प्रकाशित: 13 अक्टूबर 2025अर्थव्यवस्था
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन: दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए ₹11,440 करोड़
सरकार ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के साथ दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया। इस मिशन के लिए 2025-26 से 2030-31 तक ₹11,440 करोड़ का परिव्यय रखा गया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक है। देश में हर साल लगभग 270 लाख टन दलहन का उत्पादन होता है, जबकि माँग 300 लाख टन है।
मिशन के तहत अधिक उपज देने वाली किस्मों और गुणवत्तापूर्ण बीजों को बढ़ावा देने तथा वर्षा पर निर्भर और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में दलहन की खेती बढ़ाने पर ज़ोर है। इसका लक्ष्य खास तौर पर तूर (अरहर), उड़द और मसूर में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। राजस्थान मूँग और मोठ (मटकी) के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में से एक है। मिशन के तहत यहाँ सरकारी खरीद बढ़ेगी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का दायरा विस्तृत होगा। बाड़मेर, जालोर, नागौर और जोधपुर जिले दलहन की खेती के प्रमुख क्षेत्र हैं।
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दालों में आत्मनिर्भरता मिशन का परिव्यय कितना है?
व्याख्या · सही उत्तर Cदालों में आत्मनिर्भरता मिशन का परिव्यय 2025-26 से 2030-31 के लिए ₹11,440 करोड़।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन क्या है और इसका बजट कितना है?
**दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन** ₹11,440 करोड़ की सरकारी योजना है, जिसका लक्ष्य 2030-31 तक भारत को **दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर** बनाना है। मिशन में **अधिक उपज देने वाली किस्मों, सूक्ष्म सिंचाई और किसान सहायता कार्यक्रमों के ज़रिए अरहर, उड़द और मसूर की पैदावार बढ़ाने** पर ज़ोर है।
भारत दलहन में आत्मनिर्भर क्यों नहीं है और अभी कितना आयात होता है?
भारत हर साल **20-30 लाख टन से अधिक दलहन** आयात करता है। यह आयात मुख्यतः **कनाडा से मसूर, ऑस्ट्रेलिया से चना और म्यांमार से उड़द** का होता है और इस पर हर साल ₹10,000-15,000 करोड़ से अधिक खर्च होता है। **कम उपज, छोटी और बिखरी जोतें तथा कीमतों में उतार-चढ़ाव** किसानों को दलहन की खेती करने से हतोत्साहित करते हैं।
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन किन दलहनों पर केंद्रित है और वे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मिशन **अरहर, उड़द, मसूर, मूँग और चना** पर केंद्रित है, जो भारत की पाँच प्रमुख दलहन फसलें हैं। दलहन **खाद्य सुरक्षा और खासकर शाकाहारियों के लिए प्रोटीन** का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। वे नाइट्रोजन स्थिरीकरण के ज़रिए मिट्टी की सेहत सुधारते हैं और किसानों की आय के स्रोतों में विविधता लाते हैं।
₹11,440 करोड़ के परिव्यय वाले दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के प्रमुख उपाय क्या हैं?
₹11,440 करोड़ के परिव्यय वाले दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन में **अधिक उपज देने वाली और रोग-रोधी बीज किस्मों का वितरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की गारंटी, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (NCCF) के ज़रिए खरीद, सूक्ष्म सिंचाई के लिए सहायता और फसल बीमा का दायरा** शामिल हैं। ये उपाय दलहन उगाने वाले प्रमुख राज्यों के किसानों के लिए हैं।
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन की देखरेख कौन सा मंत्रालय करता है और 2030-31 का लक्ष्य क्या है?
**कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय** दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन की देखरेख करता है। लक्ष्य घरेलू दलहन उत्पादन को मौजूदा लगभग 270 लाख टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 300 लाख टन करना है, ताकि बड़े पैमाने पर आयात की ज़रूरत खत्म हो।