भारत 30.37% के साथ वैश्विक नारियल उत्पादन में अग्रणी है। यहाँ नारियल की खेती 2,165.20 हजार हेक्टेयर में फैली है और वार्षिक उत्पादन 2,137.362 करोड़ नारियल है। इस क्षेत्र से लगभग 3 करोड़ लोगों को सहारा मिलता है, जिनमें करीब 1 करोड़ किसान सीधे नारियल की खेती पर निर्भर हैं। ₹350 करोड़ की नई नारियल संवर्धन योजना की घोषणा की गई है, जो पुराने पेड़ों के प्रतिस्थापन, रोग-प्रतिरोधी किस्मों को लाने और उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित है। यह योजना वर्जिन नारियल तेल, सक्रिय कार्बन, नारियल दूध और कॉयर उत्पादों में मूल्य संवर्धन को भी बढ़ावा देती है, ताकि मूल्य-शृंखला में किसानों की भागीदारी बेहतर हो और उनकी आय में सुधार हो।
भारत का नारियल क्षेत्र: वैश्विक उत्पादन का 30.37%; ₹350 करोड़ संवर्धन योजना घोषित
भारत विश्व के कुल नारियल उत्पादन का 30.37% उत्पादन करता है; प्रतिस्थापन और मूल्य संवर्धन के लिए ₹350 करोड़ की योजना घोषित।
मुख्य तथ्य
- भारत विश्व में नारियल उत्पादन में अग्रणी है, जिसकी वैश्विक हिस्सेदारी 30.37% है और 2,165.20 हजार हेक्टेयर में खेती होती है।
- भारत में नारियल का वार्षिक उत्पादन 2,000 करोड़ से अधिक है।
- केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश प्रमुख नारियल उत्पादक राज्य हैं।
- नारियल विकास बोर्ड नारियल क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करता है।
- नारियल से तेल, दूध, पानी और फाइबर सहित अनेक उत्पाद बनते हैं जिनका निर्यात मूल्य बढ़ रहा है।
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28 फरवरी 2026 को शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी HPV टीकाकरण कार्यक्रम में कौन सा टीका उपयोग किया गया?
सिंगल-शॉट गार्डासिल 4 क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन HPV प्रकार 6, 11, 16 और 18 से सुरक्षा देती है, जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वैश्विक नारियल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी कितनी है और यह क्षेत्र कितना बड़ा है?
भारत **30.37% हिस्सेदारी** के साथ वैश्विक नारियल उत्पादन में अग्रणी है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक बनता है। खेती **2,165.20 हजार हेक्टेयर** में फैली है और वार्षिक उत्पादन **2,137.362 करोड़ नारियल** है। यह क्षेत्र लगभग **3 करोड़ लोगों** की आजीविका का आधार है, जिनमें लगभग **1 करोड़ किसान** शामिल हैं जो सीधे नारियल की खेती पर निर्भर हैं।
नई ₹350 करोड़ नारियल संवर्धन योजना क्या है और इसका मुख्य जोर किस पर है?
**₹350 करोड़ नारियल संवर्धन योजना** एक नई सरकारी पहल है, जो तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है: - **पुराने, अनुत्पादक पेड़ों को** उच्च उपज वाली किस्मों से बदलना - **रोग-प्रतिरोधी नारियल किस्मों की शुरुआत** - प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने के लिए **उत्पादकता संवर्धन** योजना प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन को भी बढ़ावा देती है।
नारियल संवर्धन योजना किन मूल्य-वर्धित नारियल उत्पादों को बढ़ावा देती है?
नारियल संवर्धन योजना कच्चे नारियल से उच्च मूल्य वाले उत्पाद बनाने को बढ़ावा देती है: - **वर्जिन कोकोनट ऑयल (VCO)** — प्रीमियम खाद्य और कॉस्मेटिक तेल - **सक्रिय कार्बन** — जल शुद्धिकरण में उपयोगी - **नारियल दूध** — खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात के लिए - **कॉयर उत्पाद** — नारियल की भूसी से औद्योगिक और घरेलू उपयोग के लिए इस मूल्य संवर्धन से **किसानों की आय में सुधार** का लक्ष्य है।
भारत में नारियल की खेती पर कितने किसान सीधे निर्भर हैं?
भारत में लगभग **1 करोड़ किसान** सीधे नारियल की खेती पर निर्भर हैं, जबकि यह क्षेत्र प्रसंस्करण, व्यापार और सहायक उद्योगों में काम करने वाले लगभग **3 करोड़ लोगों** को आधार देता है। वैश्विक नारियल उत्पादन में भारत की **30.37% हिस्सेदारी** इसे रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कृषि वस्तु बनाती है।
सरकार ने भारत के नारियल क्षेत्र के लिए नारियल संवर्धन योजना क्यों घोषित की?
सरकार ने **₹350 करोड़ नारियल संवर्धन योजना** भारत के नारियल क्षेत्र की कई चुनौतियों को दूर करने के लिए घोषित की: पुराने और अनुत्पादक पेड़ों को बदलने की आवश्यकता, मौजूदा किस्मों की रोगों के प्रति संवेदनशीलता, और कम मूल्य पर कच्चे नारियल का निर्यात। योजना का लक्ष्य उत्पादकता बढ़ाना, फसल हानि कम करना और **मूल्य संवर्धित प्रसंस्करण** की ओर बढ़ना है, ताकि वैश्विक उत्पादन में भारत की **30.37% हिस्सेदारी** का बेहतर उपयोग हो सके।
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