प्रकाशित: 9 मार्च 2026PIBशासन
कैबिनेट ने जल जीवन मिशन 2.0 के लिए ₹8.69 लाख करोड़ की बढ़ी हुई राशि मंजूर की
केंद्रीय कैबिनेट ने 10 मार्च 2026 को पुनर्गठित जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी, जिसे दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है। कुल परिव्यय ₹8.69 लाख करोड़ (केंद्रीय सहायता ₹3.59 लाख करोड़, पहले ₹2.08 लाख करोड़) है। मिशन का ध्यान अब केवल बुनियादी ढांचे पर नहीं, बल्कि नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर रहेगा।
'सुजलम भारत' डिजिटल ढांचा लागू होगा, जिसमें हर गांव को सुजल गांव ID मिलेगी। लक्ष्य: 24x7 ग्रामीण पेयजल आपूर्ति। मार्च 2026 तक 15.80 करोड़ (81.61%) घरों में नल का पानी पहुंचा, जो अगस्त 2019 में 3.23 करोड़ (16.87%) था।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: मार्च 2026 में स्वीकृत पुनर्गठित जल जीवन मिशन 2.0 का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इसका सुजलम भारत डिजिटल ढांचा ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण को किस प्रकार बेहतर बनाता है?
उत्तर (50 शब्द):
10 मार्च 2026 को मंत्रिमंडल ने 8.69 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ दिसंबर 2028 तक जल जीवन मिशन 2.0 स्वीकृत किया। केंद्रीय सहायता 2.08 से बढ़कर 3.59 लाख करोड़ रुपये। सुजलम भारत ढांचा प्रत्येक गांव को डिजिटल मानचित्रण के लिए सुजल गांव पहचान देता है। नल कनेक्शन 15.80 करोड़ परिवारों (81.61%) तक।
6-अक्ष वर्गीकरण
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
पुनर्गठित जल जीवन मिशन 2.0 के तहत शुरू किया गया 'सुजलम भारत' क्या है?
व्याख्या · सही उत्तर Bसुजलम भारत JJM 2.0 के तहत एक राष्ट्रीय डिजिटल ढाँचा है जो हर गाँव को एक विशिष्ट सुजल गाँव/सेवा क्षेत्र ID देता है, ताकि स्रोत से नल तक पूरी पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण किया जा सके। JJM 2.0 का कुल परिव्यय ₹8.69 लाख करोड़ है।