मुख्य तथ्य

  • मूल कर्तव्य भाग IVA, अनुच्छेद 51A में हैं और हर व्यक्ति नहीं, नागरिकों को संबोधित करते हैं।
  • 42वें संशोधन, 1976 ने 10 कर्तव्य जोड़े; 86वें संशोधन, 2002 ने बाल-शिक्षा कर्तव्य जोड़ा।
  • अनुच्छेद 51A अनुच्छेद 32 से सीधे प्रवर्तनीय नहीं, पर न्यायालय इसे व्याख्या में सहारा मानते हैं।
  • खंड (g) पर्यावरण कर्तव्य को अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 21 की पर्यावरणीय व्याख्या से जोड़ता है।
  • खंड (k) 6 से 14 वर्ष के बच्चों के अनुच्छेद 21A अधिकार का नागरिक पक्ष है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    मूल कर्तव्य भाग IVA, अनुच्छेद 51A में हैं और हर व्यक्ति नहीं, नागरिकों को संबोधित करते हैं।

  2. 2

    42वें संशोधन, 1976 ने 10 कर्तव्य जोड़े; 86वें संशोधन, 2002 ने बाल-शिक्षा कर्तव्य जोड़ा।

  3. 3

    अनुच्छेद 51A अनुच्छेद 32 से सीधे प्रवर्तनीय नहीं, पर न्यायालय इसे व्याख्या में सहारा मानते हैं।

  4. 4

    खंड (g) पर्यावरण कर्तव्य को अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 21 की पर्यावरणीय व्याख्या से जोड़ता है।

  5. 5

    खंड (k) 6 से 14 वर्ष के बच्चों के अनुच्छेद 21A अधिकार का नागरिक पक्ष है।

  6. 6

    स्वर्ण सिंह समिति जोड़ने से जुड़ी है; न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा समिति अमल से जुड़ी है।

  7. 7

    मतदान और कर-भुगतान पर बहस है, पर वे मौजूदा अनुच्छेद 51A खंड नहीं हैं।

  8. 8

    कर्तव्य वैध कानून और उचित प्रतिबंध को सहारा दे सकते हैं, पर अपने-आप मूल अधिकारों पर भारी नहीं पड़ते।

अर्थ, संवैधानिक स्थान और परीक्षा का ढांचा

मूल कर्तव्य संवैधानिक लोकतंत्र में नागरिक से अपेक्षित जिम्मेदार व्यवहार बताते हैं। ये मूल अधिकारों की जगह नहीं लेते; बल्कि यह बताते हैं कि अधिकारों के साथ नागरिक जीवन में कौन-सी संवैधानिक मर्यादाएं निभाई जानी चाहिए।

  • संवैधानिक स्थान: मूल कर्तव्य संविधान के भाग IVA में हैं और पूरा प्रावधान अनुच्छेद 51A में दिया गया है।
  • किस पर लागू: शुरुआती शब्द हैं कि यह भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा। इसलिए यह प्रावधान नागरिकों के लिए है; विदेशी व्यक्ति, कंपनी या स्वयं राज्य इसके दायरे में सीधे नहीं आते।
  • कुल संख्या: अभी 11 कर्तव्य हैं, जिन्हें खंड (a) से (k) तक रखा गया है। पहले 10 कर्तव्य 42वें संशोधन से आए और खंड (k) बाद में जोड़ा गया।
  • कर्तव्य का स्वभाव: ये मुख्यतः नैतिक और नागरिक जिम्मेदारियां हैं। इन्हें अनुच्छेद 32 के तहत मूल अधिकारों की तरह सीधे रिट से लागू नहीं कराया जा सकता।
  • UPSC के लिहाज़ से: परीक्षा अक्सर तीन बातें घुमाकर पूछती है: सही अनुच्छेद, नागरिक और व्यक्ति का अंतर, और वाद-योग्यता का सवाल।
  • अधिकार और कर्तव्य: अनुच्छेद 51A को भाग III और भाग IV से जोड़कर पढ़ना चाहिए। इसका इस्तेमाल मूल अधिकारों को कमज़ोर करने के लिए नहीं किया जा सकता।
  • विषय-विस्तार: संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान, स्वतंत्रता-संग्राम के आदर्श, संप्रभुता, देश-रक्षा, सद्भाव, महिलाओं की गरिमा, मिली-जुली संस्कृति, पर्यावरण, वैज्ञानिक दृष्टि, सार्वजनिक संपत्ति, उत्कृष्टता और बच्चों की शिक्षा इसमें शामिल हैं।
  • अलग अनुसूची नहीं: मूल कर्तव्य किसी अनुसूची में नहीं हैं। वे प्रस्तावना में नहीं, भाग III में नहीं और भाग IV में भी नहीं रखे गए हैं।
  • परीक्षा-सूत्र: अगर कथन कहे कि मूल कर्तव्य अनुच्छेद 32 से सीधे प्रवर्तनीय हैं, तो वह गलत है। अगर कथन कहे कि संसद कुछ कर्तव्यों को सामान्य कानूनों से प्रभाव दे सकती है, तो वह सही हो सकता है।
  • मुख्य समझ: इनकी भूमिका नागरिक आचरण के लिए मार्गदर्शक और न्यायालयों के लिए व्याख्यात्मक है; वास्तविक दंडात्मक बल तभी आता है जब कोई अलग वैध कानून या नियम बनाया गया हो।
  • पाठ की सीमा: अनुच्छेद 51A कर्तव्य वाली भाषा से शुरू होता है, अधिकार वाली भाषा से नहीं। यह नहीं कहता कि एक नागरिक दूसरे नागरिक के उल्लंघन पर सीधे न्यायालय जा सकता है; यह चूक परीक्षा में अहम है।
  • संवैधानिक बनावट: संविधान के पाठ में भाग IVA नीति-निदेशक तत्वों के बाद आता है, लेकिन उसका विषय नागरिक का व्यवहार है। इसलिए इसे न राज्य की नीति मानना है, न न्यायिक उपचार वाला अध्याय।
  • अनुच्छेद 51A के बाहर कानूनी आधार: कुछ कर्तव्यों को अलग कानून सहारा देते हैं: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 राष्ट्रीय प्रतीकों की रक्षा करता है; पर्यावरण कानून खंड (g) से जुड़ते हैं; शिक्षा कानून अनुच्छेद 21A और 51A(k) के समूह से जुड़ता है।
  • नागरिकता का भ्रम: प्रवासी नागरिक, नाबालिग और वयस्क नागरिक हो सकते हैं, पर किसी कर्तव्य पर वास्तविक कार्रवाई अलग कानून, कानूनी क्षमता और संबंधित संस्था पर निर्भर करेगी। अनुच्छेद 51A अपने-आप हर व्यावहारिक सवाल हल नहीं करता।
  • अनुसूची संख्या नहीं: मूल कर्तव्यों के लिए कोई अनुसूची याद नहीं करनी है। यदि कथन 'मूल कर्तव्य अनुसूची' कहे, तो उसे संदिग्ध मानें, जब तक वह केवल किसी प्रस्तावित सुधार की बात न कर रहा हो।

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संभावित प्रश्न

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1MCQमूल कर्तव्यों पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. वे संविधान के भाग IVA में हैं। 2. वे अनुच्छेद 32 से सीधे प्रवर्तनीय हैं। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1सही
  2. Bकेवल 2
  3. C1 और 2 दोनों
  4. Dन 1 न 2

व्याख्या

कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 51A मूल अधिकारों की तरह सीधे प्रवर्तनीय नहीं है।

~50 शब्द · 1 अंक