प्रकाशित: 22 जनवरी 2026टॉपिक
BNHS ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत भारतीय स्किमर संरक्षण परियोजना शुरू की
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने 13 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे) के तहत स्थानीय समुदायों की भागीदारी से चलने वाली संरक्षण परियोजना शुरू की। इसका उद्देश्य गंगा नदी बेसिन में संकटग्रस्त भारतीय स्किमर (रिनकॉप्स एल्बीकोलिस) और उसके घोंसला स्थलों की रक्षा करना है। भारतीय स्किमर को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इसकी अनुमानित वैश्विक आबादी 3,700-4,400 है, जिसमें लगभग 2,450-2,900 परिपक्व पक्षी हैं। यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप की प्रमुख नदियों के किनारे पाया जाता है।
परियोजना के तहत गंगा, यमुना और चंबल नदियों के सभी ज्ञात घोंसला स्थलों की व्यवस्थित निगरानी की जाएगी। फरवरी से मई के प्रजनन काल में स्थानीय समुदायों के संरक्षण दल तैनात किए जाएंगे। राज्य वन विभागों और स्थानीय मछुआरा समुदायों के सहयोग से आवास प्रबंधन की विस्तृत योजनाएँ भी तैयार की जाएंगी। नदी तट के समुदायों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि घोंसलों के समूहों में कम-से-कम खलल पड़े।
भारतीय स्किमर खास तौर पर संवेदनशील है, क्योंकि यह नदी में उभरी रेतीली पट्टियों और द्वीपों पर घोंसला बनाता है। इन घोंसलों को रेत खनन, जलविद्युत परियोजनाओं के कारण जलस्तर में उतार-चढ़ाव, मानव अतिक्रमण और आवारा कुत्तों के शिकार से खतरा है। जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के स्वरूप और नदियों के बहाव में आए बदलावों ने घोंसला बनाने लायक जगहों को और कम कर दिया है। BNHS की यह परियोजना नमामि गंगे के तहत किसी एक प्रजाति पर केंद्रित पहली संरक्षण पहल है। 2014 में शुरू होने के बाद नमामि गंगे का मुख्य ध्यान पानी की गुणवत्ता सुधारने और सीवेज के उपचार पर रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन इस परियोजना को तीन वर्षों तक वित्तीय सहायता देगा।
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Tपर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय परिवर्तन
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BNHS ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत किस लुप्तप्राय पक्षी प्रजाति के संरक्षण की परियोजना शुरू की?
व्याख्या · सही उत्तर Bबॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने गंगा बेसिन में भारतीय स्किमर के प्रजनन और घोंसले वाले नदीय रेत-टापुओं की रक्षा के लिए परियोजना शुरू की। इसलिए सही उत्तर भारतीय स्किमर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
BNHS की भारतीय स्किमर संरक्षण परियोजना क्या है और इसे क्यों शुरू किया गया?
**बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS)** ने **राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG)** के तहत **भारतीय स्किमर संरक्षण परियोजना** शुरू की। **भारतीय स्किमर (रिनकॉप्स एल्बीकोलिस)** IUCN रेड लिस्ट में **संकटग्रस्त** श्रेणी में है। यह परियोजना चंबल, गंगा और यमुना नदियों के किनारे इसके घोंसला स्थलों की रक्षा करने और इसकी घटती आबादी का अध्ययन करने के लिए शुरू की गई।
भारतीय स्किमर (रिनकॉप्स एल्बीकोलिस) क्या है और उसके लिए मुख्य खतरे क्या हैं?
**भारतीय स्किमर** एक अलग तरह का जलपक्षी है। इसकी **निचली चोंच** लंबी होती है और पानी की सतह को चीरते हुए मछलियाँ पकड़ने में मदद करती है। इसी कारण इसे स्किमर कहा जाता है। यह चंबल, गंगा और महानदी के **रेतीले नदी तटों** पर घोंसला बनाता है। इसके लिए मुख्य खतरे हैं—बालू खनन से घोंसला स्थलों का नष्ट होना, नदी तट पर अतिक्रमण, मछली पकड़ने का दबाव, जलकुंभी का फैलाव और नावों की बढ़ती आवाजाही। इसकी आबादी घटकर घोंसला बनाने वाले कुछ सौ जोड़ों तक रह गई है।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) क्या है और यह किन जैव-विविधता परियोजनाओं को सहायता देता है?
**नमामि गंगे कार्यक्रम** के तहत **राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG)** केवल पानी की गुणवत्ता सुधारने तक सीमित नहीं है; यह गंगा बेसिन में **जैव-विविधता संरक्षण** में भी सहायता देता है। इन परियोजनाओं में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की भारतीय स्किमर संरक्षण परियोजना, **वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर-इंडिया (WWF-India)** की **गंगा नदी डॉल्फिन** संरक्षण परियोजना, चंबल में **घड़ियाल (गेवियलिस गैंगेटिकस)** संरक्षण, मीठे पानी के कछुओं का सर्वेक्षण और आर्द्रभूमि के पक्षियों की निगरानी शामिल हैं। ये पहलें नदी को केवल जल-स्रोत नहीं, बल्कि एक पूरा पारितंत्र मानती हैं।
BNHS क्या है और भारतीय वन्यजीव संरक्षण में इसकी क्या भूमिका है?
**बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS)** की स्थापना **1883** में हुई थी। यह भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित प्राकृतिक इतिहास संगठनों में से एक है। यह पक्षीविज्ञान के सर्वेक्षण, वन्यजीव अनुसंधान और संरक्षण कार्यक्रम चलाता है। BNHS **सालिम अली पक्षीविज्ञान और प्राकृतिक इतिहास केंद्र (SACON)** से जुड़ा काम भी करता है, **भारत और पाकिस्तान के पक्षियों की पुस्तिका** प्रकाशित करता है और 1,200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का दस्तावेज़ीकरण कर चुका है। यह सरकारी संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठनों के साथ मिलकर भी काम करता है।
भारत में और किन गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों को भारतीय स्किमर जैसी संरक्षण सहायता की ज़रूरत है?
कई भारतीय पक्षी प्रजातियाँ संरक्षण से जुड़ी ऐसी ही चुनौतियों का सामना कर रही हैं: **ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गंभीर रूप से संकटग्रस्त)**, जिसके लिए राजस्थान और गुजरात में संरक्षण परियोजना चल रही है; प्रवासी पक्षी **सोशिएबल लैपविंग (गंभीर रूप से संकटग्रस्त)**; ब्रह्मपुत्र के बाढ़-मैदानों में पाया जाने वाला **बंगाल फ्लोरिकन (गंभीर रूप से संकटग्रस्त)**; प्रवासी तटीय पक्षी **स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर (गंभीर रूप से संकटग्रस्त)**; और रात में सक्रिय **जर्डन्स कोर्सर (गंभीर रूप से संकटग्रस्त)**। इन सभी के आवास घट रहे हैं और इन्हें **BNHS की भारतीय स्किमर परियोजना** जैसे किसी एक प्रजाति पर केंद्रित संरक्षण कार्यक्रमों की ज़रूरत है।