मुख्य तथ्य

  • वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट पर चलने वाली हाइपरटेक्स्ट दस्तावेज़ प्रणाली है; इसका आविष्कार टिम बर्नर्स-ली ने सर्न में 1989 में किया।
  • आईपीवी4 32-बिट पता व्यवस्था है, जबकि आईपीवी6 128-बिट पता व्यवस्था है और बहुत बड़े IoT नेटवर्क के लिए उपयोगी है।
  • 5जी मोबाइल नेटवर्क की 5वीं पीढ़ी है; इसकी सैद्धांतिक अधिकतम गति 20 गीगाबिट प्रति सेकंड और विलंबता 1 मिलीसेकंड से कम मानी जाती है।
  • बिग डेटा को 5 V से पहचाना जाता है: आयतन, वेग, विविधता, विश्वसनीयता और मूल्य।
  • ब्लॉकचेन वितरित खाताबही तकनीक है; बिटकॉइन 2009 में सतोशी नाकामोटो से जुड़ा पहला प्रसिद्ध ब्लॉकचेन अनुप्रयोग था।

मुख्य बिंदु

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    वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट पर चलने वाली हाइपरटेक्स्ट दस्तावेज़ प्रणाली है; इसका आविष्कार टिम बर्नर्स-ली ने सर्न में 1989 में किया।

  2. 2

    आईपीवी4 32-बिट पता व्यवस्था है, जबकि आईपीवी6 128-बिट पता व्यवस्था है और बहुत बड़े IoT नेटवर्क के लिए उपयोगी है।

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    5जी मोबाइल नेटवर्क की 5वीं पीढ़ी है; इसकी सैद्धांतिक अधिकतम गति 20 गीगाबिट प्रति सेकंड और विलंबता 1 मिलीसेकंड से कम मानी जाती है।

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    AI मशीनों से सीखना, तर्क करना, भाषा समझना और दृश्य पहचान जैसे मानव-जैसे काम कराती है; मशीन लर्निंग इसका डेटा-आधारित उपक्षेत्र है।

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    बिग डेटा को 5 V से पहचाना जाता है: आयतन, वेग, विविधता, विश्वसनीयता और मूल्य।

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    क्लाउड कंप्यूटिंग में सर्वर, भंडारण, डेटाबेस और सॉफ्टवेयर जैसी सेवाएँ इंटरनेट पर मांग के अनुसार मिलती हैं।

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    ब्लॉकचेन वितरित खाताबही तकनीक है; बिटकॉइन 2009 में सतोशी नाकामोटो से जुड़ा पहला प्रसिद्ध ब्लॉकचेन अनुप्रयोग था।

इंटरनेट, नेटवर्क और वर्ल्ड वाइड वेब में अंतर क्या है?

इंटरनेट, नेटवर्क और वर्ल्ड वाइड वेब में मुख्य अंतर यह है कि नेटवर्क जुड़े हुए डिवाइसों की व्यवस्था है, इंटरनेट दुनिया का सबसे बड़ा विस्तृत नेटवर्क है और वर्ल्ड वाइड वेब उसी इंटरनेट पर चलने वाली हाइपरटेक्स्ट सेवा है। कंप्यूटर नेटवर्क परस्पर जुड़े कंप्यूटरों और डिवाइसों का समूह है, जिनसे डेटा, फ़ाइल, प्रिंटर, सर्वर और इंटरनेट जैसे संसाधन साझा किए जाते हैं। कवरेज के आधार पर व्यक्तिगत क्षेत्र नेटवर्क, स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क, महानगरीय क्षेत्र नेटवर्क और विस्तृत क्षेत्र नेटवर्क पढ़े जाते हैं। इंटरनेट सबसे बड़ा विस्तृत क्षेत्र नेटवर्क है। संचार मंत्रालय की PIB विज्ञप्ति के अनुसार मार्च 2024 में भारत में इंटरनेट ग्राहक 95.44 करोड़ थे, इसलिए इंटरनेट को केवल एक वेबसाइट या ऐप नहीं, बल्कि बहुत बड़े सार्वजनिक नेटवर्क के रूप में समझना चाहिए। नेटवर्क पर किसी डिवाइस की पहचान के लिए IP पता जरूरी होता है; इसके बिना डेटा पैकेट सही डिवाइस तक नहीं पहुँचते।

IPv4 32-बिट पता व्यवस्था है और इसमें लगभग 4.3 अरब पते मिलते हैं। इंटरनेट और मोबाइल डिवाइसों की तेज़ वृद्धि के कारण इसके सामान्य पते कम पड़ने लगे। IPv6 128-बिट पता व्यवस्था है और इसकी पता-क्षमता बहुत विशाल है, इसलिए भविष्य के नेटवर्क और IoT के लिए यह अधिक उपयुक्त है। वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट नहीं है, बल्कि इंटरनेट पर चलने वाली एक सेवा है। यह परस्पर जुड़े हाइपरटेक्स्ट दस्तावेज़ों की प्रणाली है, जिसे टिम बर्नर्स-ली ने सर्न में 1989 में विकसित किया।

परीक्षा संकेत: इंटरनेट पूरा नेटवर्क है, वेब उस नेटवर्क पर चलने वाली हाइपरटेक्स्ट सेवा है।

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