साहित्य, भाषाएं और शास्त्रीय ग्रंथ
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 29-30 सांस्कृतिक और भाषाई पहचान की रक्षा करते हैं; अनुच्छेद 343-351 राजभाषा प्रश्नों का ढांचा देते हैं।
- आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं हैं; शास्त्रीय भाषा का दर्जा अलग प्रशासनिक मान्यता है।
- 3 अक्टूबर 2024 के मंत्रिमंडल निर्णय के बाद भारत में 11 शास्त्रीय भाषाएं हैं।
मुख्य बिंदु
- 1
लिपि, भाषा और साहित्य अलग परीक्षा-श्रेणियां हैं; एक देखकर दूसरा अपने-आप न मानें।
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अनुच्छेद 29-30 सांस्कृतिक और भाषाई पहचान की रक्षा करते हैं; अनुच्छेद 343-351 राजभाषा प्रश्नों का ढांचा देते हैं।
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आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं हैं; शास्त्रीय भाषा का दर्जा अलग प्रशासनिक मान्यता है।
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3 अक्टूबर 2024 के मंत्रिमंडल निर्णय के बाद भारत में 11 शास्त्रीय भाषाएं हैं।
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वैदिक, बौद्ध, जैन, संगम और पुराण ग्रंथ स्रोत हैं, पर हर विधा की अपनी सीमा है।
- 6
संस्कृत, प्राकृत, पाली, तमिल, फारसी और जनभाषाएं अक्सर साथ-साथ रहीं, केवल एक-दूसरे की जगह नहीं आईं।
- 7
भक्ति और सूफी साहित्य ने गीत, धार्मिक स्थल, प्रदर्शन और क्षेत्रीय भाषाओं से विचार फैलाए।
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आधुनिक मुद्रित साहित्य ने सामाजिक सुधार, भाषा-राजनीति और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को आकार दिया।
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दायरा, स्रोत और परीक्षा-दृष्टि
यह विषय केवल प्रसिद्ध किताबों की सूची नहीं है। UPSC इसे भाषा-परिवार, लिपि, ग्रंथ-परंपरा, संरक्षण, धर्म, कानून, शिक्षा और विरासत-संरक्षण को जोड़कर पूछता है।
- साहित्य का दायरा: वैदिक मंत्र, महाकाव्य, बौद्ध और जैन ग्रंथ, संगम काव्य, संस्कृत दरबारी साहित्य, तमिल भक्ति पद, फारसी इतिहास-ग्रंथ, क्षेत्रीय भक्ति कविता, औपनिवेशिक दौर का मुद्रित साहित्य और राष्ट्रीय आंदोलन का लेखन, सब इस दायरे में आते हैं।
- भाषा-इतिहास का दायरा: भाषा-परिवार, लिपि, मौखिक परंपरा, अभिलेखीय साक्ष्य, पांडुलिपि-संस्कृति, दरबारी भाषा, धार्मिक भाषा, जनभाषाओं का उभार और आधुनिक संवैधानिक मान्यता अलग-अलग बातों के रूप में समझनी चाहिए।
- मुख्य स्रोत-आधार: NCERT के प्राचीन, मध्यकालीन और संस्कृति अध्याय कालक्रम देते हैं; मानक संस्कृति पुस्तकों से ग्रंथ-सूचियां मिलती हैं; सरकारी स्रोत संवैधानिक और शास्त्रीय भाषा से जुड़े तथ्य तय करते हैं।
- UPSC की सामान्य उलझन: लिपि और भाषा एक नहीं हैं। ब्राह्मी, खरोष्ठी, ग्रंथ, शारदा, मोडी और फारसी-अरबी लेखन-रूप लिपियां या लेखन-परंपराएं हैं; संस्कृत, पाली, प्राकृत, तमिल, फारसी, उर्दू और बांग्ला भाषाएं या भाषा-परंपराएं हैं।
- दूसरी उलझन: धार्मिक ग्रंथ ऐतिहासिक स्रोत भी हैं, पर वे तटस्थ इतिहास-वृत्तांत नहीं होते। ऋग्वेद, त्रिपिटक, आगम, पुराण और संत-चरित अपनी शैली की सीमाओं के भीतर समाज, अनुष्ठान, अर्थव्यवस्था और संरक्षण की जानकारी देते हैं।
- संवैधानिक जुड़ाव: अनुच्छेद 29 और 30 सांस्कृतिक और भाषाई पहचान की रक्षा करते हैं; अनुच्छेद 343-351 तथा आठवीं अनुसूची राजभाषा और अनुसूचित भाषाओं से जुड़े प्रश्नों का आधार हैं।
- सांस्कृतिक नीति का जुड़ाव: शास्त्रीय भाषा का दर्जा, साहित्य अकादमी की मान्यता, पांडुलिपि सर्वेक्षण और डिजिटाइजेशन प्रशासनिक उपाय हैं; इनसे यह सिद्ध नहीं होता कि विरासत केवल इन्हीं भाषाओं में है।
- प्रारंभिक परीक्षा की विधि: हर ग्रंथ के लिए चार बातें तय करें: भाषा, काल, विधा और परंपरा। उदाहरण: सिलप्पदिकारम तमिल में है, आरंभिक शास्त्रीय या उत्तर-संगम परिवेश से जुड़ा है, महाकाव्य है और जैन तथा तमिल साहित्यिक संस्कृति से संबंध रखता है।
- कला-संस्कृति से संबंध: साहित्य धार्मिक आंदोलनों, मंदिर संरक्षण, संगीत, नृत्य, स्थापत्य और चित्रकला को समझने में मदद देता है; जैसे तेवरम् पद दक्षिण भारत में शैव भक्ति और मंदिर-केंद्रित उपासना को जोड़ते हैं।
- राष्ट्रीय आंदोलन से संबंध: आधुनिक जनभाषा के अखबार, पुस्तिकाएं, उपन्यास, देशभक्ति गीत और भाषा-सभाएं राजनीतिक विचारों को अंग्रेजी-शिक्षित वर्ग से बाहर ले गईं।
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स्टडी पैक खोलेंसंभावितसंभावित प्रश्न
अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।
1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अनुच्छेद 29(1) केवल अल्पसंख्यकों को उपलब्ध है। 2. अनुच्छेद 30(1) शिक्षण संस्थानों के मामले में धार्मिक और भाषाई दोनों अल्पसंख्यकों की रक्षा करता है। 3. आठवीं अनुसूची का संबंध अनुच्छेद 344(1) और 351 से है। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
व्याख्या
अनुच्छेद 29(1) अलग भाषा, लिपि या संस्कृति वाले नागरिकों के किसी भी वर्ग की रक्षा करता है, केवल अल्पसंख्यकों की नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं।
~50 शब्द · 1 अंक
