मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 112 वार्षिक वित्तीय विवरण देता है; अनुच्छेद 113-117 अनुदान, विनियोग, अनुपूरक अनुदान और वित्त विधेयक संभालते हैं।
  • FRBM अधिनियम, 2003 पारदर्शिता, मध्यम अवधि विवरण, घाटा लक्ष्य और RBI से सामान्य सीधी उधारी पर रोक का ढांचा देता है।
  • 2018 के FRBM बदलाव में ऋण को मुख्य लक्ष्य बनाया गया: केंद्र और राज्यों का कुल सरकारी ऋण GDP के 60% और केंद्र सरकार का ऋण 40% तक रखने का लक्ष्य।
  • बजट 2026-27 में संघ का राजकोषीय घाटा GDP के 4.3% और राजस्व घाटा 1.5% पर अनुमानित है।
  • राज्य उधारी अनुशासन राज्य के FRBM कानूनों, वित्त आयोग की सिफारिशों और जहां लागू हो वहां अनुच्छेद 293 की अनुमति पर निर्भर करता है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    अनुच्छेद 112 वार्षिक वित्तीय विवरण देता है; अनुच्छेद 113-117 अनुदान, विनियोग, अनुपूरक अनुदान और वित्त विधेयक संभालते हैं।

  2. 2

    राजकोषीय घाटा कुल व्यय घटा उधारी छोड़कर कुल प्राप्तियां है; यह सरकार की शुद्ध उधारी ज़रूरत बताता है।

  3. 3

    राजस्व घाटा चालू आय से अधिक चालू खर्च दिखाता है; प्रभावी राजस्व घाटा पूंजीगत संपत्ति बनाने वाले अनुदान घटाता है।

  4. 4

    प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे से ब्याज भुगतान हटाता है और चालू नीतिगत उधारी ज़रूरत दिखाता है।

  5. 5

    FRBM अधिनियम, 2003 पारदर्शिता, मध्यम अवधि विवरण, घाटा लक्ष्य और RBI से सामान्य सीधी उधारी पर रोक का ढांचा देता है।

  6. 6

    2018 के FRBM बदलाव में ऋण को मुख्य लक्ष्य बनाया गया: केंद्र और राज्यों का कुल सरकारी ऋण GDP के 60% और केंद्र सरकार का ऋण 40% तक रखने का लक्ष्य।

  7. 7

    बजट 2026-27 में संघ का राजकोषीय घाटा GDP के 4.3% और राजस्व घाटा 1.5% पर अनुमानित है।

  8. 8

    बजट से बाहर उधारी, गारंटी और भुगतान बकाया मुख्य घाटा नियंत्रित दिखने पर भी राजकोषीय दबाव छिपा सकते हैं।

  9. 9

    पूंजीगत व्यय सामान्यतः राजस्व खर्च से अधिक वृद्धि-समर्थक होता है, लेकिन गुणवत्ता और क्रियान्वयन भी उतने ही अहम हैं।

  10. 10

    राज्य उधारी अनुशासन राज्य के FRBM कानूनों, वित्त आयोग की सिफारिशों और जहां लागू हो वहां अनुच्छेद 293 की अनुमति पर निर्भर करता है।

राजकोषीय नीति का ढांचा और UPSC के लिहाज़ से महत्व

राजकोषीय नीति कराधान, सरकारी व्यय, उधारी और गारंटी के ज़रिये मांग, वृद्धि, पुनर्वितरण और व्यापक आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है। प्रीलिम्स में गलती अक्सर यहां होती है कि इसे केवल बजट भाषण समझ लिया जाता है; असल में यह संसद, संचित निधि, घाटे की गणना और FRBM अनुशासन से जुड़ा कानूनी और लेखा ढांचा है।

  • मूल अर्थ: राजकोषीय नीति में सरकार खर्च, कर और हस्तांतरण भुगतान बदलती है; मौद्रिक नीति में RBI मुद्रा और ऋण की स्थितियां बदलता है। दोनों का असर जुड़ता है, पर अधिकार और औज़ार अलग हैं।
  • दो मुख्य रुख: मंदी या कमजोर मांग में खर्च बढ़ाना या कर घटाना विस्तारवादी रुख है; मांग और उधारी को साधने के लिए खर्च की गति घटाना, कर बढ़ाना या घाटा कम करना संकुचनकारी रुख है।
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 112 वार्षिक वित्तीय विवरण की बात करता है; अनुच्छेद 113-117 अनुदान मांग, विनियोग और कर प्रस्ताव की संसदीय प्रक्रिया बताते हैं; अनुच्छेद 266-267 संचित निधि, आकस्मिकता निधि और लोक लेखा का ढांचा देते हैं।
  • बजट पहले से लगाया गया अनुमान है: बजट अनुमान अगले वर्ष की योजना है, संशोधित अनुमान चालू वर्ष का अद्यतन अनुमान है और वास्तविक आंकड़े पिछले वर्ष के लेखापरीक्षित परिणाम बताते हैं। UPSC इसी भेद पर कथन बनाता है।
  • विकास से संबंध: राजकोषीय नीति सामाजिक क्षेत्र, पूंजीगत व्यय, सब्सिडी, DBT, रक्षा, ब्याज भुगतान और राज्यों को अनुदान के लिए पैसा देती है। इसलिए गरीबी, समावेशन और सतत विकास पर इसका सीधा असर पड़ता है।
  • स्थिरीकरण से संबंध: मांग कमजोर हो तो खर्च बढ़ाना और अच्छे समय में घाटा कम करना प्रतिचक्रीय नीति है; उलटा रुख अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव को और तेज कर सकता है।
  • वितरण से संबंध: प्रत्यक्ष कर, लक्षित सब्सिडी, DBT और सामाजिक क्षेत्र का खर्च पुनर्वितरण करते हैं। बहुत फैली हुई सब्सिडी या अप्रत्यक्ष करों का ज़्यादा बोझ इस लक्ष्य को कमजोर कर सकता है।
  • टिकाऊपन से संबंध: उधारी आज का खर्च चलाती है, लेकिन भविष्य में ब्याज का बोझ बनाती है। टिकाऊ बजट वही है जो ऋण-सेवा को संभालते हुए वृद्धि बढ़ाने वाले पूंजीगत व्यय को बचाए।
  • प्रीलिम्स प्राथमिकता: पहले बजट के घटक, फिर घाटों के सूत्र, फिर संवैधानिक प्रक्रिया, फिर FRBM लक्ष्य और छूट, फिर ताज़ा राजकोषीय आंकड़े पढ़ें।
  • एक पंक्ति में बात: सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण है, जबकि राजकोषीय नीति उस विवरण के ज़रिए अर्थव्यवस्था को दिशा देने की व्यापक नीति है।

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संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQघाटा संकेतकों पर निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. राजकोषीय घाटा कुल प्राप्तियों से उधारी को बाहर रखता है। 2. प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाकर मिलता है। 3. राजस्व घाटा हमेशा राजकोषीय घाटे से कम होता है। कौन-से कथन सही हैं?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aकेवल 1 और 2सही
  2. Bकेवल 2 और 3
  3. Cकेवल 1 और 3
  4. D1, 2 और 3

व्याख्या

कथन 1 और 2 परिभाषा से सही हैं। कथन 3 बहुत निरपेक्ष है; आपसी आकार प्राप्तियों और व्यय की संरचना पर निर्भर करता है।

~50 शब्द · 1 अंक