PIB वर्षांत समीक्षा 2025: अंतरिक्ष विभाग के तहत भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियां
Aसीधा उत्तर
ISRO 2025 की मुख्य बातें: सबसे भारी प्रक्षेपण (LVM3-M6), स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर, शुक्ला का ISS मिशन, गगनयान प्रगति।
मुख्य तथ्य
LVM3-M6 ने 24 दिसंबर 2025 को 6,100 किग्रा के BlueBird Block-2 का प्रक्षेपण किया, जो भारत से प्रक्षेपित अब तक का सबसे भारी उपग्रह था।
अर्धचालक प्रयोगशाला (SCL), चंडीगढ़ के सहयोग से अंतरिक्ष में इस्तेमाल के लिए बने स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर VIKRAM3201 और KALPANA3201 उपलब्ध कराए गए।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने Axiom-04 मिशन के दौरान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताए; इसके साथ भारत ने ISS पर मानव अनुसंधान की शुरुआत की।
गगनयान के पैराशूट परीक्षण पूरे हुए; इसके बाद मई में अंतिम एबॉर्ट परीक्षण और अगस्त में पहला एकीकृत एयर-ड्रॉप परीक्षण पूरा किया गया।
गगनयान का मानवयुक्त मिशन 2027 की शुरुआत में होना तय है।
अंतरिक्ष विभाग ने 17 दिसंबर को अपनी वर्षांत समीक्षा 2025 जारी की। इसकी प्रमुख उपलब्धियाँ थीं: (1) LVM3-M6 ने 24 दिसंबर को 6,100 किग्रा के BlueBird Block-2 का प्रक्षेपण किया, जो भारत से प्रक्षेपित अब तक का सबसे भारी उपग्रह था; (2) अर्धचालक प्रयोगशाला (SCL), चंडीगढ़ के सहयोग से अंतरिक्ष में इस्तेमाल के लिए बने स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर VIKRAM3201 और KALPANA3201 उपलब्ध कराए गए; (3) गगनयान के पैराशूट परीक्षण पूरे हुए; (4) मई में अंतिम एबॉर्ट परीक्षण पूरा हुआ; और (5) अगस्त में पहला एकीकृत एयर-ड्रॉप परीक्षण पूरा हुआ।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला Axiom-04 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुँचे और वहाँ 18 दिन रहकर सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण प्रयोग किए। इसके साथ भारत ने ISS पर मानव अनुसंधान की शुरुआत की। गगनयान का मानवयुक्त मिशन 2027 की शुरुआत में होना तय है।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
RAS 2021 Polar Satellite Launch Vehicle और Geosynchronous Satellite Launch Vehicle में क्या अंतर है? — LVM3-M6 की 2025 में भारी-भारक उपलब्धि PSLV तथा पूर्ववर्ती GSLV श्रेणियों के विपरीत है।
RAS 2024 रक्षा उत्पादन, विशेष रूप से भारत की मिसाइल एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में, स्वदेशीकरण के रणनीतिक एवं तकनीकी महत्व का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। — 2025 की समीक्षा प्रक्षेपण यानों, प्रोसेसरों तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान में स्वदेशीकरण को रेखांकित करती है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: सूचना ब्यूरो की वर्षांत समीक्षा में उल्लिखित वर्ष 2025 में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए। (10 अंक)
उत्तर (50 शब्द):
वर्ष 2025 में एलवीएम तीन-एम छह ने इकसठ सौ किलोग्राम ब्लूबर्ड ब्लॉक-दो को कक्षा में स्थापित किया। चंडीगढ़ अर्धचालक प्रयोगशाला के साथ विक्रम और कल्पना स्वदेशी प्रोसेसर विकसित किए गए। गगनयान के पैराशूट परीक्षण, मई में अंतिम निष्फलन और अगस्त में एकीकृत एयर-ड्रॉप परीक्षण हुए। शुभांशु शुक्ला का अठारह दिवसीय एक्सिओम-चार अंतरिक्ष केंद्र मिशन प्रमुख उपलब्धि रहा।
इस विषय की स्थिर तैयारी
इस खबर के पीछे का स्थायी सिलेबस पढ़ें।
रक्षा एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकीविज्ञान एवं प्रौद्योगिकीहाल की उपलब्धियां एवं भारतीय योगदानविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयविषयविज्ञान-प्रौद्योगिकीपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतPIB
यह टॉपिक में दिखता है
Tसरकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कार्यक्रम एवं नीतियाँ
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की वर्षांत समीक्षा 2025 किसने और कब जारी की?
अंतरिक्ष विभाग ने 17 दिसंबर को अपनी वर्षांत समीक्षा 2025 जारी की।
LVM3-M6 ने समीक्षा में कौन-सी उपग्रह उपलब्धि दर्ज की?
LVM3-M6 ने 24 दिसंबर को 6,100 किग्रा के BlueBird Block-2 का प्रक्षेपण किया, जो भारत से प्रक्षेपित अब तक का सबसे भारी उपग्रह था।
अंतरिक्ष समीक्षा में माइक्रोप्रोसेसर और गगनयान के कौन-से परीक्षण चरण बताए गए?
अर्धचालक प्रयोगशाला (SCL), चंडीगढ़ के सहयोग से अंतरिक्ष में इस्तेमाल के लिए बने स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर VIKRAM3201 और KALPANA3201 उपलब्ध कराए गए। गगनयान के पैराशूट परीक्षण पूरे हुए; मई में अंतिम एबॉर्ट परीक्षण और अगस्त में पहला एकीकृत एयर-ड्रॉप परीक्षण भी पूरा किया गया।
शुभांशु शुक्ला ने Axiom-04 मिशन के दौरान क्या किया और गगनयान का मानवयुक्त मिशन कब निर्धारित है?
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला Axiom-04 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुँचे और वहाँ सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण प्रयोग करते हुए 18 दिन बिताए। इसके साथ भारत ने ISS पर मानव अनुसंधान की शुरुआत की। गगनयान का मानवयुक्त मिशन 2027 की शुरुआत में होना तय है।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।