मुख्य तथ्य

  • भारत लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य अपनाता है: अप्रैल 2026-मार्च 2031 के लिए 4 प्रतिशत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक लक्ष्य और 2-6 प्रतिशत सीमा।
  • धारा 45-जेडए मुद्रास्फीति लक्ष्य से, धारा 45-जेडबी मौद्रिक नीति समिति गठन से और धारा 45-जेडएल समिति कार्यवृत्त से जुड़ी है।
  • नकद आरक्षित अनुपात RBI के पास नकद शेष है; वैधानिक चलनिधि अनुपात बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 24 के तहत निर्धारित तरल परिसंपत्ति धारण है।
  • मौद्रिक नीति समिति में 6 सदस्य होते हैं: 3 RBI पक्ष से और 3 केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    भारत लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य अपनाता है: अप्रैल 2026-मार्च 2031 के लिए 4 प्रतिशत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक लक्ष्य और 2-6 प्रतिशत सीमा।

  2. 2

    धारा 45-जेडए मुद्रास्फीति लक्ष्य से, धारा 45-जेडबी मौद्रिक नीति समिति गठन से और धारा 45-जेडएल समिति कार्यवृत्त से जुड़ी है।

  3. 3

    नीति रेपो दर मुख्य परिचालन संकेत है; नकद आरक्षित अनुपात, वैधानिक चलनिधि अनुपात और खुले बाज़ार की कार्रवाइयां अलग रास्तों से चलनिधि बदलती हैं।

  4. 4

    नकद आरक्षित अनुपात RBI के पास नकद शेष है; वैधानिक चलनिधि अनुपात बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 24 के तहत निर्धारित तरल परिसंपत्ति धारण है।

  5. 5

    खुले बाज़ार में खरीद टिकाऊ चलनिधि जोड़ती और प्रतिफल नरम कर सकती है; बिक्री चलनिधि सोखती और प्रतिफल ऊपर ले जा सकती है।

  6. 6

    मौद्रिक नीति समिति में 6 सदस्य होते हैं: 3 RBI पक्ष से और 3 केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त।

  7. 7

    भारत के मौजूदा ढांचे में कानूनी मुद्रास्फीति लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक है, थोक मूल्य सूचकांक नहीं।

  8. 8

    मौद्रिक नीति का असर दर, ऋण, अपेक्षा, विनिमय दर और परिसंपत्ति कीमतों के रास्ते समय लेकर पहुंचता है।

मुद्रा, केंद्रीय बैंक और प्रीलिम्स का मानचित्र

UPSC में मुद्रा के सवाल केवल परिभाषा नहीं पूछते। सवाल यह जांचता है कि अभ्यर्थी मुद्रा, बैंक जमा, RBI के तुलन-पत्र से जुड़ी कार्रवाइयों, मुद्रास्फीति लक्ष्य और ऋण तक नीति पहुंचने की प्रक्रिया को जोड़ पा रहा है या नहीं।

  • मुद्रा का मूल काम: मुद्रा विनिमय का माध्यम, लेखे की इकाई, मूल्य-संग्रह और आगे के भुगतान का मानक है। आम गलती यह है कि हर वित्तीय परिसंपत्ति को मुद्रा मान लिया जाए; चलनिधि अहम है, पर सामान्य स्वीकार्यता और भुगतान में उपयोग उससे भी ज़्यादा अहम हैं।
  • नकदी और मुद्रा आपूर्ति अलग हैं: जनता के पास मौजूद नकदी केवल एक हिस्सा है। व्यापक मुद्रा में बैंक जमा भी आते हैं, जिन्हें बैंकिंग तंत्र बनाता है। इसलिए RBI नकदी जारी करने, आरक्षित अनुपात, चलनिधि कार्रवाइयों और ब्याज-दर संकेत से मुद्रा को प्रभावित करता है।
  • आधुनिक मुद्रा का स्वरूप: भारत की मौजूदा मुद्रा वस्तु-मुद्रा नहीं है। उसका भरोसा कानूनी मुद्रा के दर्जे, सरकार और RBI पर विश्वास, भुगतान तंत्र और नकदी प्रबंधन पर टिकता है।
  • RBI का कानूनी आधार: RBI ने 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत काम शुरू किया। 1 जनवरी 1949 से इसका राष्ट्रीयकरण हुआ, पर आज मौद्रिक नीति केवल गवर्नर की निजी पसंद नहीं है।
  • केंद्रीय बैंक के काम: RBI मौद्रिक प्राधिकारी, बैंक नोट जारी करने वाली संस्था, सरकार का बैंक, बैंकों का बैंक, विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधक, बैंक और भुगतान तंत्र का नियामक तथा अंतिम सहारा ऋणदाता है।
  • प्रीलिम्स में पढ़ने का तरीका: साधनों को अलग-अलग रटना काफी नहीं। तीन सवाल पूछें: यह साधन अल्पकालिक धन की कीमत बदलता है, बैंकों के आरक्षित धन की मात्रा बदलता है, या बैंकों की अनिवार्य परिसंपत्ति-धारण बदलता है?
  • रेपो दर मुख्य संकेत है: नीति रेपो दर वह दर है जिसे मौद्रिक नीति समिति तय करती है। यही परिचालन गलियारे का आधार बनती है और कॉल मनी, राजकोषीय बिल, बैंकों के धन जुटाने तथा कर्ज दरों पर असर डालती है।
  • नकद आरक्षित अनुपात और वैधानिक चलनिधि अनुपात वैधानिक आरक्षित आवश्यकताएं हैं: नकद आरक्षित अनुपात RBI के पास नकद शेष के रूप में रखा जाता है; वैधानिक चलनिधि अनुपात बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की व्यवस्था में तरल परिसंपत्तियों के रूप में रखा जाता है। दोनों बैंक को सीमित करते हैं, पर दोनों का तरीका अलग है।
  • खुले बाज़ार की कार्रवाइयां तुलन-पत्र से जुड़ी हैं: RBI सरकारी प्रतिभूतियां खरीदता या बेचता है, जिससे टिकाऊ चलनिधि बदलती है। यह अल्पकालिक रेपो से अलग है, भले ही दोनों में सरकारी प्रतिभूतियों की भूमिका हो।
  • विकास से संबंध: पाठ्यक्रम आर्थिक और सामाजिक विकास की बात करता है। मौद्रिक नीति इसलिए अहम है क्योंकि मुद्रास्फीति गरीब परिवारों को ज़्यादा चोट पहुंचाती है, ऊंची ब्याज दर निवेश को प्रभावित करती है, और वित्तीय समावेशन से नीति का असर कर्जदारों तक तेज़ पहुंचता है।
  • मौजूदा ढांचा: भारत लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्य को अपनाता है। लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत रखना है, जिसमें 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत की सहन-सीमा है; यह 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखा गया है।
  • UPSC की आम गलती: RBI चलनिधि और ब्याज दरों को प्रभावित कर सकता है, पर वह सीधे खाद्य आपूर्ति नहीं बढ़ा सकता, तेल कीमत तय नहीं कर सकता, राजकोषीय दबाव हटा नहीं सकता और हर बैंक से तुरंत दर घटवा नहीं सकता। मौद्रिक नीति मजबूत साधन है, सर्वशक्तिमान साधन नहीं।
  • विश्लेषण का तरीका: जब प्रश्न मुद्रास्फीति, विनिमय दर, ऋणपत्र प्रतिफल, ऋण वृद्धि या बैंक लाभ की बात करे, तो पहले कारण पहचानें: मांग, आपूर्ति, चलनिधि, नियमन या राजकोषीय पक्ष। सही उत्तर अक्सर इसी पहचान पर निर्भर होता है।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQनिम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. RBI अधिनियम की धारा 45-जेडए मुद्रास्फीति लक्ष्य की अधिसूचना से जुड़ी है। 2. धारा 45-जेडबी मौद्रिक नीति समिति के गठन से जुड़ी है। 3. धारा 45-जेडएल समिति कार्यवृत्त के प्रकाशन की मांग करती है। ऊपर दिए गए कथनों में कौन-से सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2
  2. Bकेवल 2 और 3
  3. Cकेवल 1 और 3
  4. D1, 2 और 3सही

व्याख्या

तीनों मिलान सही हैं: 45-जेडए लक्ष्य, 45-जेडबी समिति गठन और 45-जेडएल कार्यवृत्त से जुड़ी है।

~50 शब्द · 1 अंक