प्रकाशित: 9 जनवरी 2026PIB/MoWCDशासन
महिला एवं बाल विकास में CSR एकीकरण के लिए PANKHUDI पोर्टल लॉन्च
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने PANKHUDI पोर्टल लॉन्च किया। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड को महिला सशक्तिकरण और बाल पोषण कार्यक्रमों में लगाने के लिए बनाया गया है।
PANKHUDI का पूर्ण रूप है — पोषण, ज्ञान, स्वास्थ्य, उत्थान, विकास और समावेशन को आगे बढ़ाने की साझेदारी। यह पोर्टल कंपनी अधिनियम के तहत CSR दायित्व पूरा करने वाली कंपनियों और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) के प्रमुख मिशनों — पोषण 2.0, मिशन वात्सल्य और मिशन शक्ति — के बीच पुल का काम करता है।
पोषण 2.0 (2021 में लॉन्च) सरकार का व्यापक पोषण मिशन है, जिसका फोकस छह साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण पर है। मिशन वात्सल्य बाल संरक्षण सेवाओं और कल्याण पर ध्यान देता है, जबकि मिशन शक्ति महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की व्यापक योजना है।
PANKHUDI पोर्टल कंपनियों को विशिष्ट परियोजनाओं और भौगोलिक क्षेत्रों में CSR योगदान देने की सुविधा देता है। भारत में CSR कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत अनिवार्य है।
0
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयप्रकारपहलविषयराष्ट्रीयपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतPIB/MoWCD
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PANKHUDI का पूर्ण रूप क्या है?
PANKHUDI का अर्थ है पोषण, ज्ञान, स्वास्थ्य, उत्थान, विकास और समावेशन को आगे बढ़ाने की साझेदारी।
PANKHUDI पोर्टल किस मंत्रालय ने लॉन्च किया?
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) ने केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के ज़रिए।
PANKHUDI किन तीन सरकारी मिशनों में CSR राशि लगाता है?
पोषण 2.0 (पोषण), मिशन वात्सल्य (बाल संरक्षण) और मिशन शक्ति (महिला सशक्तिकरण)।
भारत में CSR किस अधिनियम की किस धारा के तहत अनिवार्य है?
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत कम से कम 2% औसत शुद्ध लाभ CSR पर खर्च करना अनिवार्य है।
पोषण 2.0 क्या है?
पोषण 2.0 भारत का व्यापक पोषण मिशन है, जिसे 2021 में लॉन्च किया गया; इसका उद्देश्य छह साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण कम करना है।