मुख्य तथ्य

  • शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के भीतर उपकरण, नेटवर्क, माध्यम और सूचना से जुड़ी प्रक्रियाएँ आती हैं।
  • डिजिटल लर्निंग डिजिटल साधनों से समर्थित सीखने को बताती है, जबकि ई-लर्निंग इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी जाने वाली योजनाबद्ध शिक्षा है और ऑनलाइन, ऑफलाइन या...
  • तकनीक के एकीकरण की शुरुआत सीखने के परिणाम और शिक्षण-विधि से होती है। पहले उपकरण चुनना साधन-केंद्रित गलती है।
  • व्यवहारवादी अभ्यास, संज्ञानात्मक सहारा, रचनावादी खोज और कनेक्टिविस्ट नेटवर्क तकनीक के अलग-अलग इस्तेमाल बताते हैं, जो एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
  • वर्चुअल कक्षा एक योजनाबद्ध सामाजिक और शिक्षण स्थान है। वह केवल लाइव वीडियो बैठक या रिकॉर्डिंग का भंडार नहीं है।

मुख्य बिंदु

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    शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के भीतर उपकरण, नेटवर्क, माध्यम और सूचना से जुड़ी प्रक्रियाएँ आती हैं। इसे केवल कंप्यूटर, प्रोजेक्टर या इंटरनेट कनेक्शन मानना गलत है।

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    डिजिटल लर्निंग डिजिटल साधनों से समर्थित सीखने को बताती है, जबकि ई-लर्निंग इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी जाने वाली योजनाबद्ध शिक्षा है और ऑनलाइन, ऑफलाइन या ब्लेंडेड हो सकती है।

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    तकनीक के एकीकरण की शुरुआत सीखने के परिणाम और शिक्षण-विधि से होती है। पहले उपकरण चुनना साधन-केंद्रित गलती है।

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    व्यवहारवादी अभ्यास, संज्ञानात्मक सहारा, रचनावादी खोज और कनेक्टिविस्ट नेटवर्क तकनीक के अलग-अलग इस्तेमाल बताते हैं, जो एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।

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    वर्चुअल कक्षा एक योजनाबद्ध सामाजिक और शिक्षण स्थान है। वह केवल लाइव वीडियो बैठक या रिकॉर्डिंग का भंडार नहीं है।

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    समकालिक लर्निंग तुरंत संपर्क देती है, जबकि असमकालिक लर्निंग लचीलापन और सोचने का समय देता है। अच्छी पाठ्य-योजना दोनों को उद्देश्य के अनुसार जोड़ती है।

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    यूनेस्को का शिक्षक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी कौशल ढाँचा एकीकरण के क्रमशः समृद्ध स्तरों के रूप में ज्ञान अर्जन, ज्ञान की गहराई और ज्ञान सृजन को अलग करता है।

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    राजनीति विज्ञान में डिजिटल अभिलेख, संवैधानिक पाठ, चुनावी आँकड़े, मानचित्र और व्यवस्थित सिमुलेशन प्रमाण, अवधारणा और तर्क को जोड़ सकते हैं।

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    डिजिटल आकलन को सीखने के परिणाम, कार्य और कसौटियों के अनुरूप होना चाहिए। उसमें रचनात्मक तथा संकलनात्मक प्रमाण के साथ वैधता, निष्पक्षता और निजता की सुरक्षा ज़रूरी है।

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    डिजिटल खाई में पहुँच, कौशल, भाषा, दिव्यांगता, लैंगिक स्थिति, स्थान और इस्तेमाल की गुणवत्ता शामिल हैं। केवल उपकरण दे देना भागीदारी की गारंटी नहीं है।

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    डिजिटल माहौल में भी समझाने, सवाल पूछने, चर्चा सँभालने, फीडबैक देने, समावेशन और नैतिक निर्णय के लिए शिक्षक की मौजूदगी केंद्रीय रहती है।

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    परीक्षा के लिए तैयार मूल्यांकन में पहुँच और सीखने, गतिविधि और उपलब्धि, प्रतिस्थापन और वास्तविक रूपांतरण, तथा डेटा और वैध प्रमाण के बीच फर्क साफ होना चाहिए।

अर्थ, दायरा और अवधारणात्मक सीमाएँ

शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का अर्थ डिजिटल उपकरणों, नेटवर्क, माध्यमों और सूचना से जुड़ी प्रक्रियाओं का उद्देश्यपूर्ण इस्तेमाल है। इससे पढ़ाने, सीखने, संवाद, प्रशासन और आकलन को सहारा मिलता है। यह अर्थ जानबूझकर कंप्यूटर से व्यापक रखा गया है। रेडियो कार्यक्रम, ऑफलाइन डिजिटल भंडार, मोबाइल फोन, इंटरैक्टिव बोर्ड, स्कूल नेटवर्क, लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म और सुलभ डिजिटल दस्तावेज सभी इसका हिस्सा हो सकते हैं। फिर भी किसी उपकरण की मौजूदगी अपने-आप तकनीक का एकीकरण साबित नहीं करती। एकीकरण तब होता है जब साधन तय सीखने के परिणाम के संबंध में विद्यार्थी के काम को मजबूत करे या बदल दे।

आपस में जुड़े कुछ शब्दों का फर्क साफ रखना ज़रूरी है। डिजिटल लर्निंग सबसे व्यापक शैक्षिक अभिव्यक्ति है, जिसमें सीखने का कोई सार्थक हिस्सा डिजिटल साधन या प्रक्रिया से समर्थित होता है। ई-लर्निंग इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से दी या समर्थित योजनाबद्ध पढ़ाई है। इसके लिए लगातार इंटरनेट ज़रूरी नहीं, क्योंकि डाउनलोड किए गए पाठ, स्थानीय सर्वर और ऑफलाइन ऐप भी काम आ सकते हैं। ऑनलाइन लर्निंग इसका अधिक सीमित रूप है जिसमें पहुँच या संवाद के लिए नेटवर्क ज़रूरी है। ब्लेंडेड लर्निंग आमने-सामने और डिजिटल गतिविधियों को एक पाठ्यक्रम में सोच-समझकर जोड़ती है। संकट के समय की अस्थायी दूरस्थ पढ़ाई को सावधानी से बनाए गए ऑनलाइन पाठ्यक्रम के बराबर नहीं मानना चाहिए।

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की तीन अलग भूमिकाएँ समझी जा सकती हैं। यह स्वयं सीखने की विषय-वस्तु हो सकती है, जैसे डिजिटल साक्षरता, स्रोत की जाँच या सुरक्षित संवाद सीखना। यह सीखने का माध्यम हो सकती है, जैसे राजनीति विज्ञान पढ़ाने के लिए मानचित्र, अभिलेख, क्विज़ या चर्चा-फोरम का इस्तेमाल। यह प्रशासन और आकलन का ढाँचा भी बन सकती है, जैसे उपस्थिति, फीडबैक और प्रगति का डिजिटल रिकॉर्ड। ये भूमिकाएँ साथ आ सकती हैं, पर उत्तर में यह बताना चाहिए कि चर्चा किस भूमिका की है।

शैक्षिक कसौटी नयापन नहीं, उद्देश्य के लिए उपयुक्तता है। कोई साधन तभी उचित है जब वह पहुँच, प्रस्तुतीकरण, अभ्यास, संवाद, फीडबैक या सृजन को बेहतर करे और उसके टाले जा सकने वाले नुकसान लाभ से अधिक न हों। एक ही साधन किसी पाठ में निष्क्रिय सुनना और दूसरे में सक्रिय खोज करा सकता है। इसलिए तकनीक अपने-आप विद्यार्थी-केंद्रित या प्रभावी नहीं होती। उसका मूल्य उद्देश्य, कार्य-योजना, शिक्षक के मार्गदर्शन, विद्यार्थी की तैयारी, भाषा, सुलभता, ढाँचे और आकलन पर निर्भर है। अच्छे उत्तर को उपकरणों की सूची से आगे बढ़कर विद्यार्थी, विषय-वस्तु, शिक्षक, कार्य और संदर्भ का संबंध समझाना चाहिए।

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