मुख्य तथ्य

  • तुलनात्मक संस्थागत अध्ययन यह पूछता है कि अलग संवैधानिक व्यवस्थाओं में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को अधिकार कैसे मिलता है, वे आपस में कैसे का...
  • ब्रिटेन में संसदीय संप्रभुता और कार्यपालिका-विधायिका का मेल है, जबकि राजनीतिक परंपराएँ और कार्यकारी कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा सरकार पर रोक लगाती हैं...
  • अमेरिका में अलग से चुने गए राष्ट्रपति, द्विसदनीय कांग्रेस, संघवाद और सर्वोच्च लिखित संविधान लागू कराने वाली अदालतों के बीच शक्ति बाँटी गई है।
  • फ्रांस का पंचम गणराज्य सीधे चुने गए राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली और संसद के प्रति जवाबदेह सरकार से जोड़ता है, इसलिए वहाँ दोहरी कार्यपालि...
  • फ्रांस में सहवास शासन बताता है कि जब राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सभा में समर्थक बहुमत न मिले, तब वही संवैधानिक शक्तियाँ अलग ढंग से चलती हैं।

मुख्य बिंदु

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    तुलनात्मक संस्थागत अध्ययन यह पूछता है कि अलग संवैधानिक व्यवस्थाओं में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को अधिकार कैसे मिलता है, वे आपस में कैसे काम करती हैं और उनकी जवाबदेही कैसे तय होती है।

  2. 2

    ब्रिटेन में संसदीय संप्रभुता और कार्यपालिका-विधायिका का मेल है, जबकि राजनीतिक परंपराएँ और कार्यकारी कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा सरकार पर रोक लगाती हैं।

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    अमेरिका में अलग से चुने गए राष्ट्रपति, द्विसदनीय कांग्रेस, संघवाद और सर्वोच्च लिखित संविधान लागू कराने वाली अदालतों के बीच शक्ति बाँटी गई है।

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    फ्रांस का पंचम गणराज्य सीधे चुने गए राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली और संसद के प्रति जवाबदेह सरकार से जोड़ता है, इसलिए वहाँ दोहरी कार्यपालिका है।

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    फ्रांस में सहवास शासन बताता है कि जब राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सभा में समर्थक बहुमत न मिले, तब वही संवैधानिक शक्तियाँ अलग ढंग से चलती हैं।

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    स्विट्जरलैंड में समान शक्तियों वाले दो सदन, 7 सदस्यों वाली सामूहिक संघीय परिषद, मजबूत संघवाद और प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक नियंत्रण एक साथ मिलते हैं।

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    स्विट्जरलैंड का सालाना राष्ट्रपति समान सदस्यों के बीच बैठक चलाने और प्रतिनिधित्व करने वाला पद है, अमेरिका या फ्रांस जैसा राष्ट्रपति-प्रधान कार्यकारी पद नहीं।

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    जापान संसदीय संवैधानिक राजतंत्र है, जहाँ सम्राट प्रतीक है, संसद प्रधानमंत्री को नामित करती है और मंत्रिमंडल संसद के प्रति सामूहिक रूप से जवाबदेह है।

  9. 9

    न्यायिक समीक्षा में बड़ा अंतर है: अमेरिका में मजबूत संवैधानिक समीक्षा, फ्रांस में विशेष और सामान्य संवैधानिक प्रक्रियाएँ, स्विट्जरलैंड में संघीय कानूनों की सीमित समीक्षा और जापान में ठोस मुकदमे के भीतर समीक्षा।

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    द्विसदनीयता का मकसद और ताकत हर जगह अलग है: ब्रिटेन में पुनर्विचार, अमेरिका और स्विट्जरलैंड में संघीय संतुलन, फ्रांस में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और जापान में निचले सदन की प्रधानता के साथ दोबारा विचार।

  11. 11

    औपचारिक संवैधानिक पाठ को दलों, चुनाव नियमों, परंपराओं, संघवाद, राजनीतिक संस्कृति और ऐतिहासिक अनुभव के साथ पढ़ना चाहिए।

  12. 12

    कोई देश शक्तियों के पूर्ण मेल या पूर्ण पृथक्करण का उदाहरण नहीं है; हर लोकतांत्रिक संविधान स्वायत्तता, सहयोग और आपसी नियंत्रण को मिलाता है।

  13. 13

    भारत से तुलना करते समय सबसे उपयोगी तरीका कार्य-आधारित है: केवल नाम मिलाने के बजाय विश्वास, विघटन, धन पर नियंत्रण, नियुक्तियों और संवैधानिक समीक्षा की तुलना कीजिए।

  14. 14

    परीक्षा के अच्छे उत्तर में पहले एक साझा कसौटी तय करें, उसी पर पाँचों व्यवस्थाओं की तुलना करें, एक ज़रूरी सीमा या अपवाद समझाएँ और अंत में तर्कपूर्ण संस्थागत निष्कर्ष दें।

तुलना का विषय और तरीका

तुलनात्मक शासन अलग-अलग समाजों की राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन करता है, ताकि बार-बार दिखने वाले पैटर्न और संदर्भ से पैदा हुए फर्क, दोनों समझे जा सकें। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका केवल तीन इमारतें या शक्तियों की सूचियाँ नहीं हैं। विधायिका प्रतिनिधित्व करती है, बहस करती है, कर लगाने की अनुमति देती है, कानून बनाती है और शासकों की जाँच करती है। कार्यपालिका नीति की दिशा तय करती है, कानून लागू करती है और संकट में कार्रवाई करती है। न्यायपालिका कानूनी विवाद सुलझाती है, वैध सत्ता की रक्षा करती है और संविधान अनुमति दे तो सार्वजनिक शक्ति की समीक्षा करती है। इसलिए असली सवाल संबंधों का है: हर संस्था को कौन चुनता है, उसका कार्यकाल कितना है, वह किसके प्रति जवाबदेह है, उसका कार्यकाल कैसे खत्म हो सकता है और टकराव में अंतिम बात किसकी मानी जाती है।

तुलना के पाँच तरीके उपयोगी हैं। कानूनी-संस्थागत तरीका संविधान, कानून, परंपराओं और अधिकार-क्षेत्र से शुरू होता है। ऐतिहासिक तरीका बताता है कि कोई बनावट क्यों उभरी: ब्रिटेन में धीरे-धीरे बना मंत्रिमंडलीय शासन, अमेरिका में केंद्रित शक्ति पर अविश्वास, पंचम गणराज्य से पहले फ्रांस की कार्यकारी अस्थिरता, स्विस कैंटनों के बीच तालमेल और जापान की युद्ध के बाद बनी संवैधानिक व्यवस्था। संरचनात्मक-कार्यात्मक तरीका देखता है कि अलग संस्थाएँ समान काम कैसे करती हैं। संवैधानिक अदालत, सामान्य उच्चतम न्यायालय और संसदीय समिति अलग प्रक्रियाओं से सत्ता पर रोक लगा सकती हैं। प्रणाली-आधारित तरीका माँग, निर्णय, परिणाम और प्रतिक्रिया का चक्र देखता है। तर्कसंगत चयन का तरीका बताता है कि चुनावी प्रोत्साहन और अड़ंगा लगाने के मौके रणनीति को कैसे आकार देते हैं। राजनीतिक संस्कृति वाला तरीका पूछता है कि एक ही नियम कहीं आक्रामक और कहीं संयम से क्यों इस्तेमाल होता है।

तीन सावधानियाँ ज़रूरी हैं। पहली, औपचारिक नियम पूरा संविधान नहीं बताते। ब्रिटिश परंपराएँ, अमेरिकी दल, फ्रांसीसी बहुमत, स्विस सहमति और जापानी दल-संगठन संस्थागत व्यवहार बदल देते हैं। दूसरी, नाम भ्रम पैदा कर सकते हैं। स्विस राष्ट्रपति अमेरिकी राष्ट्रपति जैसा नहीं है और जापान में संसद को सर्वोच्च अंग कहे जाने से न्यायिक समीक्षा खत्म नहीं होती। तीसरी, शक्ति के कई रूप हैं। कानूनी सर्वोच्चता, काम की सूची तय करने की क्षमता, नियुक्ति, धन पर नियंत्रण और राजनीतिक वैधता अलग जगहों पर हो सकती हैं। अच्छी तुलना एक साझा कसौटी तय करती है, हर देश को उसी पर परखती है और फिर फर्क पैदा करने वाली संस्थागत तथा सामाजिक स्थितियाँ समझाती है।

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