प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का 23 दिसंबर 2025 को 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लेखक थे और उन्हें 2025 में वर्ष 2024 के लिए 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। यह तथ्य परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्ञानपीठ पुरस्कार को भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान माना जाता है और शुक्ल छत्तीसगढ़ से यह सम्मान पाने वाले पहले लेखक बने।

प्रीलिम्स में ऐसे समसामयिकी तथ्य आम तौर पर व्यक्ति-पुरस्कार-वर्ष-राज्य के मेल के रूप में पूछे जाते हैं। यहां याद रखने योग्य मुख्य क्रम है: विनोद कुमार शुक्ल, हिंदी साहित्य, 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार, वर्ष 2024 के लिए सम्मान, 2025 में सम्मानित, और छत्तीसगढ़ से पहले प्राप्तकर्ता। RAS, UPSC और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पुरस्कार, प्रकाशन और लेखक वाले विषय में ऐसी खबरें सामान्य ज्ञान के स्थिर भाग से भी जुड़ती हैं, क्योंकि उम्मीदवार को साहित्यिक पुरस्कारों की प्रकृति और उनके महत्व को समसामयिकी घटना के साथ जोड़ना पड़ता है।

मुख्य परीक्षा की दृष्टि से यह घटना भारतीय भाषाओं, साहित्यिक सम्मान और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर छोटे नोट या उदाहरण के रूप में उपयोगी हो सकती है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य से किसी लेखक का ज्ञानपीठ पुरस्कार पाना यह दिखाता है कि राष्ट्रीय साहित्यिक पहचान केवल बड़े साहित्यिक केंद्रों तक सीमित नहीं रहती। इसलिए उत्तर लिखते समय इसे भारतीय भाषाई विविधता और साहित्य में क्षेत्रीय योगदान के उदाहरण के रूप में रखा जा सकता है। तैयारी में नाम, आयु, निधन की तारीख, पुरस्कार क्रमांक, पुरस्कार वर्ष और छत्तीसगढ़ से पहली उपलब्धि को साफ-साफ याद रखना चाहिए।