बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री कामिनी कौशल का 13 नवंबर 2025 की देर रात मुंबई में 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जन्म 24 फरवरी 1927 को लाहौर में हुआ था। भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनका नाम इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने नीचा नगर (1946) से फ़िल्मी शुरुआत की, जिसे कान फ़िल्म फ़ेस्टिवल में ग्रैंड प्री जीतने वाली पहली भारतीय फ़िल्म के रूप में याद किया जाता है।
कामिनी कौशल का करियर सात दशकों तक फैला रहा। इस कारण वे स्वतंत्रता-पूर्व दौर से लेकर आधुनिक बॉलीवुड तक भारतीय सिनेमा के बदलते रूप की एक अहम कड़ी मानी जाती हैं। परीक्षा में इससे भारतीय सिनेमा, अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म सम्मान और प्रमुख कलाकारों की उपलब्धियों जैसे सीधे पूछे जा सकने वाले तथ्य मिलते हैं। राष्ट्रीय समसामयिकी में ऐसे व्यक्तित्व इसलिए भी पूछे जाते हैं क्योंकि वे किसी कला-क्षेत्र के लंबे इतिहास को एक नाम के ज़रिए याद रखने में मदद करते हैं।
पुरस्कारों के स्तर पर उन्हें 1956 में बिराज बहू के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार मिला। 2015 में उन्हें फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिला। उनकी अंतिम फ़िल्म लाल सिंह चड्ढा (2022) थी। RAS/UPSC शैली की तैयारी में इस तरह की खबर को केवल निधन-सूचना के रूप में नहीं, बल्कि संस्कृति के स्टैटिक जीके से जोड़कर पढ़ना चाहिए: व्यक्ति, जन्म-स्थान, पहली फ़िल्म, प्रमुख पुरस्कार और अंतिम ज्ञात फ़िल्म जैसे बिंदु सीधे प्रीलिम्स में पूछे जा सकने वाले तथ्य बन सकते हैं।
