केंद्रीय कैबिनेट ने 10 मार्च 2026 को पुनर्गठित जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी, जिसे दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है। कुल परिव्यय ₹8.69 लाख करोड़ (केंद्रीय सहायता ₹3.59 लाख करोड़, पहले ₹2.08 लाख करोड़) है। मिशन का ध्यान अब केवल बुनियादी ढांचे पर नहीं, बल्कि नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर रहेगा।

'सुजलम भारत' डिजिटल ढांचा लागू होगा, जिसमें हर गांव को सुजल गांव ID मिलेगी। लक्ष्य: 24x7 ग्रामीण पेयजल आपूर्ति। मार्च 2026 तक 15.80 करोड़ (81.61%) घरों में नल का पानी पहुंचा, जो अगस्त 2019 में 3.23 करोड़ (16.87%) था।