मुख्य तथ्य

  • राजनीति विज्ञान सत्ता, अधिकार, संस्थाओं, संघर्ष, सहयोग और सार्वजनिक फैसलों को परखने वाले सिद्धांतों का अध्ययन करता है।
  • राज्य और सरकार अलग हैं: राज्य स्थायी कानूनी-राजनीतिक व्यवस्था है, जबकि सरकार कुछ समय के लिए पद संभालने वाले लोगों का समूह है।
  • शक्ति परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता है; अधिकार वह शक्ति है जिसे उचित माना जाए; वैधता वह स्वीकृति है जो अधिकार को टिकाती है।
  • स्वतंत्रता, समानता और न्याय जुड़े हुए मूल्य हैं: स्वतंत्रता मनमानी रोक का, समानता हीन नागरिक दर्जे का और न्याय अनुचित व्यवस्था का विरोध करता है।
  • लोकतंत्र केवल चुनाव नहीं है; इसमें राजनीतिक समानता, अधिकार, जवाबदेही, विपक्ष, सार्वजनिक तर्क और शांतिपूर्ण सत्ता-परिवर्तन भी चाहिए।

मुख्य बिंदु

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    राजनीति विज्ञान सत्ता, अधिकार, संस्थाओं, संघर्ष, सहयोग और सार्वजनिक फैसलों को परखने वाले सिद्धांतों का अध्ययन करता है।

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    राज्य और सरकार अलग हैं: राज्य स्थायी कानूनी-राजनीतिक व्यवस्था है, जबकि सरकार कुछ समय के लिए पद संभालने वाले लोगों का समूह है।

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    शक्ति परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता है; अधिकार वह शक्ति है जिसे उचित माना जाए; वैधता वह स्वीकृति है जो अधिकार को टिकाती है।

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    स्वतंत्रता, समानता और न्याय जुड़े हुए मूल्य हैं: स्वतंत्रता मनमानी रोक का, समानता हीन नागरिक दर्जे का और न्याय अनुचित व्यवस्था का विरोध करता है।

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    लोकतंत्र केवल चुनाव नहीं है; इसमें राजनीतिक समानता, अधिकार, जवाबदेही, विपक्ष, सार्वजनिक तर्क और शांतिपूर्ण सत्ता-परिवर्तन भी चाहिए।

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    भारत का संविधान संस्थाएँ बनाता है, अधिकार बाँटता है और लागू किए जा सकने वाले अधिकारों व संवैधानिक प्रक्रियाओं से सार्वजनिक सत्ता को सीमित करता है।

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    भारत में संसदीय शासन है: संवैधानिक प्रमुख और राजनीतिक रूप से जवाबदेह मंत्रिपरिषद की भूमिकाएँ अलग हैं।

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    विधायिका कानून बनाती और कार्यपालिका को जवाबदेह रखती है, कार्यपालिका कानून लागू करती है और न्यायपालिका विवाद सुलझाकर संवैधानिकता परखती है।

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    संघवाद साझा शासन और क्षेत्रीय स्वशासन को जोड़ता है; संविधान विषय बाँटने के साथ समन्वय और विवाद-निपटारे की व्यवस्था भी देता है।

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    अनुच्छेद 324 निर्धारित राष्ट्रीय और राज्य चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग को देता है।

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    राजस्थान में एक सदन वाली विधायिका है जिसे राजस्थान विधान सभा कहा जाता है और इसकी वर्तमान सदस्य संख्या 200 है।

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    राष्ट्रवाद, पंथनिरपेक्षता, समाजवाद, उदारवाद और नारीवाद अलग सवालों के उत्तर देते हैं; उन्हें मुख्य मूल्य, विश्लेषण की इकाई और सत्ता के नज़रिए से समझें।

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    विश्व राजनीति में कोई विश्व सरकार नहीं है, इसलिए राज्य सुरक्षा और साझा हितों के लिए शक्ति, नियम, संस्थाएँ, बातचीत और सहयोग का सहारा लेते हैं।

राजनीति विज्ञान की प्रकृति, क्षेत्र और अध्ययन-पद्धतियाँ

राजनीति विज्ञान क्या पढ़ता है

राजनीति विज्ञान सार्वजनिक सत्ता का क्रमबद्ध अध्ययन है। यह पूछता है कि सत्ता किसे मिलती है, संस्थाएँ उसे कैसे बाँटती और नियंत्रित करती हैं, सामूहिक फैसले लोगों पर कैसे लागू होते हैं और उन फैसलों को किन मानकों पर उचित या अनुचित कहा जा सकता है। इसका क्षेत्र रोज़ की दलगत राजनीति से कहीं बड़ा है। इसमें राज्य, सरकार, संविधान, कानून, नागरिकता, अधिकार, सार्वजनिक नीति, राजनीतिक विचार, सामाजिक आंदोलन, चुनाव, प्रशासन और राज्यों के आपसी संबंध शामिल हैं। जहाँ लोग साझा नियमों, सीमित संसाधनों या सामूहिक लक्ष्यों पर असहमत होते हुए भी कोई फैसला करते हैं, वहाँ राजनीति मौजूद होती है। इसलिए संघर्ष राजनीति का सामान्य हिस्सा है; बातचीत, समझौता, प्रतिनिधित्व और सहयोग भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

एक बुनियादी अंतर तथ्यपरक और मानकपरक अध्ययन का है। तथ्यपरक अध्ययन पूछता है कि वास्तव में क्या है और ऐसा क्यों है, जैसे मतदाता किस आधार पर फैसला करते हैं या कोई संस्था नीति को कैसे बदलती है। मानकपरक अध्ययन पूछता है कि क्या होना चाहिए, जैसे अधिकार कब उचित है या न्यायपूर्ण बँटवारा कैसा हो। राजनीतिक सिद्धांत दोनों को जोड़ता है। अच्छी संस्था पर निर्णय के लिए सही तथ्य चाहिए, और किन तथ्यों को महत्वपूर्ण माना जाए यह भी किसी मूल्य-संबंधी सवाल से जुड़ा हो सकता है। दूसरा अंतर औपचारिक संस्था और वास्तविक व्यवहार का है। संविधान किसी पद की शक्तियाँ लिखता है, पर परंपराएँ, दल, जनमत और नेतृत्व उसके काम करने के तरीके को प्रभावित करते हैं।

प्रमुख अध्ययन-पद्धतियाँ

  • संस्थागत पद्धति संविधान, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और प्रशासनिक निकायों को समझती है।
  • ऐतिहासिक पद्धति राजनीतिक संस्थाओं और विचारों के बदलाव का क्रम देखती है।
  • तुलनात्मक पद्धति अलग व्यवस्थाओं की समान संस्थाओं की तुलना करती है।
  • व्यवहारवादी पद्धति मतदान, सर्वेक्षण और दिखाई देने वाले राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन करती है।
  • राजनीतिक अर्थव्यवस्था सत्ता को उत्पादन, संपत्ति, वर्ग और वितरण से जोड़ती है।
  • नारीवादी और उपनिवेशोत्तर दृष्टियाँ पूछती हैं कि किसके अनुभव को सामान्य माना गया और किसकी शक्ति छिपी रही।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न में पद्धति को निष्कर्ष न समझें। तुलना एक तरीका है, यह दावा नहीं कि सभी व्यवस्थाएँ एक जैसी हैं। राजनीतिक सिद्धांत केवल निजी राय नहीं है; वह अवधारणाएँ साफ़ करता, तर्क परखता और विरोधाभास सामने लाता है। राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन भी एक नहीं हैं; प्रशासन इस बड़े विषय का एक महत्वपूर्ण भाग है। अच्छे उत्तर में अवधारणा, संस्था और व्यवहार तीनों जोड़ें: पहले अर्थ बताइए, फिर संबंधित व्यवस्था पहचानिए और अंत में समझाइए कि वह काम कैसे करती है तथा उसमें कौन-सा तनाव पैदा हो सकता है।

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