राजस्थान के मुख्यमंत्री ने 1 सितंबर 2025 को राजस्थान वस्त्र एवं परिधान नीति 2025 के क्रियान्वयन आदेश पर हस्ताक्षर किए, जो राज्य की औद्योगिक विकास रणनीति में एक ऐतिहासिक कदम है। इस नीति का उद्देश्य राजस्थान को रेशे से परिधान तक के व्यापक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जहाँ कपास, ऊन और बाँधनी जैसी पारंपरिक वस्त्र विधाओं की ऐतिहासिक ताकत का उपयोग किया जाएगा।

यह नीति पूरी मूल्य श्रृंखला को शामिल करती है—कच्चे रेशे और धागे की कताई से लेकर कपड़ा बुनाई, रँगाई और तैयार परिधान विनिर्माण तक। इसे भीलवाड़ा (सिंथेटिक कपड़े), जोधपुर (पारंपरिक वस्त्र) और जयपुर (ब्लॉक-प्रिंट परिधान) जैसे प्रमुख वस्त्र शहरों के परिधान क्लस्टरों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार किया गया है।

नीति के अंतर्गत मुख्य प्रोत्साहन संरचनाओं में पूँजी निवेश सब्सिडी, विद्युत शुल्क में छूट और वस्त्र इकाइयों के लिए सावधि ऋण पर ब्याज उपदान शामिल हैं। महिला उद्यमों और स्थानीय कार्यबल को न्यूनतम प्रतिशत में रोजगार देने वाली इकाइयों के लिए विशेष प्रोत्साहन भी प्रदान किए गए हैं।

यह नीति राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप तैयार की गई है, जहाँ कई वस्त्र और परिधान कंपनियों ने राज्य में पर्याप्त निवेश का वादा किया था। इसका लक्ष्य पाँच वर्षों में एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित करना है, जिसमें ITI और समर्पित परिधान प्रशिक्षण संस्थानों के ज़रिए कौशल विकास और कार्यबल प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है।

सरकार ने प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढाँचे, साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (CETP) और डिजाइन केंद्रों के साथ समर्पित परिधान पार्क स्थापित करने की भी घोषणा की। निर्यात उन्मुख इकाइयों को त्वरित पर्यावरण मंजूरी और लॉजिस्टिक्स समर्थन सहित अतिरिक्त लाभ मिलेंगे।

राजस्थान वस्त्र एवं परिधान नीति 2025 राज्य की औद्योगिक दृष्टि का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ है, जिसका लक्ष्य अगले दशक में वस्त्र क्षेत्र के GSDP योगदान को दोगुना करना है।