मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 168 राज्यपाल को राज्य विधानमंडल का हिस्सा बनाता है, लेकिन सदन का सदस्य नहीं।
  • अनुच्छेद 169 विशेष विधान सभा संकल्प के बाद संसद को विधान परिषद बनाने या खत्म करने देता है।
  • अनुच्छेद 200 खास मामलों में अनिवार्य आरक्षण के ज़रिए राज्य कानून-निर्माण को उच्च न्यायालय की सुरक्षा से जोड़ता है।
  • अनुच्छेद 226 अनुच्छेद 32 से विषय की दृष्टि से व्यापक है, क्योंकि यह मूल अधिकार और अन्य कानूनी अधिकार दोनों समेटता है।
  • एल. चंद्र कुमार, 1997, अनुच्छेद 226 और 227 के तहत उच्च न्यायालय की न्यायिक समीक्षा को आधारभूत ढांचे का हिस्सा मानता है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    अनुच्छेद 168 राज्यपाल को राज्य विधानमंडल का हिस्सा बनाता है, लेकिन सदन का सदस्य नहीं।

  2. 2

    अनुच्छेद 169 विशेष विधान सभा संकल्प के बाद संसद को विधान परिषद बनाने या खत्म करने देता है।

  3. 3

    राज्य विधान परिषद साधारण विधेयक पर देरी कर सकती है, पर संयुक्त बैठक या धन विधेयक पर अंतिम रोक नहीं।

  4. 4

    अनुच्छेद 200 खास मामलों में अनिवार्य आरक्षण के ज़रिए राज्य कानून-निर्माण को उच्च न्यायालय की सुरक्षा से जोड़ता है।

  5. 5

    अनुच्छेद 226 अनुच्छेद 32 से विषय की दृष्टि से व्यापक है, क्योंकि यह मूल अधिकार और अन्य कानूनी अधिकार दोनों समेटता है।

  6. 6

    एल. चंद्र कुमार, 1997, अनुच्छेद 226 और 227 के तहत उच्च न्यायालय की न्यायिक समीक्षा को आधारभूत ढांचे का हिस्सा मानता है।

  7. 7

    उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अनुच्छेद 217 के तहत नियुक्त होते हैं और 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहते हैं।

  8. 8

    किहोटो होलोहन, 1992, दसवीं अनुसूची में अध्यक्ष के निर्णय के बाद न्यायिक समीक्षा की अनुमति देता है।

संवैधानिक ढांचा और दोनों संस्थाओं को साथ पढ़ने की वजह

  • मुख्य जगह: राज्य विधानमंडल भाग 6 के अध्याय 3 में, मुख्यतः अनुच्छेद 168-212 में है; उच्च न्यायालय भाग 6 के अध्याय 5 में, अनुच्छेद 214-231 में है। दोनों को साथ पढ़ना ज़रूरी है, क्योंकि राज्य में कानून बनना और उसी कानून की संवैधानिक जांच एक-दूसरे से जुड़ी प्रक्रिया है।
  • परिभाषा: राज्य विधानमंडल केवल चुनी हुई विधान सभा नहीं है। अनुच्छेद 168 के अनुसार इसमें राज्यपाल और, जहां द्विसदन व्यवस्था है, विधान परिषद भी आती है। उच्च न्यायालय अनुच्छेद 214 और 215 के तहत राज्य का अभिलेख न्यायालय है, जिसके पास रिट, अपील, अधीक्षण और प्रशासनिक नियंत्रण की भूमिका होती है।
  • UPSC के लिहाज़ से: सवाल अक्सर सीधे अनुच्छेद-नंबर को प्रक्रिया की किसी बारीक शर्त से जोड़ देते हैं। जैसे अनुच्छेद 169 में परिषद बनाना या खत्म करना, अनुच्छेद 200 में राज्यपाल की स्वीकृति, अनुच्छेद 201 में राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षण, अनुच्छेद 226 में रिट और अनुच्छेद 227 में अधीक्षण।
  • संघीय ढांचा: राज्य विधानमंडल मुख्य रूप से राज्य सूची के विषयों पर और संवैधानिक सीमाओं के भीतर समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाता है। उच्च न्यायालय कार्यपालिका और कानूनों को संविधान, सामान्य कानून और नैसर्गिक न्याय के आधार पर परखता है।
  • संस्थागत संतुलन: राज्यपाल विधानमंडल का हिस्सा है, पर सदन नहीं है; उच्च न्यायालय विधानमंडल के बाहर है, पर कानून बनने के बाद उसकी समीक्षा कर सकता है। अनुच्छेद 212 केवल प्रक्रिया की अनियमितता पर अदालतों की दखल को रोकता है, मूल संवैधानिक दोष पर नहीं।
  • परीक्षा में सावधानी: विधानमंडल और न्यायपालिका को अलग-अलग खानों में मत रखिए। उच्च न्यायालय की शक्तियों को प्रभावित करने वाला विधेयक अनुच्छेद 200 के तहत अनिवार्य आरक्षण पैदा कर सकता है, और दल-बदल पर अध्यक्ष का निर्णय बाद में अनुच्छेद 226 और 227 के तहत न्यायिक समीक्षा में आ सकता है।
  • आज की प्रासंगिकता: लंबित विधेयक, सत्र आहूत करने, अध्यक्ष के निर्णयों और न्यायिक रिक्तियों पर विवादों ने इस विषय को सिर्फ अनुच्छेद-सूची नहीं रहने दिया। मौजूदा बहस भी पुराने संवैधानिक पाठ से पूछी जा सकती है।
  • याद रखने का ढांचा: विधान सभा जनादेश का प्रतिनिधित्व करती है; परिषद, जहां है, पुनर्विचार का मौका देती है; राज्यपाल संवैधानिक जांच की भूमिका निभाता है; उच्च न्यायालय वैधता की रक्षा करता है। इसलिए टकराव के बिंदु पहले से दिख जाते हैं: स्वीकृति, विशेषाधिकार, अयोग्यता, न्यायिक नियुक्ति और रिट नियंत्रण।

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संभावित प्रश्न

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1MCQराज्यों में विधान परिषदों के बारे में निम्न कथनों पर विचार करें: 1. संसद संबंधित विधान सभा के विशेष संकल्प के बाद ही परिषद बना या खत्म कर सकती है। 2. परिषद धन विधेयक अस्वीकार करके संयुक्त बैठक करा सकती है। 3. परिषद के एक-तिहाई सदस्य हर 2 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 1 और 3सही
  3. Cकेवल 2 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 अनुच्छेद 169 से सही है और कथन 3 परिषद के स्थायी स्वरूप को दिखाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि राज्य में संयुक्त बैठक नहीं होती और धन विधेयक पर परिषद की भूमिका केवल सिफारिशी है।

~50 शब्द · 1 अंक