प्रकाशित: 20 सितंबर 2025PIBटॉपिक
संस्कृति मंत्रालय ने भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया
संस्कृति मंत्रालय ने 50 लाख से अधिक कृतियों वाली भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने, डिजिटल रूप देने और लोगों तक पहुंचाने के लिए ज्ञान भारतम मिशन (GBM) शुरू किया। 'पांडुलिपि विरासत से भारत की ज्ञान विरासत पुनः प्राप्त करना' विषय पर पहला ज्ञान भारतम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 11-13 सितंबर 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें भारत और विदेशों के 1,100+ विद्वानों ने भाग लिया।
GBM की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। यह PM अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 2003 में शुरू किए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM) का पुनरुद्धार और विस्तार है। इसे 2024-31 के लिए ₹482.85 करोड़ के कुल परिव्यय वाली केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में मंजूरी दी गई, जिसमें 2025-26 के लिए ₹60 करोड़ शामिल हैं। डिजिटल पहुंच के लिए ज्ञान पोर्टल लॉन्च किया गया है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत की पांडुलिपि विरासत संरक्षण में ज्ञान भारतम मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित, 2024-31 के लिए 482.85 करोड़ रुपये परिव्यय वाली केंद्रीय क्षेत्र योजना ज्ञान भारतम मिशन पचास लाख से अधिक पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का लक्ष्य रखती है। यह 2003 की राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन का पुनरुद्धार कर प्राचीन ग्रंथों को आधुनिक तकनीक से जोड़ती है और वैश्विक अध्ययन के लिए ज्ञान पोर्टल शुरू करती है।
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राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM), जिसे ज्ञान भारतम मिशन के तहत पुनर्जीवित किया गया है, मूल रूप से किस PM ने शुरू किया था?
व्याख्या · सही उत्तर Cएनएमएम की शुरुआत 2003 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। जीबीएम 2024-31 के लिए ₹482.85 करोड़ के प्रावधान के साथ इसे फिर सक्रिय करता और इसका विस्तार करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया ज्ञान भारतम मिशन क्या है?
**संस्कृति मंत्रालय** ने **ज्ञान भारतम मिशन (GBM)** भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को संरक्षित, डिजिटल और सुलभ बनाने के लिए लॉन्च किया।
भारत की पांडुलिपि विरासत का क्या महत्व है?
**पहला ज्ञान भारतम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 11-13 सितंबर, 2025 को विज्ञान भवन में आयोजित हुआ**। भारत में 50 लाख से अधिक पांडुलिपियों का विश्व का सबसे बड़ा संग्रह है।
ज्ञान भारतम मिशन भारत की पांडुलिपियों को कैसे डिजिटल करेगा?
**ज्ञान भारतम मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई; यह राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन को फिर से शुरू कर उसका विस्तार करता है**। उन्नत स्कैनिंग, AI-आधारित सूचीकरण और ऑनलाइन पोर्टल पांडुलिपियों को वैश्विक शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाएंगे।
ज्ञान भारतम के तहत संरक्षित भारत के पांडुलिपि संग्रह में कौन सी भाषाएँ शामिल हैं?
**इसे 2024-31 के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में मंजूरी दी गई है, जिसका कुल परिव्यय ₹482.85 करोड़ है, जिसमें ₹60 शामिल हैं**। संस्कृत, पाली, अरबी, फारसी, तमिल, मलयालम और दर्जनों अन्य भारतीय भाषाएँ शामिल हैं।
ज्ञान भारतम मिशन भारत के विश्वगुरु विज़न को आगे बढ़ाने में कैसे मदद करता है?
**ज्ञान संसाधनों तक डिजिटल पहुँच के लिए ज्ञान पोर्टल शुरू किया गया, जो आधुनिक तकनीक को** प्राचीन ज्ञान प्रणालियों के साथ जोड़ता है। इन प्रणालियों को संरक्षित करके यह मिशन भारत को विश्वगुरु के रूप में वैश्विक मान्यता दिलाने की आकांक्षा को आगे बढ़ाता है।