सहकारिता मंत्रालय ने 6 जनवरी 2026 को अपनी वर्षांत समीक्षा 2025 जारी की। इसमें केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में जुलाई 2021 में स्थापना के बाद से साढ़े चार वर्षों में की गई 114 प्रमुख पहलों का उल्लेख किया गया और सरकार के सहकार से समृद्धि विजन को आगे बढ़ाया गया। प्रमुख पहल प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) का कंप्यूटरीकरण है: मूल रूप से 2,516 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 63,000 पैक्स के लिए स्वीकृत यह योजना अब 79,630 पैक्स के लिए 2,925.39 करोड़ रुपये के संशोधित परिव्यय तक विस्तारित कर दी गई है, जिसे केंद्र, राज्यों और नाबार्ड द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित किया जा रहा है। दिसंबर 2025 तक 59,261 पैक्स ईआरपी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे, जो जनवरी 2025 के 47,155 से अधिक है, और 32,119 पैक्स ने 10,000 के लक्ष्य के मुकाबले ई-पैक्स का दर्जा हासिल किया। तीन नई राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियाँ क्रियाशील हो गई हैं—13,890 सदस्य पैक्स वाली नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, 31,605 सदस्य सहकारी समितियों वाली भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड, और 10,035 नामांकित सदस्यों वाली नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड—जो निर्यात, बीज और जैविक खाद्य क्षेत्रों में सहकारिता की भूमिका बढ़ा रही हैं। अतिरिक्त सुधारों में 51,836 पैक्स सामान्य सेवा केंद्र सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं, 38,190 पैक्स प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों में उन्नत किए गए हैं, और 1,070 मत्स्य किसान उत्पादक संगठन बनाए गए हैं। कर और नियामक पक्ष पर, 1-10 करोड़ रुपये आय वाली सहकारी समितियों पर अधिभार 12 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया, और 2016 से पहले की बकाया राशि पर सहकारी चीनी मिलों को 46,000 करोड़ रुपये की राहत प्रदान की गई। पैक्स के लिए मॉडल उप-नियमों को 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनाया है।
सहकारिता मंत्रालय की 2025 की वर्षांत समीक्षा जारी: सहकार से समृद्धि के तहत 114 पहल; पैक्स कंप्यूटरीकरण 79,630 समितियों तक पहुंचा
सहकारिता मंत्रालय ने 6 जनवरी 2026 को वर्षांत समीक्षा 2025 जारी की, जिसमें जुलाई 2021 में मंत्रालय की स्थापना के बाद शुरू की गई 114 पहलों का उल्लेख किया गया। पैक्स कंप्यूटरीकरण में अब 79,630 समितियाँ शामिल हैं (परिव्यय 2,925 करोड़ रुपये); 59,261 समितियाँ ईआरपी सॉफ्टवेयर का उपयोग करती हैं। तीन नई राष्ट्रीय सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं: नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स, भारतीय बीज सहकारी, और नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स। छोटी सहकारी समितियों पर कर अधिभार 12% से घटाकर 7% किया गया; चीनी मिलों के लिए 46,000 करोड़ रुपये की राहत दी गई।
मुख्य तथ्य
- सहकारिता मंत्रालय ने 6 जनवरी 2026 को वर्षांत समीक्षा 2025 जारी की, जिसमें अमित शाह के नेतृत्व में जुलाई 2021 से 114 पहलों का उल्लेख किया गया।
- पैक्स कंप्यूटरीकरण 63,000 से बढ़कर 79,630 समितियों तक पहुँचा (2,925 करोड़ रुपये परिव्यय); 59,261 ईआरपी, 32,119 ई-पैक्स स्थिति।
- तीन नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाएँ: एनसीईएल (13,890 पैक्स), भारतीय बीज सहकारी (31,605 समितियाँ), एनसीओएल (10,035 सदस्य)।
- 51,836 पैक्स सीएससी सेवाएँ दे रहे हैं; 38,190 पीएम किसान समृद्धि केंद्रों में उन्नत; 1,070 मत्स्य एफपीओ बनाए गए।
- 1-10 करोड़ रुपये आय वाली सहकारी समितियों पर कर अधिभार 12% से घटाकर 7%; सहकारी चीनी मिलों को 46,000 करोड़ रुपये की राहत।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: सहकारिता मंत्रालय की 2025 वर्षांत समीक्षा की प्रमुख उपलब्धियों तथा 'सहकार से समृद्धि' पर उनके प्रभाव को रेखांकित करें।
उत्तर (50 शब्द):
6 जनवरी 2026 को सहकारिता मंत्रालय ने 2025 वर्षांत समीक्षा जारी की, जिसमें जुलाई 2021 से 114 पहलें सूचीबद्ध हैं। पैक्स कंप्यूटरीकरण 63,000 से बढ़कर 79,630 समितियों तक पहुंचा; संशोधित परिव्यय 2,925.39 करोड़ रुपये। 1-10 करोड़ रुपये आय वाली सहकारी समितियों पर अधिभार 12% से 7% किया गया; चीनी मिलों को 46,000 करोड़ रुपये की राहत मिली।
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6 जनवरी 2026 को जारी सहकारिता मंत्रालय की वर्षांत समीक्षा 2025 के अनुसार, विस्तारित कंप्यूटरीकरण योजना के तहत कितनी प्राथमिक कृषि साख समितियाँ (पैक्स) शामिल हैं?
पैक्स कंप्यूटरीकरण योजना को मूल रूप से 63,000 पैक्स के लिए ₹2,516 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृति मिली थी। अब इसे 79,630 पैक्स तक बढ़ाया गया है और संशोधित परिव्यय ₹2,925.39 करोड़ है। इस योजना को केंद्र, राज्य और नाबार्ड मिलकर वित्तपोषित करते हैं। दिसंबर 2025 तक 59,261 पैक्स ईआरपी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे।
स्रोत: DD News
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
6 जनवरी 2026 को सहकारिता मंत्रालय ने क्या जारी किया?
मंत्रालय ने अपनी वर्षांत समीक्षा 2025 "सहकार से समृद्धि: भारत की सहकारी समितियों को सशक्त बनाना" शीर्षक से जारी की। इसमें जुलाई 2021 में मंत्रालय की स्थापना के बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में शुरू की गई 114 प्रमुख पहलों का उल्लेख किया गया।
पैक्स कंप्यूटरीकरण अभी किस स्तर तक पहुँचा है?
यह योजना अब 2,925.39 करोड़ रुपये के संशोधित परिव्यय के साथ 79,630 प्राथमिक कृषि साख समितियों पर लागू है। इसे केंद्र, राज्यों और नाबार्ड द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित किया जा रहा है। दिसंबर 2025 तक 59,261 पैक्स ईआरपी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे और 32,119 को ई-पैक्स का दर्जा मिल चुका था।
मंत्रालय के तहत कौन सी तीन राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियाँ क्रियाशील हो गई हैं?
तीन राष्ट्रीय सहकारी समितियाँ अब क्रियाशील हैं: 13,890 सदस्य पैक्स के साथ नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल), 31,605 सदस्य सहकारी समितियों के साथ भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड, और 10,035 नामांकित सदस्यों के साथ नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल)। ये क्रमशः निर्यात, बीज और जैविक खाद्य के क्षेत्र में काम करती हैं।
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