मुख्य तथ्य

  • राजनीतिक सिद्धांत में अवधारणाओं को साफ करना, व्याख्या, अर्थ-बोध और मानकीय मूल्यांकन साथ आते हैं। यह केवल विचारों का इतिहास या निजी राय नहीं है।
  • राजनीतिक सिद्धांत के कथित ह्रास का अर्थ 20वीं सदी के मध्य में विषय की दशा का आकलन था, न कि राजनीति पर हर गंभीर चिंतन का अंत।
  • तार्किक प्रत्यक्षवाद, तथ्य-मूल्य भेद, व्यवहारवादी सामाजिक विज्ञान और व्यापक विचारधाराओं पर अविश्वास ने सिद्धांत के स्वीकार्य दायरे को संकरा किया।
  • व्यवहारवाद ने केवल औपचारिक संस्थाओं से ध्यान हटाकर वास्तविक राजनीतिक भागीदारों के दिखाई देने वाले आचरण, रवैयों और आपसी संबंधों पर केंद्रित किया।
  • इसके मुख्य आग्रह नियमितता, सत्यापन, पद्धति की शुद्धता, उपयोगी होने पर मात्रात्मक अध्ययन, मूल्य-निरपेक्ष विश्लेषण, व्यवस्थित सिद्धांत और दूसरे सामाजिक...

मुख्य बिंदु

  1. 1

    राजनीतिक सिद्धांत में अवधारणाओं को साफ करना, व्याख्या, अर्थ-बोध और मानकीय मूल्यांकन साथ आते हैं। यह केवल विचारों का इतिहास या निजी राय नहीं है।

  2. 2

    राजनीतिक सिद्धांत के कथित ह्रास का अर्थ 20वीं सदी के मध्य में विषय की दशा का आकलन था, न कि राजनीति पर हर गंभीर चिंतन का अंत।

  3. 3

    तार्किक प्रत्यक्षवाद, तथ्य-मूल्य भेद, व्यवहारवादी सामाजिक विज्ञान और व्यापक विचारधाराओं पर अविश्वास ने सिद्धांत के स्वीकार्य दायरे को संकरा किया।

  4. 4

    व्यवहारवाद ने केवल औपचारिक संस्थाओं से ध्यान हटाकर वास्तविक राजनीतिक भागीदारों के दिखाई देने वाले आचरण, रवैयों और आपसी संबंधों पर केंद्रित किया।

  5. 5

    इसके मुख्य आग्रह नियमितता, सत्यापन, पद्धति की शुद्धता, उपयोगी होने पर मात्रात्मक अध्ययन, मूल्य-निरपेक्ष विश्लेषण, व्यवस्थित सिद्धांत और दूसरे सामाजिक विज्ञानों से जुड़ाव थे।

  6. 6

    व्यवहारवाद ने सर्वे, मतदान-अध्ययन, तुलनात्मक अध्ययन और सिद्धांत की जाँच को बेहतर किया, पर पद्धति कभी-कभी ऐतिहासिक रूप से ज़रूरी और नैतिक रूप से महत्त्वपूर्ण सवालों से कट गई।

  7. 7

    डेविड ईस्टन ने 1969 में उत्तर-व्यवहारवाद को व्यवहारवादी रूढ़ि के लिए चुनौती बताया, जिसकी मुख्य माँगें प्रासंगिकता और कार्रवाई थीं।

  8. 8

    उत्तर-व्यवहारवाद ने प्रमाण या तकनीक को नहीं छोड़ा। उसने तकनीक को सार्थक उद्देश्य के अधीन रखा और मूल्य-चयनों को खुली आलोचनात्मक जाँच का विषय बनाया।

  9. 9

    राजनीतिक सिद्धांत के पुनरुत्थान को न्याय, स्वतंत्रता, समानता, अधिकार, वैधता और लोकतंत्र पर नए विवादों से बल मिला, खासकर जॉन रॉल्स के बाद।

  10. 10

    समकालीन सिद्धांत बहुल है। उदारवादी, मार्क्सवादी, समुदायवादी, नारीवादी, उत्तर-औपनिवेशिक, बहुसांस्कृतिक, पर्यावरणवादी, विमर्शात्मक, आलोचनात्मक और व्याख्यावादी धाराएँ साथ मौजूद हैं और एक-दूसरे से बहस करती हैं।

  11. 11

    नारीवादी और उत्तर-औपनिवेशिक दृष्टियों ने परिवार, सामाजिक श्रेणी, पहचान, ज्ञान और ऐतिहासिक रूप से असमान संस्थाओं में सत्ता की जाँच करके राजनीति का दायरा बढ़ाया।

  12. 12

    अच्छा समकालीन अध्ययन अनुभवजन्य प्रमाण, अवधारणात्मक स्पष्टता, ऐतिहासिक संदर्भ और उचित मानकीय निर्णय को जोड़ता है, किसी एक को दूसरे में नहीं समेटता।

  13. 13

    भारतीय संवैधानिक विश्लेषण में न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुता और गरिमा मूल्यांकन के मानक भी हैं और अनुभवजन्य अध्ययन के विषय भी।

  14. 14

    परीक्षा के उत्तर में व्यवहारवाद और उत्तर-व्यवहारवाद का साफ अंतर करें, निरंतरता और बदलाव दोनों दिखाएँ, उनकी उपलब्धियों और सीमाओं की तुलना करें और तर्कपूर्ण निष्कर्ष दें।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

8 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें