भारतीय रेल ने कवच 4.0 स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे अधिक यातायात वाले मार्गों पर 1,452 मार्ग किलोमीटर में चालू किया है। 13 मार्च 2026 की यह खबर रेलवे सुरक्षा और स्वदेशी तकनीक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। कवच 4.0 भारत की अपनी सिग्नलिंग और ट्रेन सुरक्षा तकनीक है, जिसका उद्देश्य लोको पायलट की सहायता करना और जोखिम वाली स्थिति में ट्रेन को सुरक्षित गति सीमा में रखना है।
कवच में जीपीएस, आरएफआईडी टैग, रेडियो संचार, ट्रैक के किनारे लगे उपकरण और ट्रेन में लगे ऑन-बोर्ड उपकरणों का इस्तेमाल होता है। यदि लोको पायलट निर्धारित गति सीमा या सिग्नल का पालन करने में चूकता है, तो प्रणाली चेतावनी देती है और जरूरत पड़ने पर अपने-आप ब्रेक लगाती है। इससे लाल संकेत पार करने जैसी स्थिति और टक्कर के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। कवच 4.0 में स्थान की सटीकता बढ़ाने, बड़े यार्डों में सिग्नल से जुड़ी जानकारी बेहतर दिखाने, ऑप्टिकल फाइबर केबल पर स्टेशन से स्टेशन तक कवच संपर्क और मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से सीधा संपर्क जैसे सुधार बताए गए हैं।
परीक्षा की दृष्टि से यह विषय विज्ञान-तकनीक, बुनियादी ढांचा, सार्वजनिक सुरक्षा और शासन से जुड़ता है। प्रीलिम्स में कवच की प्रकृति, तकनीकी घटक, 1,452 मार्ग किलोमीटर का विस्तार, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा मार्ग तथा स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे रेलवे आधुनिकीकरण, दुर्घटना-जोखिम घटाने और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवा सुधार के उदाहरण के रूप में लिखा जा सकता है। परिणामी रेल दुर्घटनाएँ 2014-15 में 135 से घटकर 2025-26 में 28 फरवरी 2026 तक 14 बताई गईं, यानी लगभग 90% कमी। यह आंकड़ा सुरक्षा सुधार की व्यापक पृष्ठभूमि देता है, जबकि कवच 4.0 उसका तकनीकी आयाम दिखाता है।
