7-8 सितंबर 2025 की रात भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई दिया। यह 2022 के बाद सबसे लंबा चंद्र ग्रहण था और 27 जुलाई 2018 के बाद पहली बार देश के हर हिस्से से पूरा दिखाई दिया। ग्रहण का पूर्ण चरण 7 सितंबर को भारतीय मानक समयानुसार रात 11:01 बजे शुरू हुआ और 82 मिनट बाद 8 सितंबर को रात 12:23 बजे समाप्त हुआ। ग्रहण का चरम रात 11:41:46 बजे था, जबकि पूरा ग्रहण सुबह 2:25 बजे समाप्त हुआ। पृथ्वी की छाया पड़ने से चंद्रमा लाल दिखाई दिया; इस घटना को 'ब्लड मून' कहा जाता है। यह ग्रहण पितृ पक्ष की शुरुआत के समय पड़ा, जो हिंदू पंचांग में पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का महत्वपूर्ण काल है। सूर्य ग्रहण के विपरीत, इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की ज़रूरत नहीं थी। यह ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व और यूरोप तथा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई दिया।
7 सितंबर को पूरे भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण: 2018 के बाद पहली बार देशभर से पूरा दिखा
7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण (ब्लड मून) पूरे भारत में दिखा; पूर्णता 82 मिनट रही और 2018 के बाद पहली बार पूरा ग्रहण देशभर से दिखाई दिया।
मुख्य तथ्य
- 7-8 सितंबर 2025 को पूरे भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई दिया — यह 2022 के बाद सबसे लंबा था और 27 जुलाई 2018 के बाद पहली बार भारत के हर हिस्से से पूरा दिखाई दिया।
- ग्रहण का पूर्ण चरण भारतीय मानक समयानुसार रात 11:01 बजे शुरू हुआ और 82 मिनट बाद रात 12:23 बजे समाप्त हुआ; ग्रहण का चरम रात 11:41:46 बजे था, जबकि पूरा ग्रहण सुबह 2:25 बजे समाप्त हुआ।
- पृथ्वी की छाया पड़ने से चंद्रमा लाल दिखाई दिया; इस घटना को ब्लड मून कहा जाता है।
- ग्रहण हिंदू पंचांग में पितृ पक्ष की शुरुआत के समय पड़ा।
- सूर्य ग्रहण के विपरीत, इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की ज़रूरत नहीं थी।
- यह एशिया, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व और यूरोप तथा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई दिया।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: सितंबर 2025 में भारत में दिखे पूर्ण चंद्र ग्रहण के खगोलीय महत्व पर चर्चा कीजिए तथा ऐसे ग्रहण क्यों होते हैं, समझाइए।
उत्तर:
7-8 सितंबर 2025 की रात भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई दिया। यह 27 जुलाई 2018 के बाद पहली बार देशभर से पूरा देखा गया। ग्रहण का पूर्ण चरण भारतीय मानक समयानुसार रात 11:01 बजे शुरू हुआ और 82 मिनट बाद रात 12:23 बजे समाप्त हुआ; ग्रहण का चरम रात 11:41:46 बजे था और पूरा ग्रहण सुबह 2:25 बजे समाप्त हुआ। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर चंद्रमा को अपनी प्रच्छाया में ले लेती है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है। यह घटना पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ हुई।
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स्रोत: India TV News
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
7 सितंबर 2025 का पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में कब दिखा और यह महत्वपूर्ण क्यों है?
**7 सितंबर 2025 का पूर्ण चंद्र ग्रहण** पूरे भारत में पूरा दिखाई दिया — **2018 के बाद देशभर से पूरा दिखने वाला पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण**। पूर्णता के दौरान पृथ्वी के वायुमंडल ने नीले प्रकाश को बिखेर दिया और लाल प्रकाश को चंद्रमा तक पहुँचने दिया, इसलिए चंद्रमा लाल दिखाई दिया।
पूर्ण चंद्र ग्रहण क्या है और चंद्रमा लाल क्यों दिखता है?
**पूर्ण चंद्र ग्रहण** तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की **प्रच्छाया** में प्रवेश करता है। पृथ्वी का वायुमंडल नीले प्रकाश को बिखेर देता है और लाल तरंगदैर्ध्य को चंद्रमा तक पहुँचने देता है, इसलिए चंद्रमा **लाल दिखाई देता है; इसे ब्लड मून कहा जाता है**।
पूर्ण, आंशिक और उपच्छाया चंद्र ग्रहण में क्या अंतर है?
**पूर्ण चंद्र ग्रहण** में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की प्रच्छाया में होता है और पूरा लाल दिखाई देता है। **आंशिक चंद्र ग्रहण** में चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा प्रच्छाया में आता है और काला पड़ जाता है। **उपच्छाया चंद्र ग्रहण** में चंद्रमा पृथ्वी की उपच्छाया से गुज़रता है, इसलिए उसमें बहुत हल्की धुंधलाहट दिखती है। पूर्ण चंद्र ग्रहण का दृश्य सबसे प्रभावशाली होता है।
चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण से कैसे अलग है?
**चंद्र ग्रहण** के समय पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच होती है और चंद्रमा पृथ्वी की छाया में आ जाता है। जहाँ चंद्रमा क्षितिज से ऊपर होता है, वहाँ पृथ्वी के बड़े हिस्से से इसे देखा जा सकता है। **सूर्य ग्रहण** के समय चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच होता है और उसकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है; यह केवल एक संकरे क्षेत्र से दिखाई देता है। इसलिए किसी एक स्थान से सूर्य ग्रहण देख पाना अधिक दुर्लभ है।
चंद्र ग्रहण देखने का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
चंद्र ग्रहण के दौरान वायुमंडल से अपवर्तित लाल प्रकाश का विश्लेषण करके वैज्ञानिक **पृथ्वी के वायुमंडल की संरचना** का अध्ययन करते हैं। पुराने समय की **समय-गणना और कैलेंडर प्रणालियों** में भी इनका ऐतिहासिक महत्व रहा है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा के तापमान में होने वाले बदलावों का अध्ययन **ISRO और अन्य खगोलीय शोध** में भी किया जाता है।
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