अमेरिकी आणविक जीवविज्ञानी जेम्स ड्यूई वॉटसन ने 1953 में फ्रांसिस क्रिक के साथ डीएनए की दोहरी हेलिक्स संरचना की खोज की थी। उनका निधन 6 नवंबर 2025 को ईस्ट नॉर्थपोर्ट, न्यूयॉर्क में 97 वर्ष की आयु में हुआ। वॉटसन, क्रिक और मॉरिस विल्किंस को 1962 में शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से मिला।

नेचर में प्रकाशित उनका ऐतिहासिक शोधपत्र आंशिक रूप से रोज़ालिंड फ्रैंकलिन के एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी संबंधी कार्य पर आधारित था। वॉटसन 1968 से 1994 तक कोल्ड स्प्रिंग हार्बर प्रयोगशाला के निदेशक, 1994 से 2003 तक अध्यक्ष और 2003 से 2007 तक चांसलर रहे। इस खोज ने आनुवंशिकी, आणविक जीवविज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी में क्रांतिकारी बदलाव किए तथा जीनोम अनुक्रमण से लेकर CRISPR जीन संपादन तक की प्रगति संभव बनाई।