मकर संक्रांति 2026 पूरे भारत में मनाई गई; मुख्यमंत्री शर्मा ने जल महल में जयपुर पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया
Aसीधा उत्तर
मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को मनाई गई; मुख्यमंत्री शर्मा ने जल महल में जयपुर पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया, जहाँ पतंग प्रदर्शनी ऑपरेशन सिंदूर विषय पर आधारित थी।
मुख्य तथ्य
मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को मनाई गई; इसी दिन दोपहर 3:13 बजे सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया।
यह सर्दियों के अंत, उत्तरायण की शुरुआत और दिनों के लंबे होने का प्रतीक है; इसे तमिलनाडु में पोंगल, असम में माघ बिहू और गुजरात में उत्तरायण के नाम से मनाया जाता है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में जल महल के तटबंध पर पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया।
पतंग प्रदर्शनी ऑपरेशन सिंदूर विषय पर आधारित थी और मुख्यमंत्री ने लोक कलाकारों से बातचीत भी की।
यह त्योहार लोक संस्कृति को मजबूत करता है, रचनात्मकता और सामाजिक जागरूकता बढ़ाता है तथा पर्यटन को बढ़ावा देता है।
मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को मनाई गई और दोपहर 3:13 बजे सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया। यह त्योहार सर्दियों के अंत, उत्तरायण की शुरुआत और दिनों के लंबे होने का प्रतीक है। इसे तमिलनाडु में पोंगल, असम में माघ बिहू और गुजरात में उत्तरायण के नाम से मनाया जाता है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में जल महल के तटबंध पर पतंग उड़ाकर पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर विषय पर आधारित पतंग प्रदर्शनी देखी और लोक कलाकारों से बातचीत की। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह त्योहार लोक संस्कृति को मजबूत करता है, रचनात्मकता और सामाजिक जागरूकता बढ़ाता है तथा पर्यटन को बढ़ावा देता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की हजारों पतंगों से जयपुर का आकाश भर गया।
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मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: मकर संक्रांति 2026 के अवसर पर जल महल में आयोजित जयपुर पतंग महोत्सव के सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व की चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
14 जनवरी 2026 की मकर संक्रांति पर सूर्य ने 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जल महल में पतंग उड़ाकर जयपुर पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के साथ ऑपरेशन सिंदूर प्रदर्शनी देखी। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों व लोककलाकारों से पर्यटन, रचनात्मकता और राजस्थानी विरासत को बढ़ावा मिला।
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मकर संक्रांति 2026 कब मनाई गई और इससे कौन-सी खगोलीय घटना जुड़ी है?
**मकर संक्रांति 2026** **14 जनवरी 2026** को मनाई गई और **दोपहर 3:13 बजे सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया**। यह **सर्दियों के अंत**, **उत्तरायण** (सूर्य की उत्तर दिशा में यात्रा) की शुरुआत और दिनों के लंबे होने का प्रतीक है। यह **सौर चक्र** पर आधारित कुछ हिंदू त्योहारों में से एक है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मकर संक्रांति 2026 पर जयपुर के जल महल में पतंग महोत्सव का उद्घाटन कैसे किया?
**राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा** ने **14 जनवरी 2026** को **जल महल, जयपुर** में पतंग उड़ाकर **अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव** का उद्घाटन किया। उन्होंने **ऑपरेशन सिंदूर विषय** पर आधारित पतंग प्रदर्शनी देखी और लोक कलाकारों से बातचीत की। **उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी** और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। तीन दिवसीय आयोजन **14-16 जनवरी** को **मानसागर झील** के पास जयपुर पोलो ग्राउंड और जल महल मैदान में हुआ।
जनवरी 2026 में जयपुर के जल महल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में कितने देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया?
**20 से अधिक देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों** ने **14-16 जनवरी 2026** को **जल महल** (मानसागर झील के पास) में आयोजित जयपुर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लिया। तीन दिवसीय आयोजन में **सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, राजस्थानी खान-पान के मेले और लोक संगीत** भी शामिल थे। **राजस्थान के सात संभागों, जैसलमेर और माउंट आबू** में भी कार्यक्रम हुए।
मकर संक्रांति को भारत के अलग-अलग राज्यों में किन नामों से जाना जाता है?
मकर संक्रांति को **तमिलनाडु** में **पोंगल**, **असम** में **माघ बिहू** और **गुजरात** में **उत्तरायण** के नाम से मनाया जाता है। **14 जनवरी 2026** को मनाया गया यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और चंद्र पंचांग के बजाय **सौर चक्र** पर आधारित कुछ हिंदू त्योहारों में से एक है।
जयपुर पतंग महोत्सव 2026 में ऑपरेशन सिंदूर विषय पर आधारित पतंग प्रदर्शनी का क्या महत्व था?
मकर संक्रांति के दिन, **14 जनवरी 2026** को **जल महल, जयपुर** में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने **ऑपरेशन सिंदूर विषय** पर आधारित पतंग प्रदर्शनी देखी। यह प्रदर्शनी भारत की सैन्य कार्रवाइयों के प्रति राष्ट्रीय गौरव की भावना को दर्शाती थी। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह त्योहार **लोक संस्कृति को मजबूत करता है, रचनात्मकता और सामाजिक जागरूकता बढ़ाता है तथा राजस्थान में पर्यटन को बढ़ावा देता है**।
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