मुख्य तथ्य

  • पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन न्याय, सद्गुण, सत्ता, सहमति, स्वतंत्रता, समानता और राजनीतिक शासन की सामाजिक स्थितियों पर चलने वाली लंबी बहस है।
  • प्लेटो न्याय को विवेक, उत्साह और इच्छाओं के सामंजस्य से जोड़ते हैं और दार्शनिक शिक्षा पाए संरक्षकों को शासन सौंपते हैं, लेकिन उनकी व्यवस्था आम लोगों क...
  • अरस्तू वास्तविक संविधानों का अध्ययन करते हैं, विचार-विमर्श और न्यायिक पद में भागीदारी से नागरिकता समझाते हैं और बड़े मध्य वर्ग वाली स्थिर मिश्रित राजव...
  • मैकियावेली राजनीति को आवश्यकता, टकराव, भाग्य और संस्थागत बनावट से प्रभावित प्रभावी कर्म का क्षेत्र मानते हैं; उन्हें केवल नैतिकता-विरोधी कहना गलत है।
  • हॉब्स समान असुरक्षा, भय और अनुबंध से अविभाजित संप्रभुता का तर्क देते हैं और शांति को राजनीतिक सत्ता का बुनियादी उद्देश्य मानते हैं।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन न्याय, सद्गुण, सत्ता, सहमति, स्वतंत्रता, समानता और राजनीतिक शासन की सामाजिक स्थितियों पर चलने वाली लंबी बहस है।

  2. 2

    प्लेटो न्याय को विवेक, उत्साह और इच्छाओं के सामंजस्य से जोड़ते हैं और दार्शनिक शिक्षा पाए संरक्षकों को शासन सौंपते हैं, लेकिन उनकी व्यवस्था आम लोगों की राजनीतिक पसंद सीमित करती है।

  3. 3

    अरस्तू वास्तविक संविधानों का अध्ययन करते हैं, विचार-विमर्श और न्यायिक पद में भागीदारी से नागरिकता समझाते हैं और बड़े मध्य वर्ग वाली स्थिर मिश्रित राजव्यवस्था को बेहतर मानते हैं।

  4. 4

    मैकियावेली राजनीति को आवश्यकता, टकराव, भाग्य और संस्थागत बनावट से प्रभावित प्रभावी कर्म का क्षेत्र मानते हैं; उन्हें केवल नैतिकता-विरोधी कहना गलत है।

  5. 5

    हॉब्स समान असुरक्षा, भय और अनुबंध से अविभाजित संप्रभुता का तर्क देते हैं और शांति को राजनीतिक सत्ता का बुनियादी उद्देश्य मानते हैं।

  6. 6

    लॉक सहमति, बहुमत के फैसले और गंभीर विश्वासघात के विरुद्ध प्रतिरोध के अधिकार पर आधारित सीमित, न्यासी सरकार से प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करते हैं।

  7. 7

    रूसो सामान्य इच्छा को निजी हितों के जोड़ से अलग रखते हैं और नागरिक स्वतंत्रता को उन कानूनों का पालन मानते हैं जिन्हें नागरिक मिलकर अपने लिए बनाते हैं।

  8. 8

    मिल का हानि सिद्धांत व्यक्तित्व और खुली बहस की रक्षा करता है, जबकि उनका प्रतिनिधि सिद्धांत शिक्षा, भागीदारी और बहुमत के दबाव से बचाव को भी महत्व देता है।

  9. 9

    मार्क्स राजनीतिक संस्थाओं को भौतिक उत्पादन और वर्ग-सत्ता से जोड़ते हैं तथा दिखाते हैं कि औपचारिक राजनीतिक समानता के साथ गहरी सामाजिक और आर्थिक असमानता रह सकती है।

  10. 10

    अनुबंधवादी चिंतकों का कोई एक साझा सिद्धांत नहीं है: हॉब्स सुरक्षा के लिए सत्ता अधिकृत करते हैं, लॉक अधिकारों के लिए सरकार सीमित करते हैं और रूसो सामूहिक स्वशासन की रचना करते हैं।

  11. 11

    अच्छी तुलना वर्णन और आदर्श को अलग करती है, विश्लेषण की इकाई पहचानती है और हर चिंतक को सत्ता, स्वतंत्रता, संपत्ति, समानता तथा संस्थागत सुरक्षा के आधार पर परखती है।

  12. 12

    भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र से अधिकार, लोक-व्यवस्था, प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और नागरिक शिक्षा का विश्लेषण किया जा सकता है, पर यह दावा नहीं करना चाहिए कि किसी एक चिंतक ने सीधे इसकी रचना की।

परंपरा को कैसे पढ़ें: संदर्भ, मूल रचना और तर्क

पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन कोई एक सिद्धांत नहीं है जो प्राचीन यूनान से आधुनिक यूरोप तक सीधी रेखा में बढ़ता हो। यह अलग-अलग राजनीतिक दुनिया में बने तर्कों की शृंखला है। प्लेटो और अरस्तू ने यूनानी नगर-राज्य के संदर्भ में लिखा, जहां नागरिक भागीदारी सीधी थी, लेकिन बहुत से लोग नागरिकता से बाहर थे। मैकियावेली ने पुनर्जागरणकालीन इटली की अस्थिर रियासतों और गणराज्यों पर विचार किया। हॉब्स और लॉक ने 17वीं सदी में धर्म, राजतंत्र और संसद से जुड़े संघर्षों के बीच लिखा। रूसो ने 18वीं सदी के वाणिज्यिक समाज में असमानता और पराधीनता को चुनौती दी। मिल प्रतिनिधि शासन, जनमत और औद्योगिक आधुनिकता से जूझे। मार्क्स ने पूंजीवाद, मजदूरी-श्रम और वर्ग-संघर्ष का विश्लेषण किया। संदर्भ यह बताता है कि चिंतक ने कौन-सा सवाल क्यों उठाया, पर उसका हर उत्तर संदर्भ से अपने-आप तय नहीं हो जाता।

पढ़ते समय तीन स्तर अलग रखें। पहला है समस्या की पहचान: चिंतक मौजूदा राजनीति में क्या खराबी देखता है? प्लेटो व्यक्ति और नगर में अव्यवस्था देखते हैं; मैकियावेली कमजोरी और राजनीतिक निर्भरता; हॉब्स असुरक्षा; लॉक मनमानी सत्ता; रूसो पराधीनता और असमानता; मिल सामाजिक अनुरूपता; और मार्क्स शोषण तथा वर्ग-प्रभुत्व देखते हैं। दूसरा स्तर आदर्श उद्देश्य है: न्याय, नागरिक सद्गुण, शांति, अधिकार, स्वतंत्रता, व्यक्तित्व या मुक्ति। तीसरा संस्थागत तर्क है: दार्शनिक-शासक, मिश्रित शासन, संप्रभु सत्ता, सीमित सरकार, जनता द्वारा कानून बनाना, प्रतिनिधि संस्थाएं या संपत्ति-संबंधों का बदलाव। अच्छा उत्तर इन तीनों को जोड़ता है, केवल प्रसिद्ध कथन नहीं गिनाता।

पद्धतियां भी अलग हैं। प्लेटो संवाद और आदर्श मॉडल के ज़रिए तर्क करते हैं। अरस्तू संविधानों की तुलना करके पूछते हैं कि अलग परिस्थितियों में क्या व्यावहारिक है। मैकियावेली ऐतिहासिक उदाहरणों से राजनीति के बार-बार दिखने वाले ढंग समझाते हैं। अनुबंधवादी चिंतक प्राकृतिक अवस्था और सहमति की काल्पनिक कसौटी से वैधता जांचते हैं; वे किसी पुराने समय में सचमुच हुई बैठक का इतिहास नहीं लिख रहे। मिल नैतिक तर्क को संस्थागत सुधार से जोड़ते हैं। मार्क्स उत्पादन और वर्ग-सत्ता से राजनीतिक श्रेणियों की आलोचना करते हैं। इसलिए एक ही शब्द का अर्थ बदल सकता है। हॉब्स में स्वतंत्रता मुख्यतः बाहरी रोक का अभाव है, लॉक में वह प्राकृतिक नियम के भीतर है, रूसो में सामूहिक स्वशासन बनती है और मिल में व्यक्ति के विकास की रक्षा करती है।

दो सावधानियां कमजोर व्याख्या से बचाती हैं। पहली, किसी जटिल चिंतक को एक नारे में न समेटें। मैकियावेली केवल बुराई नहीं सिखाते, रूसो बहुमत की हर पसंद को सामान्य इच्छा नहीं कहते और मार्क्स हर राजनीतिक घटना का एक तत्काल आर्थिक कारण नहीं बताते। दूसरी, आलोचना भीतर और बाहर दोनों से करें। आज के मानदंड लगाने से पहले पूछें कि समाधान चिंतक के अपने उद्देश्य को पूरा करता है या नहीं। शिक्षक-स्तर का संतुलित उत्तर इसी क्रम में बनता है: समस्या बताइए, तर्क समझाइए, संस्थागत रूप पहचानिए और फिर बहिष्कार, तनाव तथा आज की उपयोगिता परखिए।

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