आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारत के लिए आगे की दिशा बताते हुए कई प्रमुख नीतिगत सिफ़ारिशें पेश करता है।

विकास के लिए विनियमन में ढील: सर्वेक्षण बताता है कि उत्पादन के अहम साधनों — भूमि, भवन, श्रम, माल-ढुलाई और उपयोगिता सेवाओं — से जुड़े नियमों में कहाँ-कहाँ ढील दी जा सकती है। इसमें प्रतिस्पर्धी बनने की क्षमता को बुनियादी ढाँचे जितना ही ज़रूरी मानते हुए इनपुट लागत घटाने की राष्ट्रीय रणनीति प्रस्तावित की गई है।

ज़मीनी ज़रूरतों पर आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति: सर्वेक्षण की सिफ़ारिश है कि भारत सबसे उन्नत मॉडल बनाने के बजाय व्यावहारिक उपयोग से निकले नवाचार पर ध्यान दे। भारत वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध में प्रमुख योगदानकर्ताओं में है; उसके पास बड़ी संख्या में तकनीकी विशेषज्ञ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अच्छी समझ रखने वाला बड़ा कार्यबल है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर से शुरू होना चाहिए तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी भी होनी चाहिए। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 लचीले और उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों का समर्थन करता है।

'अनुशासित स्वदेशी' रणनीति: रणनीतिक मज़बूती के लिए तीन स्तर सुझाए गए हैं — (1) रणनीतिक रूप से अत्यंत ज़रूरी क्षेत्रों की गंभीर कमज़ोरियाँ, (2) ऐसी क्षमताएँ जिन्हें प्रतिस्पर्धी लागत पर विकसित करके रणनीतिक लाभ पाया जा सकता है और (3) जिन क्षेत्रों में रणनीतिक ज़रूरत कम है या घरेलू विकल्प बहुत महँगा है, वहाँ वैश्विक बाज़ार से खरीद जारी रखना। इसका लक्ष्य आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में 'रणनीतिक अपरिहार्यता' हासिल करना है।

अन्य प्रमुख सिफ़ारिशें: निजी अनुसंधान एवं विकास निवेश बढ़ाना — भारत का कुल खर्च अभी सकल घरेलू उत्पाद का केवल 0.64 प्रतिशत है; कृषि में केवल उत्पादन नहीं, उत्पादकता भी बढ़ाना; कई शहरी केंद्रों के विकास के लिए नमो भारत क्षेत्रीय तीव्र परिवहन प्रणाली के ज़रिए शहरी बुनियादी ढाँचा बेहतर करना; जलवायु वित्त की सीमाओं को देखते हुए अनुकूलन को प्राथमिकता देना; और उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप कौशल कार्यक्रम चलाने के लिए राष्ट्रीय योजना के तहत 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को उन्नत करना, जिनमें 200 मुख्य केंद्र और उनसे जुड़े 800 सहायक केंद्र होंगे।

सर्वेक्षण के अनुसार, वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत 2019 के 66वें स्थान से सुधरकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुँचा है। कारोबारी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास खर्च को बढ़ाकर इस स्थिति में और सुधार किया जाना चाहिए।