भारत ने 2028 तक मॉड्यूल, सेल, वेफर और इंगट सहित पूरी तरह स्वदेशी सौर विनिर्माण तंत्र बनाने का लक्ष्य घोषित किया। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के केंद्रीय मंत्री ने 24,000 करोड़ रुपये की PLI (उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन) सहायता के साथ यह घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य चीनी आपूर्तिकर्ताओं पर भारत की निर्भरता कम करना और घरेलू रोजगार सृजित करना है। यह योजना 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के भारत के लक्ष्य और पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
भारत ने 2028 तक पूर्ण स्वदेशी सौर सेल विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का लक्ष्य रखा
भारत का लक्ष्य है कि 2028 तक 24,000 करोड़ रुपये की PLI सहायता से पूरी तरह स्वदेशी सौर विनिर्माण तंत्र तैयार किया जाए, जिससे 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
मुख्य तथ्य
- भारत का लक्ष्य 2028 तक सौर सेल विनिर्माण का पूरी तरह स्वदेशी इकोसिस्टम तैयार करना है।
- 24,000 करोड़ रुपये की PLI योजना घरेलू सौर विनिर्माण को बढ़ावा देती है।
- इसका लक्ष्य पूरी मूल्य श्रृंखला: मॉड्यूल, सेल, वेफर्स और इंगॉट्स को शामिल करना है।
- इससे चीन से सौर उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होती है।
- यह 2030 तक भारत के 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को हासिल करने में मदद करता है।
- पहल आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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भारत में स्वदेशी सौर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए घोषित उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन, यानी पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन राशि कितनी है?
इस पहल को 24,000 करोड़ रुपये के सरकारी समर्थन के साथ उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का समर्थन प्राप्त है, जिसका उद्देश्य आयातित सौर घटकों पर निर्भरता कम करना है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत किस वर्ष तक पूरी तरह स्वदेशी सौर सेल विनिर्माण व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य रखता है?
भारत का लक्ष्य 2028 तक मॉड्यूल, सेल, वेफर्स और इंगॉट्स सहित सौर विनिर्माण की पूरी मूल्य श्रृंखला वाला पूर्ण स्वदेशी तंत्र तैयार करना है।
भारत के घरेलू सौर विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली PLI योजना का वित्तीय आवंटन क्या है?
भारत के घरेलू सौर विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना का वित्तीय आवंटन 24,000 करोड़ रुपये है।
भारत 2028 तक स्वदेशी सौर विनिर्माण तंत्र क्यों विकसित कर रहा है?
भारत स्वदेशी सौर विनिर्माण इसलिए विकसित कर रहा है ताकि चीन से सौर उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम हो, आत्मनिर्भर भारत मिशन को बढ़ावा मिले और 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य हासिल किया जा सके।
भारत 2028 तक जिस सौर विनिर्माण मूल्य श्रृंखला को स्वदेशी बनाना चाहता है, उसमें क्या शामिल है?
भारत जिस मूल्य श्रृंखला को पूरी तरह स्वदेशी बनाना चाहता है, उसमें सौर मॉड्यूल, सेल, वेफर्स और इंगॉट्स शामिल हैं — यानी कच्चे माल से तैयार सौर पैनल तक की पूरी उत्पादन प्रक्रिया।
भारत की सौर विनिर्माण पहल उसके व्यापक नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों से कैसे जुड़ती है?
2028 तक स्वदेशी सौर विनिर्माण का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य में सीधे मदद करता है और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के लिए आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है।
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