उद्योग: नीतियां, MSME और औद्योगिक वृद्धि
मुख्य तथ्य
- औद्योगिक नीति संघ, राज्य और समवर्ती क्षेत्रों में फैली है; प्रविष्टि 52 राज्य की भूमिका खत्म नहीं करती।
- 01.04.2025 से MSME वर्गीकरण निवेश और कारोबार के संयुक्त मानदंड पर है।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम में 45 दिन, चक्रवृद्धि ब्याज और सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद प्रीलिम्स के अहम जाल हैं।
मुख्य बिंदु
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औद्योगिक नीति संघ, राज्य और समवर्ती क्षेत्रों में फैली है; प्रविष्टि 52 राज्य की भूमिका खत्म नहीं करती।
- 2
01.04.2025 से MSME वर्गीकरण निवेश और कारोबार के संयुक्त मानदंड पर है।
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उद्यम पंजीकरण प्रवेश-द्वार है, हर योजना-लाभ का अपने-आप अधिकार नहीं।
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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम में 45 दिन, चक्रवृद्धि ब्याज और सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद प्रीलिम्स के अहम जाल हैं।
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औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण और विनिर्माण सकल मूल्य वर्धन अलग-अलग औद्योगिक दायरे मापते हैं।
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उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन चुने हुए क्षेत्रों में अतिरिक्त उत्पादन या बिक्री को प्रोत्साहन देता है; यह सार्वभौमिक MSME सब्सिडी नहीं।
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औद्योगिक वृद्धि को रोज़गार, उत्पादकता, क्षेत्रीय संतुलन और सततता के साथ पढ़ना चाहिए।
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अवैधता, मनमानी या संवैधानिक उल्लंघन न हो तो अदालतें आर्थिक नीति में सामान्यतः संयम रखती हैं।
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उद्योग का दायरा और संवैधानिक आधार
UPSC अर्थव्यवस्था में उद्योग सिर्फ़ कारखानों की सूची नहीं है; यह वह उत्पादन-तंत्र है जिसमें पूंजी, श्रम, तकनीक, कच्चा माल और उद्यम मिलकर वस्तुएं तथा उनसे जुड़ी सेवाएं बनाते हैं।
- मुख्य अर्थ: उद्योग में विनिर्माण, खनन, निर्माण से जुड़ा उत्पादन, बिजली-जैसी उपयोगी सेवाएं, औद्योगिक सेवाएं, मरम्मत-तंत्र, विक्रेता तंत्र और निर्यात-उन्मुख उत्पादन शृंखलाएं शामिल होती हैं। राष्ट्रीय आय लेखांकन में विनिर्माण अलग क्षेत्र है; नीति में उद्योग के साथ अवसंरचना, ऋण, कौशल, तकनीक और व्यापार नियम भी संबंधित हैं।
- प्रीलिम्स सीमा: इस विषय को तीन पहलुओं से पढ़ें: औद्योगिक नीति, MSME विकास और औद्योगिक वृद्धि के संकेतक। सवाल आम तौर पर वर्गीकरण, संस्थागत ढांचा, कानूनी अधिकार, नीति-उपकरण और उत्पादन-वृद्धि बनाम उत्पादकता-वृद्धि का फर्क जांचते हैं।
- संवैधानिक आधार: सातवीं अनुसूची उद्योग शासन को केंद्र और राज्यों के बीच बांटती है। संघ सूची की प्रविष्टि 52 संसद को उन उद्योगों पर नियंत्रण देती है जिन्हें कानून द्वारा लोकहित में ज़रूरी घोषित किया गया हो। उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम, 1951 इसी आधार का प्रमुख कानून है।
- राज्य का क्षेत्र: राज्य सूची की प्रविष्टि 24 उद्योगों से जुड़ी है, पर यह संघ सूची की प्रविष्टि 7 और 52 के अधीन है। प्रविष्टि 26 राज्य के भीतर व्यापार-वाणिज्य से जुड़ी है, पर समवर्ती सूची की प्रविष्टि 33 से सीमित हो सकती है। इसलिए भूमि, स्थानीय अनुमति, बिजली-पानी और कारखाना प्रशासन में राज्यों की भूमिका बड़ी रहती है।
- समवर्ती जुड़ाव: समवर्ती सूची की प्रविष्टि 22 मजदूर संघ और औद्योगिक विवादों से संबंधित है; प्रविष्टि 23 और 24 सामाजिक सुरक्षा तथा श्रमिक कल्याण से संबंधित हैं। पर्यावरण, बिजली, कौशल और कराधान भी उद्योग पर असर डालते हैं।
- अधिकार पक्ष: अनुच्छेद 19(1)(g) कोई भी व्यवसाय, व्यापार या पेशा करने की स्वतंत्रता देता है, पर अनुच्छेद 19(6) उचित प्रतिबंध और राज्य एकाधिकार की अनुमति देता है। पूर्व अनुमति, प्रोत्साहन या सरकारी खरीद में मनमानी हो तो अनुच्छेद 14 अहम हो जाता है।
- नीति-निदेशक तत्व: अनुच्छेद 38, 39, 41, 43 और 43A आजीविका, संसाधनों के न्यायपूर्ण बंटवारे, जीवन-योग्य मजदूरी और कामगार भागीदारी से औद्योगिक नीति को जोड़ते हैं। ये एक तय औद्योगिक मॉडल नहीं बनाते, पर कल्याणकारी विनियमन को आधार देते हैं।
- परीक्षा में सावधानी: उद्योग पूरी तरह संघ विषय नहीं है। संघ का नियंत्रण तभी मजबूत होता है जब संसद प्रविष्टि 52 के तहत घोषणा करे; राज्यों के पास भूमि, कारखाना प्रशासन, स्थानीय अवसंरचना, श्रम सुविधा और कई अनुमतियों की भूमिका बनी रहती है।
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1MCQ01.04.2025 के बाद MSME वर्गीकरण पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. सूक्ष्म उद्यम में निवेश ₹2.5 करोड़ तक और कारोबार ₹10 करोड़ तक हो सकता है। 2. कारोबार सीमा तय करते समय निर्यात कारोबार शामिल किया जाता है। 3. वर्गीकरण में निवेश और कारोबार, दोनों देखे जाते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में कौन-से सही हैं?
व्याख्या
2025 की सीमा के अनुसार सूक्ष्म उद्यम में निवेश ₹2.5 करोड़ तक और कारोबार ₹10 करोड़ तक है, और वर्गीकरण संयुक्त मानदंड पर है। उद्यम व्यवस्था में निर्यात कारोबार को बाहर रखा गया है, इसलिए कथन 2 गलत है।
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