8 मार्च 2026 को भारत में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को 'विकसित भारत की नींव के रूप में नारी शक्ति' विषय के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह था कि विकसित भारत की दिशा में महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक प्रगति की सक्रिय भागीदार के रूप में देखना होगा।

नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर इंडिया गेट से विजय चौक तक प्रतीकात्मक शक्ति पदयात्रा आयोजित की गई। इसमें सशस्त्र बलों, विज्ञान, खेल और जमीनी नेतृत्व से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी पर ज़ोर दिया गया। युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने देश भर में 250 स्थानों पर अस्मिता पहल आयोजित की; अस्मिता का आशय कार्रवाई के ज़रिए महिलाओं को खेल उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रेरित करना है। इसे महिलाओं की बड़ी भागीदारी वाला राष्ट्रव्यापी खेल आयोजन बताया गया।

प्रीलिम्स के लिए थीम, स्थान, मंत्रालय, मार्ग और अस्मिता पहल सीधे पूछे जाने वाले बिंदु हैं। स्टैटिक जीके में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है और संयुक्त राष्ट्र ने 1977 में इसे मान्यता दी थी। भारत के संदर्भ में महिलाओं की समान भागीदारी को संविधान में समानता, वयस्क मताधिकार और प्रतिनिधित्व से जोड़कर पढ़ना चाहिए। अनुच्छेद 15 भेदभाव के निषेध से, अनुच्छेद 39 समान आजीविका अवसरों से और अनुच्छेद 42 मातृत्व राहत तथा मानवीय कार्य स्थितियों से जुड़ा है। स्थानीय निकायों और विधानमंडलों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की चर्चा भी नारी शक्ति विमर्श का हिस्सा है। इसलिए मुख्य परीक्षा में महिला-नेतृत्व वाले विकास और समावेशी शासन पर इसका उपयोग किया जा सकता है।