बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने 13 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे) के तहत गंगा नदी बेसिन में संकटग्रस्त इंडियन स्किमर (रिनकॉप्स एल्बीकोलिस) और इसके घोंसला बनाने वाले आवासों की सुरक्षा के लिए एक विशेष संरक्षण परियोजना शुरू की। इंडियन स्किमर को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसकी अनुमानित वैश्विक आबादी 3,700-4,400 है, जिनमें लगभग 2,450-2,900 परिपक्व पक्षी हैं, और ये मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप की प्रमुख नदियों के किनारे पाए जाते हैं।

यह संरक्षण परियोजना गंगा, यमुना और चंबल नदियों के सभी ज्ञात घोंसला स्थलों की व्यवस्थित निगरानी करेगी। फरवरी से मई तक प्रजनन काल के दौरान समुदाय-आधारित सुरक्षा दल तैनात किए जाएंगे, और राज्य वन विभागों तथा स्थानीय मछुआरा समुदायों के सहयोग से व्यापक आवास प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी। परियोजना में नदी तट के समुदायों के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य घोंसला बनाने वाली कॉलोनियों को कम-से-कम बाधित करना है।

इंडियन स्किमर विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि यह रेत के टीलों और नदी द्वीपों पर घोंसला बनाता है। इन स्थानों पर रेत खनन, जलविद्युत परियोजनाओं से जल स्तर में उतार-चढ़ाव, मानव अतिक्रमण और आवारा कुत्तों द्वारा शिकार का खतरा रहता है। जलवायु परिवर्तन से मानसून के पैटर्न और नदी प्रवाह में बदलाव ने उपयुक्त घोंसला आवास को और कम कर दिया है। BNHS परियोजना नमामि गंगे के तहत किसी एक प्रजाति पर केंद्रित पहली विशेष संरक्षण पहल है। यह परियोजना तीन वर्षों तक चलेगी।