भारत ने 2025 में भूकंपीय क्षेत्र-विभाजन का संशोधन पेश किया था, जिसमें हिमालयी चाप के अधिकांश भाग को नए ज़ोन VI में रखा गया था, लेकिन यह संशोधन अब लागू नहीं है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने 2026 में बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानक IS 1893(Part-1):2016 के अंतर्गत भारत का भूकंपीय क्षेत्र मानचित्र ही वर्तमान मानक है, क्योंकि संशोधित क्षेत्र-विभाजन मार्च 2026 में वापस ले लिया गया था। इसलिए ज़ोन VI लागू भूकंप-रोधी निर्माण वर्गीकरण नहीं, बल्कि वापस लिए गए 2025 संशोधन का हिस्सा था। फिर भी हिमालयी चाप उच्च भूकंपीय जोखिम वाला क्षेत्र है, जहाँ भारतीय प्लेट यूरेशियाई प्लेट की ओर बढ़ती रहती है; ऐतिहासिक भूकंपों में 1897 का असम, 1905 का काँगड़ा, 1934 का बिहार-नेपाल, 1950 का असम और 2015 का नेपाल भूकंप शामिल हैं। भौतिक जोखिम और लागू कानूनी मानक का वर्गीकरण अलग-अलग हैं; 2016 के मानक के अंतर्गत ज़ोन II, III, IV और V लागू हैं।
भारत ने भूकंपीय क्षेत्र मानचित्र संशोधित किया: संपूर्ण हिमालयी चाप को सबसे अधिक जोखिम वाले नए ज़ोन VI में रखा
भारत ने 2025 में संशोधित भूकंपीय ज़ोनिंग पेश की थी, जिसमें हिमालयी चाप के अधिकांश भाग को नए ज़ोन VI में रखा गया था, लेकिन यह संशोधन अब लागू नहीं है। PIB के अनुसार BIS कोड IS 1893(Part-1):2016 के अंतर्गत भारत का भूकंपीय ज़ोनिंग मानचित्र वर्तमान मानक बना हुआ है, क्योंकि संशोधित ज़ोनिंग मार्च 2026 में वापस ले ली गई। इसलिए ज़ोन VI को लागू वर्गीकरण नहीं, बल्कि वापस लिया गया 2025 संशोधन मानना चाहिए।
मुख्य तथ्य
- 2025 का भूकंपीय क्षेत्र-विभाजन संशोधन मार्च 2026 में वापस ले लिया गया था।
- पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के अनुसार भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का मानक IS 1893(Part-1):2016 ही वर्तमान भूकंपीय क्षेत्र-विभाजन मानक है।
- ज़ोन VI केवल वापस लिए गए 2025 संशोधन का हिस्सा था, वर्तमान लागू श्रेणी नहीं।
- वर्तमान 2016 ढांचे में भूकंपीय ज़ोन II, III, IV और V हैं।
- हिमालय उच्च भूकंपीय जोखिम वाला क्षेत्र है, लेकिन भौतिक जोखिम को वापस लिए गए कानूनी मानक के वर्गीकरण से अलग समझना चाहिए।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: संशोधित 2025 भूकंप डिज़ाइन कोड के अंतर्गत संपूर्ण हिमालयी चाप को नए उच्चतम-जोखिम ज़ोन-6 में रखने के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
2025 कोड आईएस 1893:2016 की जगह लेता है, जिसमें हिमालयी क्षेत्र ज़ोन 4 एवं 5 में था; नया कोड जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक ज़ोन-6 बनाता है। यह भारतीय प्लेट के यूरेशिया के नीचे प्रतिवर्ष 5 सेंटीमीटर धंसाव को दर्शाता है। एनडीएमए द्वारा 2015 नेपाल भूकंप पश्चात अनुशंसित, यह सख्त निर्माण मानक अनिवार्य करता है।
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6-अक्ष वर्गीकरण
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या ज़ोन VI इस समय भारत का लागू उच्चतम भूकंपीय ज़ोन है?
नहीं। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के अनुसार संशोधित क्षेत्र-विभाजन मार्च 2026 में वापस ले लिया गया था, इसलिए भारतीय मानक IS 1893(Part-1):2016 ही वर्तमान मानक है।
2025 के भूकंपीय क्षेत्र-विभाजन संशोधन के बारे में क्या याद रखना चाहिए?
2025 के संशोधन में ज़ोन VI जोड़ा गया था, लेकिन अब इसे वर्तमान मानक नहीं, वापस लिया गया संशोधन माना जाता है।
संशोधन वापस लिए जाने के बाद कौन-सा भूकंपीय ज़ोन ढांचा लागू है?
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का IS 1893(Part-1):2016 वाला भूकंपीय क्षेत्र मानचित्र वर्तमान है और इसमें ज़ोन II, III, IV तथा V हैं।
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