भारतीय चित्रकला: भित्ति, लघु, मुगल, राजपूत और लोक परंपराएं
मुख्य तथ्य
- भारतीय चित्रकला में शैलाश्रय, भित्ति चित्र, पांडुलिपि, दरबारी लघु चित्र, क्षेत्रीय शैलियां और जीवित लोक परंपराएं आती हैं।
- अनुच्छेद 49 और अनुच्छेद 51A(f) धरोहर-सुरक्षा को कला-इतिहास से आगे संवैधानिक आधार देते हैं।
- अजंता मुख्य भित्ति-संपदा है; भीमबेटका प्रागैतिहासिक शैलचित्र का आधार है; एलोरा, बाघ, बादामी और सित्तनवसल मानचित्र बढ़ाते हैं।
- लघु चित्रकला बारीक चल चित्र-रूप है, कोई एक ही धारा नहीं; पाल, जैन, मुगल, राजपूत, पहाड़ी और दक्कनी धाराएं अलग हैं।
- मुगल चित्रकला फारसी प्रशिक्षण, भारतीय कलाकारों, शाही चित्रशाला, प्राकृतिकता, व्यक्तिचित्र और चुने हुए यूरोपीय उपकरणों से परिपक्व हुई।
मुख्य बिंदु
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भारतीय चित्रकला में शैलाश्रय, भित्ति चित्र, पांडुलिपि, दरबारी लघु चित्र, क्षेत्रीय शैलियां और जीवित लोक परंपराएं आती हैं।
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अनुच्छेद 49 और अनुच्छेद 51A(f) धरोहर-सुरक्षा को कला-इतिहास से आगे संवैधानिक आधार देते हैं।
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अजंता मुख्य भित्ति-संपदा है; भीमबेटका प्रागैतिहासिक शैलचित्र का आधार है; एलोरा, बाघ, बादामी और सित्तनवसल मानचित्र बढ़ाते हैं।
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लघु चित्रकला बारीक चल चित्र-रूप है, कोई एक ही धारा नहीं; पाल, जैन, मुगल, राजपूत, पहाड़ी और दक्कनी धाराएं अलग हैं।
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मुगल चित्रकला फारसी प्रशिक्षण, भारतीय कलाकारों, शाही चित्रशाला, प्राकृतिकता, व्यक्तिचित्र और चुने हुए यूरोपीय उपकरणों से परिपक्व हुई।
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राजपूत और पहाड़ी चित्रकला में क्षेत्रीय दरबार, भक्ति विषय, भरे रंग, प्रतीकात्मक स्थान और स्थानीय रूप अधिक मजबूत हैं।
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मधुबनी, वारली, पट्टचित्र, कलमकारी, फड़, पिचवाई, कालीघाट और तंजावुर जैसी लोक परंपराएं अनुष्ठान, बाज़ार और पहचान को मिलाती हैं।
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1958 का स्मारक कानून, 1972 का पुरावशेष कानून, राष्ट्रीय स्मारक और पुरावशेष मिशन, भौगोलिक संकेत और पुरावशेष-वापसी इस विषय का कानूनी-समकालीन पक्ष बनाते हैं।
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ढांचा, दायरा, स्रोत और कानूनी आधार
- मूल परिभाषा: भारतीय चित्रकला में शैलाश्रय, दीवार, कपड़ा, ताड़पत्र, कागज़, लकड़ी के फलक और दूसरे आधारों पर बनी चित्र-परंपराएं आती हैं; UPSC में तकनीक, संरक्षण, विषय, क्षेत्र और शैली साथ पढ़े जाते हैं।
- बड़े समूह: विषय को पांच जुड़े हुए भागों में रखें: प्रागैतिहासिक और शास्त्रीय भित्ति चित्रकला, पांडुलिपि और दरबारी लघु चित्रकला, मुगल चित्रकला, राजपूत और पहाड़ी शैलियां, तथा जीवित लोक और अनुष्ठानिक चित्र-परंपराएं।
- सिलेबस में स्थान: यह भारतीय संस्कृति के कला-रूपों में आता है; साथ ही बौद्ध धर्म, जैन धर्म, भक्ति आंदोलन, मुगल साम्राज्य, क्षेत्रीय राज्यों, औपनिवेशिक संग्रहालयों और आज की धरोहर नीति से जुड़ता है।
- स्रोत आधार: गुफा-भित्तियां, उत्खनित टुकड़े, अभिलेख, यात्रियों के संकेत, चित्रित पांडुलिपियां, बादशाही मुरक्के, दरबारी अभिलेख, संग्रहालय सूची, जीवित कारीगर परंपरा, भौगोलिक संकेत पंजी और संरक्षण रिपोर्ट इस विषय की सामग्री देते हैं।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 49 राज्य को राष्ट्रीय महत्त्व के स्मारकों, स्थलों और वस्तुओं की रक्षा का निर्देश देता है; अनुच्छेद 51A(f) नागरिकों से मिली-जुली संस्कृति को संजोने की अपेक्षा करता है; अनुच्छेद 51A(g) वहां काम आता है जहां धरोहर और पर्यावरण साथ आते हैं।
- सातवीं अनुसूची: संघ सूची की प्रविष्टि 67 उन प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारकों तथा पुरास्थलों से जुड़ी है जिन्हें संसद ने राष्ट्रीय महत्त्व का माना है; समवर्ती सूची की प्रविष्टि 40 बाकी पुरास्थलों से संबंधित है।
- मुख्य कानून: प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 केंद्र-संरक्षित स्मारकों को बचाता है; पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 पुरावशेष, बहुमूल्य कलाकृति, निर्यात, बिक्री और पंजीकरण को नियंत्रित करता है।
- प्रक्रिया का पक्ष: कोई स्थल अधिसूचना, सर्वेक्षण, संरक्षण और नियमन से अधिक मजबूत सुरक्षा में आता है; चल संपत्ति जैसे लघु चित्र, पांडुलिपि या संग्रह-पन्ने संग्रहालय, अभिलेखागार या पुरावशेष नियमों में आ सकते हैं।
- वस्तु का फर्क: संरक्षित गुफा की दीवार पर बना चित्र अचल धरोहर है; लघु चित्र या चित्रित पांडुलिपि चल सांस्कृतिक संपत्ति है; आज बना मधुबनी या वारली चित्र जीवित शिल्प हो सकता है, अपने-आप पुरावशेष नहीं।
- परीक्षा में सावधानी: हर पुरानी चित्रकृति को संरक्षित स्मारक न मानें। सुरक्षा का आधार कानूनी श्रेणी, तारीख, स्वामित्व, अधिसूचना, स्थान और चल-अचल स्वरूप है।
- आज की प्रासंगिकता: हाल की चर्चा डिजिटलीकरण, चोरी गई कलाकृतियों की वापसी, चित्रित गुफाओं में संतुलित पर्यटन, कारीगर आजीविका, कला-बाज़ार में नकली स्रोत और जीवित परंपराओं के बौद्धिक संपदा अधिकार पर केंद्रित है।
- पढ़ने का तरीका: हर शैली पर चार सवाल लगाएं: वह कहां बनी, किसने संरक्षण दिया या इस्तेमाल किया, किस सतह और रंग से बनी, और कौन-सा धार्मिक या सांस्कृतिक संसार दिखाती है।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
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1MCQभारतीय चित्रकला पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. भित्ति चित्र सामान्यतः स्थल-बद्ध होता है, जबकि लघु चित्र आम तौर पर चल वस्तु होता है। 2. भारत में सारी लघु चित्रकला केवल मुगल दरबार के बाद विकसित हुई। 3. लोक चित्र परंपराएं माध्यम बदलने पर भी अपने सभी अनुष्ठानिक संबंध नहीं खोतीं। कौन-से कथन सही हैं?
व्याख्या
कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि पाल और जैन पांडुलिपि परंपराएं मुगल दरबारी चित्रकला से पहले की हैं। कथन 3 सही है क्योंकि मधुबनी या पट्टचित्र जैसी परंपराओं ने कागज़ और बाज़ार अपनाए, फिर भी अनुष्ठानिक स्मृति बची रही।
~50 शब्द · 1 अंक
