प्रकाशित: 13 सितंबर 2025समाचार स्रोतविज्ञान-प्रौद्योगिकी
PM मोदी ने असम के नुमालीगढ़ में विश्व के पहले बाँस-आधारित इथेनॉल संयंत्र का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री मोदी ने 14 सितंबर 2025 को असम के नुमालीगढ़ में भारत की पहली बाँस-आधारित बायोरिफाइनरी का उद्घाटन किया। यह NRL, फिनलैंड की Fortum Oyj और Chempolis Oy का संयुक्त उद्यम है।
यह संयंत्र हर साल 3 लाख टन बाँस का प्रसंस्करण करता है और लगभग 49,000 टन बायोइथेनॉल, 19,000 टन फर्फ्यूरल, 11,000 टन एसिटिक एसिड तथा 1.60 लाख टन जैव-कोयला तैयार करता है। इसके अनुमानित सामाजिक प्रभाव से 30,000 से अधिक परिवारों को लाभ पहुँचता है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: नुमालीगढ़ बाँस-आधारित जैव-रिफाइनरी विश्व में अपनी तरह की पहली है। इसके तकनीकी महत्व, उप-उत्पाद अर्थशास्त्र एवं भारत के नेट जीरो 2070 रोडमैप में योगदान की परीक्षा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
प्रधानमंत्री मोदी ने 14 सितंबर 2025 को असम में नुमालीगढ़ बाँस जैव-रिफाइनरी का उद्घाटन किया, जो फोर्टम एवं केमपोलिस का संयुक्त उद्यम है। यह वार्षिक तीन लाख टन बाँस संसाधित करती है और लगभग उनचास हजार टन जैव-इथेनॉल, उन्नीस हजार टन फरफुरल, ग्यारह हजार टन एसिटिक अम्ल तथा 144 गीगावाट-घंटा हरित ऊर्जा उत्पन्न करती है; इससे तीस हजार परिवार लाभान्वित होते हैं।
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जुड़ा प्रश्नकठिन
भारत की पहली बांस आधारित बायोरिफाइनरी का उद्घाटन नुमालीगढ़, असम में किया गया। यह NRL का किन विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम है?
व्याख्या · सही उत्तर Bबांस आधारित बायोरिफाइनरी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL), फिनलैंड की फोर्टम ओयज और चेमपोलिस ओय का संयुक्त उद्यम है। यह सालाना 300,000 टन बांस को प्रोसेस करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
असम के नुमालीगढ़ में उद्घाटित भारत का पहला बाँस आधारित बायो-रिफाइनरी और इथेनॉल संयंत्र क्या है?
पीएम मोदी ने ₹7,200 करोड़ की लागत से नुमालीगढ़, असम में विश्व के पहले बाँस आधारित बायो-रिफाइनरी और इथेनॉल संयंत्र का उद्घाटन किया।
नुमालीगढ़ बाँस बायो-रिफाइनरी को विश्व की पहली क्यों माना जाता है?
यह Numaligarh Refinery Limited (NRL), Finland की Fortum Oyj और Chempolis Oy का संयुक्त उद्यम है। यह बाँस से व्यावसायिक पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन करने वाली विश्व की पहली रिफाइनरी है।
नुमालीगढ़ बाँस बायो-रिफाइनरी की लागत और क्षमता क्या है?
**रिफाइनरी की लागत ₹7,200 करोड़ है** और यह नुमालीगढ़, असम में बाँस आधारित इथेनॉल उत्पादन करती है। **यह सुविधा हर साल 3 लाख टन बाँस संसाधित करती है और 49,000 टन उत्पादन करती है।**
बाँस बायो-रिफाइनरी असम और पूर्वोत्तर भारत को कैसे लाभान्वित करेगी?
**सामाजिक स्तर पर इससे 30,000 से अधिक परिवारों को लाभ मिलेगा और भारत के नेट-ज़ीरो 2070 लक्ष्यों की दिशा में मदद मिलेगी**। रिफाइनरी से रोज़गार पैदा होगा, बाँस किसानों की आय बढ़ेगी और भारत के जैव ईंधन तथा नेट-ज़ीरो लक्ष्यों को बढ़ावा मिलेगा।
भारत का इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम क्या है और बाँस की क्या भूमिका है?
**प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर में असम के नुमालीगढ़ में भारत की पहली बाँस-आधारित बायो-रिफाइनरी का उद्घाटन किया**। 2025 तक 20% इथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्य; बाँस इथेनॉल के लिए गन्ने और अनाज से आगे कच्चे माल की विविधता बढ़ाता है।