मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 23 नवंबर 2025 को राजस्थान में राज्य स्तरीय पल्स पोलियो अभियान का उद्घाटन किया। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य 5 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को पोलियो से बचाव के लिए मौखिक पोलियो वैक्सीन की बूंदें पिलाना है। अभियान में राज्य भर में निर्धारित बूथों पर वैक्सीन दी जानी है और घर-घर जाने वाली टीमें भी बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित करती हैं।

परीक्षा की दृष्टि से यह खबर केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम की तारीख याद करने तक सीमित नहीं है। यह राजस्थान में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन, टीकाकरण कवरेज, फील्ड-स्तर पर सेवा वितरण और सरकारी अभियान तंत्र को समझने का उदाहरण भी है। बूथ-आधारित व्यवस्था और घर-घर पहुंच, दोनों मिलकर बताते हैं कि छोटे बच्चों जैसे संवेदनशील समूह तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में प्रशासन किस तरह अंतिम छोर तक काम करता है।

स्टैटिक जीके से इसका लिंक भारत के पोलियो उन्मूलन प्रयासों से जुड़ता है। भारत को 27 मार्च 2014 को पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था, फिर भी पोलियो-मुक्त स्थिति बनाए रखने के लिए रोकथाम और निगरानी जरूरी रहती है। इसलिए पल्स पोलियो जैसे अभियान नियमित जनस्वास्थ्य सतर्कता का हिस्सा माने जाते हैं। RAS और UPSC में इसे राजस्थान करंट अफ़ेयर्स, स्वास्थ्य नीति, सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं और शासन में राज्य की भूमिका के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रारंभिक परीक्षा में तारीख, लक्षित आयु-समूह, वैक्सीन देने का तरीका और राज्य-स्तरीय पहल पूछी जा सकती है। मुख्य परीक्षा में इसे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, जनभागीदारी और बच्चों के स्वास्थ्य-सुरक्षा से जोड़कर लिखा जा सकता है।