मार्च 2026 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कावारत्ती, लक्षद्वीप में विकसित किए जा रहे भारत के पहले एकीकृत महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की। यह संयंत्र राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) द्वारा गहरे समुद्र मिशन (₹4,077 करोड़, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय) के तहत विकसित किया जा रहा है और इसे विश्व की पहली अपनी ही बिजली से चलने वाली OTEC-विलवणीकरण सुविधा बताया गया है।

यह संयंत्र गर्म सतही समुद्री जल (~29°C) और ठंडे गहरे समुद्री जल (~5°C, 1,000 मीटर गहराई से 3.8 किमी HDPE पाइपलाइन के ज़रिए) के बीच ~24°C तापमान अंतर का उपयोग कर 65 किलोवाट बिजली और प्रतिदिन 1 लाख लीटर (100 m³) पेयजल उत्पन्न करता है। लो टेम्परेचर थर्मल डिसेलिनेशन (LTTD) तकनीक रसायन-मुक्त है और अपनी ऊर्जा जरूरत खुद पूरी करती है। हवाई और जापान के पायलट प्रोजेक्ट के विपरीत, भारत का OTEC संयंत्र अपनी उत्पन्न बिजली से विलवणीकरण इकाई चलाता है — जो इसे विश्व स्तर पर अनूठा बनाता है।