प्रकाशित: 8 मार्च 2026समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
भारत ने लक्षद्वीप में विश्व के पहले एकीकृत OTEC संयंत्र की समीक्षा की; परियोजना गहरे समुद्र मिशन के तहत
मार्च 2026 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कावारत्ती, लक्षद्वीप में विकसित किए जा रहे भारत के पहले एकीकृत महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की। यह संयंत्र राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) द्वारा गहरे समुद्र मिशन (₹4,077 करोड़, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय) के तहत विकसित किया जा रहा है और इसे विश्व की पहली अपनी ही बिजली से चलने वाली OTEC-विलवणीकरण सुविधा बताया गया है।
यह संयंत्र गर्म सतही समुद्री जल (~29°C) और ठंडे गहरे समुद्री जल (~5°C, 1,000 मीटर गहराई से 3.8 किमी HDPE पाइपलाइन के ज़रिए) के बीच ~24°C तापमान अंतर का उपयोग कर 65 किलोवाट बिजली और प्रतिदिन 1 लाख लीटर (100 m³) पेयजल उत्पन्न करता है। लो टेम्परेचर थर्मल डिसेलिनेशन (LTTD) तकनीक रसायन-मुक्त है और अपनी ऊर्जा जरूरत खुद पूरी करती है। हवाई और जापान के पायलट प्रोजेक्ट के विपरीत, भारत का OTEC संयंत्र अपनी उत्पन्न बिजली से विलवणीकरण इकाई चलाता है — जो इसे विश्व स्तर पर अनूठा बनाता है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: मार्च 2026 में समीक्षा किए गए कावारत्ती के एकीकृत ओटीईसी संयंत्र का द्वीपीय ऊर्जा सुरक्षा और नील अर्थव्यवस्था के लिए महत्व परखिए।
उत्तर (50 शब्द):
एनआईओटी ने ₹4,077 करोड़ के गहरे समुद्र मिशन के तहत कावारत्ती में यह स्व-चालित ओटीईसी संयंत्र विकसित किया है। यह विश्व का पहला संयंत्र है, जो 24°सेल्सियस महासागरीय प्रवणता और 3.8 कि.मी. एचडीपीई पाइपलाइन से विलवणीकरण करता है। यह प्रतिदिन 65 किलोवाट बिजली और एक लाख लीटर ताजा पानी देता है, जिससे लक्षद्वीप की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है।
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भारत का पहला एकीकृत OTEC संयंत्र लक्षद्वीप में किस सरकारी मिशन के तहत विकसित किया जा रहा है?
व्याख्या · सही उत्तर Aभारत का पहला एकीकृत महासागर तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) संयंत्र लक्षद्वीप में डीप ओशन मिशन के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य टिकाऊ ऊर्जा के लिए महासागर संसाधनों का पता लगाना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
OTEC क्या है और भारत का एकीकृत OTEC संयंत्र कहाँ स्थित है?
OTEC का अर्थ महासागर तापीय ऊर्जा रूपांतरण है। यह ऐसी तकनीक है, जिसमें गर्म सतही जल और ठंडे गहरे समुद्री जल के तापमान अंतर से बिजली पैदा की जाती है। भारत का दुनिया का पहला स्व-चालित एकीकृत OTEC संयंत्र कावारत्ती, लक्षद्वीप में स्थित है।
कावारत्ती OTEC संयंत्र किस राष्ट्रीय मिशन के तहत विकसित किया गया था?
कावारत्ती OTEC संयंत्र गहरे समुद्र मिशन के तहत विकसित किया गया, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा लागू भारत के नौ PM गतिशक्ति से संबद्ध राष्ट्रीय मिशनों में से एक है।
कावारत्ती OTEC संयंत्र की बिजली उत्पादन और ताजे पानी की क्षमता क्या है?
यह संयंत्र 65 किलोवाट बिजली पैदा करता है और विलवणीकरण से प्रतिदिन 1 लाख लीटर ताजा पानी तैयार करता है, वह भी बिना किसी रसायन या बाहरी ऊर्जा के।
RPSC परीक्षा की दृष्टि से कावारत्ती OTEC संयंत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विश्व का पहला स्व-चालित एकीकृत OTEC संयंत्र है, जो भारत की ब्लू इकोनॉमी और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह गहरे समुद्र मिशन के तहत समुद्र आधारित स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में भारत की क्षमता को दिखाता है।
भारत के विकास लक्ष्यों के लिए गहरे समुद्र मिशन क्यों महत्वपूर्ण है?
गहरे समुद्र मिशन, गहरे समुद्री संसाधनों की खोज, समुद्र आधारित स्वच्छ ऊर्जा के विकास और समुद्री प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाकर भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करता है। यह बहु-मॉडल संपर्क और बुनियादी ढाँचे के लिए PM गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान से जुड़ा है।