RBI ने बताया कि भारत का चालू खाता घाटा (CAD) Q1 FY26 (अप्रैल-जून 2025) में 2.4 अरब डॉलर (GDP का 0.2%) रह गया, जो Q1 FY25 के 8.6 अरब डॉलर (GDP का 0.9%) से काफी बेहतर है। पिछली तिमाही (Q4 FY25) में 13.5 अरब डॉलर (GDP का 1.3%) का अधिशेष था। सालाना सुधार सेवा व्यापार अधिशेष में वृद्धि से हुआ, जो Q1 FY26 में 47.9 अरब डॉलर हो गया। FY26 के लिए CAD GDP का 0.9% रहने का अनुमान है।
भारत का चालू खाता घाटा Q1 FY26 में 2.4 अरब डॉलर (GDP का 0.2%) तक सिमटा
भारत का CAD Q1 FY26 में सेवा व्यापार अधिशेष की मजबूती से 2.4 अरब डॉलर तक सिमटा।
मुख्य तथ्य
- भारत का चालू खाता घाटा Q1 FY26 में घटकर USD 240 करोड़ (GDP का 0.2%) रह गया, जो Q1 FY25 में USD 860 करोड़ (GDP का 0.9%) था।
- Q4 FY25 में भारत ने USD 1,350 करोड़ (GDP का 1.3%) का चालू खाता अधिशेष दर्ज किया था।
- सुधार की वजह सेवा व्यापार अधिशेष का साल-दर-साल USD 3,970 करोड़ से बढ़कर USD 4,790 करोड़ होना था।
- पूरे FY26 के लिए भारत का CAD GDP के 0.9% रहने का अनुमान है, जिसे वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद प्रबंधनीय माना जाता है।
- डेटा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया गया।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत का वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही चालू खाता घाटा तेजी से सिमटा। सुधार के कारकों का विश्लेषण कर वैश्विक व्यापार विपरीत परिस्थितियों में बाह्य-क्षेत्र स्थिरता आकलन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में चालू खाता घाटा घटकर 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी सकल घरेलू उत्पाद का 0.2 प्रतिशत रह गया; एक वर्ष पूर्व यह 8.6 अरब था। सेवा व्यापार अधिशेष 39.7 अरब की तुलना में 47.9 अरब रहा, जिससे सुधार हुआ। पूरे वर्ष के लिए 0.9 प्रतिशत अनुमानित है।
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आरबीआई के बाह्य वाणिज्यिक उधार ढाँचे में उधारकर्ताओं को किसी भी राशि की निकासी से पहले ऋण पंजीकरण संख्या लेनी होती है। वास्तविक मासिक ईसीबी लेन-देन फॉर्म ईसीबी-2 रिटर्न के ज़रिए बताए जाते हैं और उनमें वही ऋण पंजीकरण संख्या उद्धृत की जाती है।
स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1 FY26 में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) क्या था?
**Q1 FY26** में भारत का **चालू खाता घाटा (CAD) घटकर USD 2.4 अरब (GDP का 0.2%)** हो गया, जो बाहरी जोखिम कम होने का संकेत देता है।
चालू खाता घाटा (CAD) क्या है और भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
**CAD** किसी देश के कुल निर्यात और आयात के बीच का अंतर है। भारत के लिए यह **व्यापार घाटे** (तेल, सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स के अधिक आयात) को दर्शाता है। अधिक CAD रुपये पर दबाव डालता है।
Q1 FY26 में भारत के CAD के संकुचन के पीछे कौन से कारक रहे?
CAD में संकुचन के कारण रहे: **मजबूत सेवा निर्यात** (IT/BPO), **मजबूत प्रेषण** (~125 अरब USD वार्षिक), **तेल की मध्यम कीमतें** और **माल निर्यात** में वृद्धि।
CAD और भारत के भुगतान संतुलन (BoP) के बीच क्या संबंध है?
**BoP = चालू खाता + पूंजी खाता + वित्तीय खाता**। CAD की भरपाई **पूंजी खाते के अधिशेष** (FDI, FPI, NRI जमा) से की जाती है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार CAD से कैसे संबंधित है?
भारत के **विदेशी मुद्रा भंडार** ~**680-700 अरब USD** (2025) हैं, जिनसे ~10-11 महीने के आयात का खर्च संभाला जा सकता है और CAD की भरपाई में मदद मिलती है।
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