RBI की मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25% पर रखी; 125 आधार अंकों की कुल कटौती के बाद तटस्थ रुख कायम
Aसीधा उत्तर
RBI ने रेपो दर 5.25% पर सर्वसम्मति से अपरिवर्तित रखी और तटस्थ रुख बनाए रखा; वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि का नवीनतम अनुमान 7.4% और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान 2.1% है।
मुख्य तथ्य
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 4-6 फरवरी 2026 की बैठक में नीतिगत रेपो दर 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का सर्वसम्मत निर्णय लिया।
स्थायी जमा सुविधा की दर 5.00% और सीमांत स्थायी सुविधा तथा बैंक दर 5.50% पर रखी गई।
MPC ने तटस्थ रुख बनाए रखा और संकेत दिया कि 2025 की शुरुआत में 6.50% रही रेपो दर में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 125 आधार अंकों की कटौती के बाद मौद्रिक ढील अपना असर दिखा चुकी है।
पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 7.4% रहने और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2.1% रहने का अनुमान है; मुद्रास्फीति का यह अनुमान 4% के लक्ष्य से काफ़ी कम है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिरता और मौद्रिक संचरण पर ध्यान देने का संकेत दिया।
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 4-6 फरवरी 2026 की बैठक में सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर 5.25% पर अपरिवर्तित रखी। स्थायी जमा सुविधा (SDF) की दर 5.00% और सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) तथा बैंक दर 5.50% पर रखी गई।
MPC ने तटस्थ रुख बनाए रखा। इससे संकेत मिला कि 2025 की शुरुआत में 6.50% रही रेपो दर में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 125 आधार अंकों की कटौती के बाद मौद्रिक ढील अपना असर दिखा चुकी है। पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान है। इसी वित्त वर्ष में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2.1% रहने का अनुमान है, जो 4% के लक्ष्य से काफ़ी कम है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिरता और मौद्रिक संचरण पर ध्यान देने का संकेत दिया।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
RAS 2023 भारतीय रिज़र्व बैंक का मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचा क्या है? — दोनों आरबीआई की मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण रूपरेखा की पड़ताल करते हैं; यह निर्णय दर्शाता है कि सीपीआई 4% लक्ष्य से काफी नीचे रहने पर एमपीसी कैसा आचरण करती है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: RBI की मौद्रिक नीति समिति ने कुल 125 आधार अंकों की मौद्रिक ढील के बाद फरवरी 2026 में रेपो दर 5.25% पर बनाए रखने का निर्णय लिया। इस निर्णय का मूल्यांकन करें।
उत्तर (50 शब्द):
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने 4-6 फरवरी 2026 की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25% पर अपरिवर्तित रखी। स्थायी जमा सुविधा की दर 5.00% और सीमांत स्थायी सुविधा की दर 5.50% पर रही। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 125 आधार अंकों की कटौती के बाद तटस्थ रुख जारी रहा। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 7.4% और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2.1% रहने के अनुमानों का उल्लेख किया।
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फरवरी 2026 में रेपो दर पर RBI की मौद्रिक नीति समिति ने क्या निर्णय लिया?
**RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC)** ने **4-6 फरवरी 2026** की बैठक में सर्वसम्मति से **नीतिगत रेपो दर 5.25% पर अपरिवर्तित** रखने का निर्णय लिया। स्थायी जमा सुविधा (SDF) की दर **5.00%** और सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) तथा बैंक दर **5.50%** पर रखी गई।
फरवरी 2026 में RBI ने मौद्रिक नीति का कौन-सा रुख बनाए रखा?
RBI की मौद्रिक नीति समिति ने **तटस्थ रुख** बनाए रखा। इससे संकेत मिला कि **कुल 125 आधार अंकों की कटौती के बाद मौद्रिक ढील अपना असर दिखा चुकी थी**। इस रुख से RBI को बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की गुंजाइश मिलती है।
फरवरी 2026 में दरों पर विराम लगाने से पहले RBI ने रेपो दर में कुल कितनी कटौती की थी?
RBI ने फरवरी 2026 में रेपो दर 5.25% पर बनाए रखने से पहले इसमें कुल **125 आधार अंकों** की कटौती की थी। इससे रेपो दर 6.50% के शीर्ष स्तर से घटकर 5.25% पर आ गई।
फरवरी 2026 में RBI की नीतिगत दरें क्या थीं?
फरवरी 2026 में RBI की नीतिगत दरें इस प्रकार थीं: **रेपो दर 5.25%**; **स्थायी जमा सुविधा (SDF) की दर 5.00%**; **सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) की दर 5.50%**; **बैंक दर 5.50%**। SDF और MSF के बीच 50 आधार अंकों का अंतर था।
2026 में RBI के तटस्थ रुख का क्या महत्व है?
**तटस्थ रुख** का अर्थ है कि RBI **न तो आगे दर घटाने के लिए प्रतिबद्ध है और न ही दर बढ़ाने के लिए**; उसका निर्णय आँकड़ों पर निर्भर करेगा। वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि दर 6.4% रहने और मुद्रास्फीति 3.21% रहने का अनुमान है। मुद्रास्फीति 2-6% के दायरे में होने के कारण RBI के पास आगे ज़रूरत के अनुसार दरों में बदलाव की गुंजाइश रहती है।
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