बेंगलुरु के रमन अनुसंधान संस्थान (RRI) के भारतीय वैज्ञानिक ISRO के सहयोग से PRATUSH (हाइड्रोजन से संकेत का उपयोग करते हुए ब्रह्मांड के पुनःआयनीकरण की जांच) विकसित कर रहे हैं। यह चंद्र-कक्षा रेडियोमीटर मिशन ब्रह्मांडीय उषा काल के कमजोर 21-सेमी हाइड्रोजन संकेत का पता लगाएगा। यह उपकरण प्रारंभिक ब्रह्मांड के 21-सेमी संकेतों के अध्ययन में इस्तेमाल होने वाली 40-200 मेगाहर्ट्ज़ अवलोकन सीमा से जुड़ा है। क्रेडिट कार्ड के आकार का एक कॉम्पैक्ट सिंगल-बोर्ड कंप्यूटर डिजिटल रिसीवर के रूप में काम करता है। पृथ्वी के रेडियो हस्तक्षेप से मुक्त होने के कारण चंद्रमा का सुदूर पक्ष चुना गया।