प्रकाशित: 21 सितंबर 2025PIBटॉपिक
संस्कृति मंत्रालय ने भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया
संस्कृति मंत्रालय ने 50 लाख से अधिक कृतियों वाली भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने, डिजिटल रूप देने और लोगों तक पहुंचाने के लिए ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया। 'पांडुलिपि विरासत से भारत की ज्ञान-परंपरा को पुनर्जीवित करना' विषय पर पहला ज्ञान भारतम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 11-13 सितंबर 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें भारत और विदेशों के 1,100 से अधिक विद्वानों ने भाग लिया।
ज्ञान भारतम मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। यह प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 2003 में शुरू किए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन का पुनरुद्धार और विस्तार है। इसे 2024-31 के लिए ₹482.85 करोड़ के कुल परिव्यय वाली केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में मंज़ूरी दी गई, जिसमें 2025-26 के लिए ₹60 करोड़ शामिल हैं। प्राचीन भारतीय ग्रंथों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए ज्ञान संसाधनों तक डिजिटल पहुंच के लिए ज्ञान पोर्टल शुरू किया गया है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत की पांडुलिपि विरासत संरक्षण में ज्ञान भारतम मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित, 2024-31 के लिए 482.85 करोड़ रुपये परिव्यय वाली केंद्रीय क्षेत्र योजना ज्ञान भारतम मिशन पचास लाख से अधिक पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का लक्ष्य रखती है। यह 2003 की राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन का पुनरुद्धार कर प्राचीन ग्रंथों को आधुनिक तकनीक से जोड़ती है और वैश्विक अध्ययन के लिए ज्ञान पोर्टल शुरू करती है।
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राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM), जिसे ज्ञान भारतम मिशन के तहत पुनर्जीवित किया गया है, मूल रूप से किस PM ने शुरू किया था?
व्याख्या · सही उत्तर Cएनएमएम की शुरुआत 2003 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। जीबीएम 2024-31 के लिए ₹482.85 करोड़ के प्रावधान के साथ इसे फिर सक्रिय करता और इसका विस्तार करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया ज्ञान भारतम मिशन क्या है?
संस्कृति मंत्रालय ने भारत की 50 लाख से अधिक कृतियों वाली विशाल पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने, डिजिटल रूप देने और सुलभ बनाने के लिए ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया।
भारत की पांडुलिपि विरासत का क्या महत्व है?
भारत में 50 लाख से अधिक पांडुलिपियों का विश्व का सबसे बड़ा संग्रह है, जिसमें विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और साहित्य शामिल हैं। पहला ज्ञान भारतम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 11-13 सितंबर 2025 को विज्ञान भवन में आयोजित हुआ, जिसमें 1,100 से अधिक विद्वान शामिल हुए।
ज्ञान भारतम मिशन भारत की पांडुलिपियों को कैसे डिजिटल करेगा?
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित ज्ञान भारतम मिशन, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 2003 में शुरू किए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन का पुनरुद्धार और विस्तार करता है। उन्नत स्कैनिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित सूचीकरण और ऑनलाइन पोर्टल पांडुलिपियों को दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाएंगे।
ज्ञान भारतम के तहत संरक्षित भारत के पांडुलिपि संग्रह में कौन-सी भाषाएँ शामिल हैं?
इस मिशन को 2024-31 के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में मंज़ूरी दी गई है, जिसका कुल परिव्यय ₹482.85 करोड़ है और जिसमें 2025-26 के लिए ₹60 करोड़ शामिल हैं। इसके तहत संस्कृत, पाली, अरबी, फ़ारसी, तमिल, मलयालम और दर्जनों अन्य भारतीय भाषाओं की पांडुलिपियाँ शामिल हैं।
ज्ञान भारतम मिशन भारत की विश्वगुरु परिकल्पना को आगे बढ़ाने में कैसे मदद करता है?
ज्ञान संसाधनों तक डिजिटल पहुंच के लिए ज्ञान पोर्टल शुरू किया गया है, जो आधुनिक तकनीक को प्राचीन भारतीय ग्रंथों से जोड़ता है। प्राचीन ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करके यह मिशन भारत को विश्वगुरु के रूप में वैश्विक मान्यता दिलाने की आकांक्षा को आगे बढ़ाता है।