6 अक्टूबर 2025 को वकील राकेश किशोर (71) ने सर्वोच्च न्यायालय में 'सनातन का अपमान नहीं सहेंगे' चिल्लाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किया। यह घटना खजुराहो भगवान विष्णु मूर्ति मामले में CJI गवई के सितंबर 2025 के फैसले से नाराजगी के कारण हुई। सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने किशोर का लाइसेंस निलंबित किया। CJI गवई ने इस मामले को औपचारिक रूप से आगे नहीं बढ़ाया।
सर्वोच्च न्यायालय में जूता फेंकने की घटना: वकील ने खुली अदालत में CJI बी.आर. गवई पर हमला किया; बार काउंसिल ने वकील को निलंबित किया
6 अक्टूबर 2025 को वकील राकेश किशोर (71) ने सर्वोच्च न्यायालय में 'सनातन का अपमान नहीं सहेंगे' चिल्लाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किया। यह घटना खजुराहो भगवान विष्णु मूर्ति मामले में CJI गवई के सितंबर 2025 के फैसले से उपजी नाराजगी का परिणाम थी। सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने किशोर का लाइसेंस निलंबित किया। CJI गवई ने इस मामले को औपचारिक रूप से आगे न बढ़ाने का फैसला किया।
मुख्य तथ्य
- वकील राकेश किशोर (71) ने 6 अक्टूबर 2025 को CJI बी.आर. गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किया।
- यह कृत्य खजुराहो भगवान विष्णु मूर्ति मामले के फैसले से नाराजगी के कारण किया गया था।
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने तत्काल वकील का लाइसेंस निलंबित कर दिया।
- CJI गवई ने इस मामले को औपचारिक रूप से आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया।
- इस घटना ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाईं।
- अनुच्छेद 129 के तहत न्यायालय की अवमानना के प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा की रक्षा करते हैं।
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6 अक्टूबर 2025 को खुले न्यायालय में जूता फेंकने के प्रयास का निशाना भारत के कौन-से मुख्य न्यायाधीश थे?
6 अक्टूबर 2025 को वकील राकेश किशोर ने सर्वोच्च न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किया।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
CJI बी.आर. गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किसने किया और यह घटना कब हुई?
71 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने 6 अक्टूबर 2025 को खुली अदालत में भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किया। वे खजुराहो भगवान विष्णु मूर्ति मामले में CJI गवई के फैसले से नाराज थे।
जूता फेंकने की घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने क्या कार्रवाई की?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने तत्काल वकील राकेश किशोर का लाइसेंस निलंबित कर दिया। यह कदम न्यायपालिका की गरिमा और पवित्रता की रक्षा के लिए उठाया गया।
CJI बी.आर. गवई ने अपने खिलाफ हुई जूता फेंकने की घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?
CJI बी.आर. गवई ने इस मामले को औपचारिक रूप से आगे नहीं बढ़ाया और कहा कि वे इसे 'स्वाभाविक रूप से समाप्त' होने देंगे। इससे उनके न्यायिक संयम और उदारता का परिचय मिला।
कौन-सा संवैधानिक प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही की गरिमा की रक्षा करता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को न्यायालय की अवमानना के लिए दंडित करने का अधिकार देता है, जिससे सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही की गरिमा और पवित्रता सुरक्षित रहती है।
सर्वोच्च न्यायालय में जूता फेंकने की घटना से क्या चिंता उत्पन्न हुई?
इस घटना से सर्वोच्च न्यायालय के भीतर न्यायिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उठीं और न्यायाधीशों की सुरक्षा के लिए बेहतर इंतज़ामों की जरूरत रेखांकित हुई।
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