्रयान, गगनयान) पर केंद्रित है, जबकि **NSIL** वाणिज्यिक परिचालन संभालता है। यह नीति निजी संस्थाओं को उपग्रहों, प्रक्षेपण यानों और ग्राउंड स्टेशनों का **स्वामित्व और संचालन** करने की अनुमति देती है — इसी तरह की सुविधाएं **Palmnaro** को सक्षम बनाती हैं।
वैश्विक अग्रणी देशों की तुलना में भारत का उपग्रह विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र कैसा है?
भारत का **उपग्रह विनिर्माण** क्षेत्र उभर रहा है, लेकिन वैश्विक अग्रणी देशों — अमेरिका (SpaceX, Boeing), यूरोप (Airbus Space, Thales Alenia) और चीन (CASC/CASIC) — की तुलना में अभी भी नया है। भारत की ताकत **लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता** है: ISRO पश्चिमी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में 30-50% कम लागत पर उपग्रह बनाती है। 2040 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का 10%+ हिस्सा हासिल करने के लिए **Palmnaro** जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं।